शहरी चौपाल ब्यूरो
गंगोह। सावन और भादो के महीनों में क्षेत्र में जगह-जगह लगने वाले भंडारों में श्रद्धालुओं को निश्शुल्क भोजन और प्रसाद कराया जाता है। इन भंडारों में कढ़ी-चावल भी प्रमुख रूप से बनाए जाते हैं, जिसके लिए मट्ठे और लस्सी की आवश्यकता होती है। इसी जरूरत को पूरा करने के लिए ग्राम ढलावली निवासी सुरेश कुमार पिछले करीब 20 वर्षों से निस्वार्थ भाव से सेवा कर रहे हैं। क्षेत्र के लोग उन्हें प्यार से ‘लस्सी वाले बाबा’ के नाम से पुकारते हैं।
ब्लॉक गंगोह के ग्राम ढलावली निवासी सुरेश कुमार गोगा वीर के अनन्य भक्त हैं। सावन और भादो के दो महीने वह गोगा वीर की सेवा के लिए समर्पित करते हैं। इन दो महीनों में वह न तो चप्पल पहनते हैं और न ही चारपाई पर सोते हैं। क्षेत्र में कहीं भी भंडारा लगने की जानकारी मिलती है तो वह बाइक से गांव से मट्ठा-लस्सी लेकर भंडारे में पहुंच जाते हैं और श्रद्धालुओं को निश्शुल्क लस्सी उपलब्ध कराते हैं।
सुरेश कुमार बताते हैं कि वह करीब 12 गांवों से घर-घर जाकर मट्ठा और लस्सी एकत्र करते हैं। यदि किसी श्रद्धालु को भंडारे के लिए लस्सी की आवश्यकता होती है तो वह पहले से उन्हें जानकारी देता है। इसके बाद वह क्षेत्र के किसी भी कोने में लस्सी पहुंचाने की व्यवस्था कर देते हैं। भंडारा लगाने वाले श्रद्धालु उन्हें अपनी इच्छा से पेट्रोल के पैसे दे देते हैं, लेकिन वह इसके लिए किसी से पैसे नहीं मांगते।
सुरेश कुमार का कहना है कि सेवा के लिए धन से अधिक भावना जरूरी है। वह गरीब परिवार से ताल्लुक रखते हैं और अपनी सामर्थ्य के अनुसार दो महीने गोगा वीर के नाम समर्पित करते हैं। उनका कहना है कि भंडारे में कढ़ी-चावल बनाने के लिए लस्सी की जरूरत होती है, इसलिए वह इसे अपनी सेवा का माध्यम मानते हैं।
सुरेश कुमार की पत्नी का करीब 12 वर्ष पूर्व निधन हो चुका है। उनके बच्चे मजदूरी करते हैं। इसके बावजूद आर्थिक परिस्थितियों की परवाह किए बिना वह हर वर्ष सावन और भादो में सेवा के लिए निकल पड़ते हैं। बाइक पर लस्सी लेकर भंडारों तक पहुंचना उनकी दिनचर्या का हिस्सा बन चुका है।
क्षेत्र में उनकी निस्वार्थ सेवा की चर्चा रहती है। भंडारे में आने वाले श्रद्धालु भी सुरेश कुमार की सेवा भावना की सराहना करते हैं। उनके लिए यह सेवा किसी स्वार्थ या दिखावे का माध्यम नहीं, बल्कि गोगा वीर के प्रति आस्था और समर्पण का भाव है।








