शहरी चौपाल ब्यूरो
सहारनपुर, । उत्तर प्रदेश उद्योग व्यापार मंडल की जिला इकाई की ओर से हिंदी दिवस कार्यक्रमों की श्रृंखला के तहत किशनपुरा मेडिकल मार्केट में विशेष कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में जनपद के लोकप्रिय कवि, समाजसेवी एवं वरिष्ठ व्यापारी प्रतिनिधि सतीश ठकराल को अंगवस्त्र, पुष्प एवं पुस्तक भेंट कर सम्मानित किया गया।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए व्यापार मंडल के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष एवं जिलाध्यक्ष शीतल टंडन ने कहा कि हिंदी देश की जनभाषा है, जो देश के प्रत्येक भाग में बोली और समझी जाती है। उन्होंने कहा कि आज हमारे सामने चुनौती हिंदी को उसके उचित एवं गौरवशाली स्थान पर बनाए रखने की है। भारत की विभिन्न भाषाओं एवं संस्कृतियों के बीच सामंजस्य स्थापित करने में हिंदी सेतु का कार्य करती है। उन्होंने बताया कि 14 सितंबर 1949 को संविधान सभा ने हिंदी को राजभाषा के रूप में अपनाने का निर्णय लिया था। तभी से हिंदी के प्रचार-प्रसार के लिए प्रत्येक वर्ष हिंदी दिवस मनाया जाता है।
शीतल टंडन ने कहा कि चीनी के बाद हिंदी विश्व में सबसे अधिक बोली जाने वाली भाषाओं में शामिल है। उन्होंने कहा कि पूरी दुनिया में 60 करोड़ से अधिक लोग हिंदी बोलते, लिखते और पढ़ते हैं, जबकि देश में करीब 55 प्रतिशत लोग हिंदी बोलते हैं और 85 से 90 प्रतिशत लोग हिंदी समझते हैं। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को हिंदी को सम्मान देने के लिए बधाई देते हुए कहा कि यह कार्य सराहनीय एवं अभिनंदनीय है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री ने संयुक्त राष्ट्र संघ तथा दिल्ली में आयोजित जी-20 शिखर सम्मेलन में हिंदी में भाषण दिया। विदेशों से आने वाले मेहमानों के साथ भी वे अक्सर हिंदी में संवाद करते हैं।
उन्होंने कहा कि हिंदी को वैश्विक मंच पर सम्मान दिलाने का कार्य पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने भी किया था। वाजपेयी ने 4 अक्टूबर 1977 को भारत के विदेश मंत्री के रूप में संयुक्त राष्ट्र संघ में हिंदी में भाषण दिया था। उन्होंने कहा कि भाषाविदों का मानना है कि आने वाले समय में अंतरराष्ट्रीय भाषा के रूप में हिंदी को विशेष सम्मान मिलेगा। उन्होंने लोगों से दैनिक जीवन के व्यवहार में हिंदी को अपनाने का आह्वान किया।
शीतल टंडन ने कहा कि हिंदी केवल भाषा नहीं, बल्कि देश को जोड़ने वाली कड़ी है। भारत जैसे विशाल लोकतंत्र में वेशभूषा, वर्ग, जाति, भाषा और संस्कृति की विविधता के बावजूद देश की एकजुटता बनाए रखने में हिंदी की महत्वपूर्ण भूमिका है। उन्होंने कहा कि हिंदी को गौरवशाली बनाने का आंदोलन महात्मा गांधी और स्वामी दयानंद जैसे महापुरुषों ने आगे बढ़ाया। उन्होंने कहा, “दुनिया के लिए अनजान नहीं है हिंदी, नए दौर और बढ़ते दायरे की है हिंदी और जो दिलों को जोड़े वही भाषा है हिंदी। हिंदी हृदय की भाषा है।”
उन्होंने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि उन्हें गर्व है कि वर्ष 1967 में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के बैनर तले चले हिंदी आंदोलन में उन्होंने अपने साथियों के साथ गिरफ्तारी दी थी और तीन दिन तक सहारनपुर जेल में भी रहे।
जिला महामंत्री रमेश अरोड़ा एवं मुख्य संरक्षक मेजर एस.के. सूरी ने कहा कि भारत एक बहुभाषीय राष्ट्र है, जहां अनेक भाषाएं प्रचलित हैं, लेकिन देश के जनमानस को राष्ट्रीय दृष्टि से जागृत करने में हिंदी की महत्वपूर्ण भूमिका है। उन्होंने कहा कि हिंदी सिनेमा ने भी गीतों एवं संगीत के माध्यम से हिंदी के प्रचार-प्रसार में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। हिंदी को विश्व स्तर पर आगे बढ़ाने के उद्देश्य से विदेश मंत्रालय की ओर से विश्व हिंदी सम्मेलन का आयोजन भी किया जाता है। उन्होंने कहा कि विश्व की विभिन्न भाषाओं के साहित्य में हिंदी साहित्य का विशेष स्थान है।
कार्यक्रम में जिलाध्यक्ष शीतल टंडन, जिला महामंत्री रमेश अरोड़ा, जिला कोषाध्यक्ष कर्नल संजय मिड्ढा, नितिन ठकराल, विनोद बजाज, अशोक कुमार आदि मौजूद रहे।








