शहरी चौपाल ब्यूरो
सहारनपुर। कलेक्ट्रेट परिसर में पांच सितंबर को हुई मस्जिद ध्वस्तीकरण की कार्रवाई के विरोध में समाजवादी पार्टी के प्रस्तावित प्रतिनिधिमंडल को रोके जाने पर देहात विधायक आशु मलिक ने प्रदेश सरकार और प्रशासन पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि सपा प्रतिनिधिमंडल सहारनपुर पहुंचा है और इस मामले ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया है। संविधान में विश्वास रखने वाले प्रत्येक व्यक्ति की भावनाएं इस घटना से आहत हुई हैं।
आशु मलिक ने आरोप लगाया कि सपा प्रतिनिधिमंडल के नेताओं और जनप्रतिनिधियों को हाउस अरेस्ट किया जा रहा है तथा कई नेताओं को रास्ते में ही रोक दिया गया। उन्होंने कहा कि वे सर्किट हाउस जाकर विधान परिषद में विपक्षी दल के नेता से मिलना चाहते थे, लेकिन प्रशासन ने किसी को वहां जाने की अनुमति नहीं दी। नेताओं के घरों के बाहर पुलिस तैनात कर उन्हें बाहर निकलने से रोका गया।
विधायक ने कहा कि जनप्रतिनिधियों का अधिकारियों से मिलना और अपनी बात रखना लोकतांत्रिक व्यवस्था का हिस्सा है। यदि जनप्रतिनिधियों को ही अधिकारियों से मिलने की अनुमति नहीं दी जाएगी तो यह सीधे तौर पर उनके लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन है। उन्होंने कहा कि प्रशासन को बताना चाहिए कि ऐसी कौन-सी बात है जिसे जनता और जनप्रतिनिधियों से छिपाया जा रहा है।
आशु मलिक ने कहा कि सरकार और प्रशासन को पारदर्शिता के साथ पूरे मामले की जानकारी सामने रखनी चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि सत्ता का दुरुपयोग किया जा रहा है और तानाशाही चरम पर पहुंच गई है। उन्होंने कहा कि शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखने जा रहे जनप्रतिनिधियों को रोकना किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए उचित नहीं है।
उन्होंने कहा कि सपा संविधान और लोकतांत्रिक मूल्यों में विश्वास करती है तथा जनता से जुड़े मुद्दों को लोकतांत्रिक तरीके से उठाती रहेगी। उन्होंने शासन-प्रशासन से सवाल किया कि यदि सब कुछ नियमों के अनुरूप है तो फिर प्रतिनिधिमंडल को मिलने से रोकने की जरूरत क्यों पड़ रही है। उन्होंने कहा कि इस तरह की कार्रवाई से लोगों के मन में कई सवाल खड़े हो रहे हैं।








