शहरी चौपाल ब्यूरो
सहारनपुर। कलेक्ट्रेट परिसर स्थित मस्जिद प्रकरण को लेकर समाजवादी पार्टी के 23 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल को मंडलायुक्त से मिलने से पहले ही पुलिस-प्रशासन की कार्रवाई का सामना करना पड़ा। सपा नेताओं के अनुसार, सोमवार देर रात से ही प्रतिनिधिमंडल में शामिल जनपद के कई नेताओं, विधायकों, पूर्व सांसदों और पार्टी पदाधिकारियों को उनके आवास पर हाउस अरेस्ट कर लिया गया। सपा नेताओं ने प्रशासन की कार्रवाई की कड़ी निंदा करते हुए इसे लोकतंत्र की हत्या और संविधान के विपरीत बताया।

सपा नेताओं के मुताबिक, पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के निर्देश पर 23 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल को मंडलायुक्त डॉ. रूपेश कुमार से मुलाकात करनी थी। प्रतिनिधिमंडल की ओर से मंडलायुक्त से मिलने के लिए पत्र भी जारी किया गया था। निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार प्रतिनिधिमंडल को सोमवार दोपहर 12 बजे मंडलायुक्त कार्यालय पहुंचकर कलेक्ट्रेट परिसर स्थित मस्जिद प्रकरण को लेकर अपनी बात रखनी थी।

प्रतिनिधिमंडल में विधान परिषद में नेता प्रतिपक्ष लाल बिहारी यादव, सपा जिलाध्यक्ष चौधरी अब्दुल वाहिद, महानगर अध्यक्ष हाजी नवाब अंसारी, सांसद हरेंद्र मलिक, सांसद इकरा हसन, राष्ट्रीय महासचिव चौधरी रुद्रसेन, पूर्व सांसद हाजी फजलुर रहमान, विधायक आशु मलिक, विधायक उमर अली खान, विधायक अतुल प्रधान, विधायक रामऔतार सैनी, एमएलसी किरणपाल कश्यप, पूर्व विधायक माविया अली, सपा अनुसूचित जाति प्रकोष्ठ के राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल भारती, पूर्व दर्जा प्राप्त राज्यमंत्री मांगे राम कश्यप, पूर्व मंत्री विनोद तेजियान, राज्य कार्यकारिणी सदस्य फैसल सलमानी, सपा नेता शायान मसूद, पार्षद अभिषेक टिंकू अरोड़ा, मुजफ्फरनगर जिलाध्यक्ष जिया चौधरी, सपा अल्पसंख्यक सभा के जिलाध्यक्ष ओसामा गाड़ा और विधानसभा अध्यक्ष काशिफ अल्वी शामिल थे।

सपा नेताओं का आरोप है कि प्रतिनिधिमंडल के मंडलायुक्त से मिलने के कार्यक्रम को देखते हुए पुलिस प्रशासन ने देर रात से ही नेताओं के आवास पर पहुंचकर उन्हें बाहर निकलने से रोक दिया। कई नेताओं को उनके घरों में ही नजरबंद कर दिया गया। इसके चलते प्रतिनिधिमंडल के निर्धारित कार्यक्रम पर भी असर पड़ा।
हाउस अरेस्ट किए जाने की सूचना के बाद सपा नेताओं ने प्रशासन की कार्रवाई पर नाराजगी जताई। उनका कहना है कि किसी जनप्रतिनिधिमंडल को प्रशासनिक अधिकारी से मिलने से रोकना लोकतांत्रिक व्यवस्था के अनुरूप नहीं है। नेताओं ने आरोप लगाया कि प्रशासन संविधान में दिए गए लोकतांत्रिक अधिकारों के विपरीत कार्रवाई कर रहा है।

सपा नेताओं ने कहा कि पार्टी प्रतिनिधिमंडल शांतिपूर्ण एवं लोकतांत्रिक तरीके से मंडलायुक्त से मुलाकात कर कलेक्ट्रेट परिसर स्थित मस्जिद प्रकरण से संबंधित अपनी बात रखना चाहता था। इसके बावजूद नेताओं को घरों में नजरबंद किया जाना दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने प्रशासन से हाउस अरेस्ट किए गए नेताओं को तत्काल मुक्त करने और प्रतिनिधिमंडल को मंडलायुक्त से मिलने की अनुमति देने की मांग की।
प्रशासन की ओर से सुरक्षा और कानून-व्यवस्था को लेकर एहतियाती कदम उठाए जाने की बात कही गई है। प्रतिनिधिमंडल के प्रस्तावित दौरे को लेकर पुलिस ने प्रमुख नेताओं और संभावित स्थानों पर निगरानी बढ़ा दी। जनपद में राजनीतिक गतिविधियों को देखते हुए पुलिस बल भी सतर्क रहा।
कलेक्ट्रेट परिसर स्थित मस्जिद प्रकरण को लेकर पिछले कुछ समय से राजनीतिक गतिविधियां तेज हैं। इसी क्रम में समाजवादी पार्टी द्वारा मंडलायुक्त से मुलाकात के लिए 23 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल तय किया गया था। प्रतिनिधिमंडल के सदस्यों को हाउस अरेस्ट किए जाने के बाद सपा और प्रशासन के बीच टकराव की स्थिति और चर्चा में आ गई है। सपा नेताओं ने कहा कि वे इस मामले को लोकतांत्रिक और संवैधानिक तरीके से उठाते रहेंगे।








