शहरी चौपाल ब्यूरो
सहारनपुर। सहारनपुर के कवि एवं कला-संस्कृति समीक्षक राजेंद्र शर्मा द्वारा हिंदुस्तानी शास्त्रीय संगीत की प्रख्यात गायिका और संगीत शिक्षिका पद्म विभूषण शन्नो खुराना के जीवन, संगीत साधना और बहुआयामी व्यक्तित्व पर आधारित मोनोग्राफ ‘शब्दों में शताब्दी स्वर’ का दिल्ली में लोकार्पण किया गया। एक समारोह में स्वयं शन्नो खुराना ने मोनोग्राफ का लोकार्पण किया। इसमें राजेंद्र शर्मा के पिछले दस वर्षों के दौरान शन्नो खुराना के साथ हुए संवाद और देश की प्रमुख हिंदी-अंग्रेजी पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित उनके लेखों को आधार बनाया गया है।
मोनोग्राफ में शन्नो खुराना की लंबी संगीत यात्रा को अतीत की स्मृतियों से वर्तमान तक जोड़ने का प्रयास किया गया है। इसमें उनके जीवन और संगीत साधना से जुड़े विभिन्न पहलुओं को प्रस्तुत करने के साथ राजेंद्र शर्मा की सात कविताएं भी शामिल की गई हैं। पुस्तक का संपादन कला एवं संगीत के अध्येता राजेश गनोतवाले ने किया है।
समारोह का आयोजन शन्नो खुराना के जन्मशताब्दी वर्ष से पहले रजा फाउंडेशन और इंडिया इंटरनेशनल सेंटर के संयुक्त तत्वावधान में किया गया। शन्नो खुराना का जन्म 23 दिसंबर 1927 को हुआ था। 23 दिसंबर 2026 से उनका जन्मशताब्दी वर्ष आरंभ होगा। इसी महत्वपूर्ण अवसर की पूर्वपीठिका के रूप में मोनोग्राफ तैयार किया गया है, जिसे ‘शब्दों में शताब्दी स्वर’ नाम दिया गया है।
मोनोग्राफ में शन्नो खुराना के व्यक्तित्व के विभिन्न पक्षों को सामने लाने के साथ उनके दुर्लभ पुराने चित्र, पुरस्कारों से संबंधित दस्तावेज और विभिन्न अवसरों के छायाचित्र भी शामिल किए गए हैं। इसमें शन्नो खुराना द्वारा राजेंद्र शर्मा के संबंध में की गई टिप्पणी के साथ संगीत अध्येता प्रो. नमन आहूजा, संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार से सम्मानित फोटोग्राफर अविनाश पसरीचा और प्रख्यात संगीत समीक्षक मंजरी सिन्हा की टिप्पणियां भी शामिल हैं। इन टिप्पणियों में शन्नो खुराना की संगीत यात्रा और राजेंद्र शर्मा के दस वर्षों के कार्य पर विचार प्रस्तुत किए गए हैं।








