श्रवण शर्मा
गगोह (सहारनपुर)। विमुक्त जनजाति अधिकार मंच गंगोह ने प्रदेश सरकार द्वारा गठित किए गए घुमन्तु विकास बोर्ड को महत्वपूर्ण एवं स्वागत योग्य पहल बताते हुए इसके नाम में संशोधन करने की मांग की है। मंच की ओर से मुख्यमंत्री को भेजे गए पत्र में बोर्ड का नाम ‘उत्तरप्रदेश राज्य विमुक्त एवं घुमन्तु जनजाति विकास एवं कल्याण बोर्ड’ किए जाने की मांग की गई है।
मंच का कहना है कि वर्तमान में ‘घुमन्तु विकास बोर्ड’ नाम होने से यह धारणा बनती है कि बोर्ड केवल घुमन्तु समुदायों के लिए गठित किया गया है, जबकि इसके उद्देश्य और कार्यक्षेत्र में विमुक्त जनजातियां भी समान रूप से शामिल हैं। ऐसे में बोर्ड के नाम में विमुक्त शब्द का होना आवश्यक है।
मंच ने पत्र में कहा कि ब्रिटिश शासनकाल में सामूहिक दमन और काले कानूनों का सामना करने वाले विमुक्त जाति समूहों के लिए ‘विमुक्त’ केवल प्रशासनिक शब्द नहीं, बल्कि स्वतंत्र भारत में पुनर्स्थापित सम्मान का प्रतीक है। बोर्ड के नाम में विमुक्त शब्द नहीं होने से संबंधित जाति समूहों में भ्रम, असंतोष और उपेक्षा की भावना उत्पन्न हो रही है।
मंच के अनुसार केंद्र सरकार तथा अन्य राज्यों में इन समुदायों के विकास और कल्याण के लिए गठित बोर्डों के नाम में विमुक्त, घुमन्तू एवं अर्ध घुमन्तू शब्दों का प्रयोग किया गया है। इसी आधार पर उत्तर प्रदेश सरकार से भी वर्तमान बोर्ड के नाम में संशोधन कर ‘विमुक्त’ शब्द जोड़े जाने की मांग की गई है।








