शहरी चौपाल ब्यूरो
सहारनपुर। पीएनबी की करेंसी चेस्ट में मिले 17.29 करोड़ रुपये के जाली नोटों की जांच में अब आउटसोर्स कर्मचारियों की भूमिका भी जांच एजेंसियों के निशाने पर है। निलंबित प्रबंधक अमित के करीबी बताए जा रहे एक कर्मचारी की संपत्ति और गतिविधियों की भी जांच की जा रही है। बुधवार को पुलिस ने मानकमऊ स्थित उसके आवास पर छापा मारकर दस्तावेज और अन्य जानकारी जुटाई।
जांच में सामने आया है कि करीब 11 हजार रुपये मासिक वेतन पाने वाला यह कर्मचारी करेंसी चेस्ट में चालक और लोडर के रूप में तैनात था। आरोप है कि वह खुद चालक की ड्यूटी करने के बजाय करीब 500 रुपये प्रतिदिन पर दूसरा ड्राइवर रखे हुए था। यह भी आरोप है कि वह अधिकांश समय करेंसी चेस्ट के भीतर रहता था और निलंबित प्रबंधक अमित के निजी सहायक की तरह काम करता था। जांच एजेंसियां कर्मचारी की संपत्ति और वाहनों को लेकर भी जानकारी जुटा रही हैं। उसके पास पांच मकान, स्कॉर्पियो और वरना कार के अलावा दो बाइक होने की जानकारी सामने आई है। हालांकि इन संपत्तियों और वाहनों का वास्तविक स्वामित्व तथा उनकी खरीद के लिए धन का स्रोत अभी जांच का विषय है।
जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि कम आय वाले कर्मचारी के पास कथित तौर पर इतनी संपत्ति और वाहन कैसे आए। इसके साथ ही कर्मचारी और निलंबित प्रबंधक अमित के बीच संबंधों तथा करेंसी चेस्ट में उसकी वास्तविक भूमिका की भी पड़ताल की जा रही है।
उधर, करेंसी चेस्ट के चालक आदर्श को बुधवार रात पुलिस पूछताछ के बाद घर भेज दिया गया। वह पांच सितंबर से संदिग्ध परिस्थितियों में लापता था। पुलिस ने उससे करेंसी चेस्ट और वहां मिले 17.29 करोड़ रुपये के जाली नोटों के संबंध में जानकारी ली। प्राथमिक पूछताछ में उसकी भूमिका सामने नहीं आने पर फिलहाल उसे छोड़ दिया गया। आदर्श के घर लौटने पर परिजनों ने राहत की सांस ली। जाली नोट प्रकरण में जांच एजेंसियां करेंसी चेस्ट से जुड़े कर्मचारियों की भूमिका, लेनदेन और अन्य पहलुओं की जांच में जुटी हैं।








