शहरी चौपाल ब्यूरो
सहारनपुर। प्रस्तावित औद्योगिक कॉरिडोर के लिए जमीन अधिग्रहण की चर्चाओं के बीच क्षेत्र के किसानों ने साफ कर दिया है कि वे किसी भी कीमत पर अपनी कृषि भूमि नहीं देंगे। रविवार को सिरसली खुर्द में आयोजित 17 गांवों के किसानों की पंचायत में जमीन बचाने के लिए सामूहिक रूप से आवाज उठाने और प्रशासन के समक्ष अपनी बात रखने का निर्णय लिया गया।
दिल्ली-यमुनोत्री और दिल्ली-देहरादून कॉरिडोर के बीच औद्योगिक कॉरिडोर विकसित किए जाने का प्रस्ताव बताया जा रहा है। इसके लिए रामपुर मनिहारान तहसील क्षेत्र के कभी 17 तो कभी छह गांवों की भूमि लिए जाने की चर्चा है। इसी मुद्दे को लेकर सिरसली खुर्द में क्षेत्र के करीब 300 ग्रामीणों की पंचायत हुई। इसमें दल्हेड़ी, सिरसली कलां, सिरसली खुर्द, मियानगी, पहांसु, हलगोआ और चकवाली समेत 17 गांवों के प्रतिनिधियों और ग्रामीणों ने हिस्सा लिया।
पंचायत की अध्यक्षता चौधरी ऋषिपाल सिंह पहांसू ने की, जबकि संचालन विनोद राणा दल्हेड़ी ने किया। किसानों ने कहा कि कृषि भूमि उनके परिवारों की आजीविका का मुख्य आधार है। भूमि अधिग्रहण होने की स्थिति में बड़ी संख्या में परिवारों के सामने रोजगार और जीवन-यापन का संकट पैदा हो जाएगा। किसानों का कहना था कि क्षेत्र की जमीन बेहद उपजाऊ है और यहां धान, गन्ने के साथ-साथ विभिन्न प्रकार की सब्जियों का भी बड़े स्तर पर उत्पादन होता है।
बैठक में तय किया गया कि प्रत्येक प्रभावित गांव से पांच सदस्यों की समिति गठित की जाएगी। समितियां अपने-अपने गांव में ग्राम सभा की बैठक कराकर कृषि भूमि नहीं देने संबंधी प्रस्ताव पारित कराने का प्रयास करेंगी। इन प्रस्तावों को औद्योगिक विकास राज्य मंत्री जसवंत सिंह सैनी के समक्ष रखा जाएगा और किसानों की भूमि बचाने की मांग की जाएगी।
किसानों ने कहा कि पहले जनप्रतिनिधियों और सरकार के समक्ष अपनी बात रखकर समाधान का प्रयास किया जाएगा। यदि इससे समस्या का समाधान नहीं हुआ तो प्रशासन के सामने भी अपनी मांग मजबूती से रखी जाएगी और इसके बाद आगे की रणनीति पर सामूहिक रूप से निर्णय लिया जाएगा।
पंचायत में सालीम प्रधान, रामधन, नकुल प्रधान, फरमान आरिफ, विनोद सहित बड़ी संख्या में किसान मौजूद रहे।








