फैय्याज अली आब्दी
नानौता। अय्यामे अज़ा ए ज़हरा के सिलसिले में नगर के इमाम बारगाह दरबारे हुसैन (कोट) में मजालिस का आयोजन शुरू हो गया है। पहली मजलिस को ईरान के कुम शहर से आए मौलाना ज़ेगमुर रिज़वी ने खिताब किया। उन्होंने हज़रत मोहम्मद मुस्तफा (स.) की बेटी जनाबे फातिमा ज़हरा सलामुल्लाहे अलैहा की इस्लाम के लिए दी गई सेवाओं और उनके जीवन पर विस्तार से प्रकाश डाला।
मौलाना ने कहा कि जनाबे फातिमा ज़हरा (स.अ.) ने पैगंबर मोहम्मद साहब के जीवनकाल में भी और उनके दुनिया से पर्दा फरमाने के बाद भी इस्लाम की खिदमत की। उनकी जाहिरी जिंदगी भले ही 18-19 वर्ष की रही हो, लेकिन इस संक्षिप्त जीवन में उन्होंने मजहबे इस्लाम के लिए महत्वपूर्ण योगदान दिया। मजलिस के अंतिम चरण में मौलाना ने बीबी फातिमा ज़हरा (स.अ.) की शहादत से जुड़े वाकयात बयान किए, जिन्हें सुनकर अकीदतमंद भावुक हो गए और गिरया करने लगे।
इस दौरान मौलाना तनवीर आलम, मौलाना सफदर अली, मास्टर मोहम्मद मियां, हाजी वसी उल हसन, अज़ीज़ुल हसन, गुलाम क़बर, मोहम्मद ज़मा, सैय्यद अली मियां क़र्बलाई, मिर्ज़ा बासीर बेग, सफदर हुसैन, शमशाद हुसैन जाफरी, इम्तियाज़ हुसैन और पत्रकार फैय्याज़ अली आब्दी मौजूद रहे। मरसियाख्वानी मोहम्मद क़ासिम और नौहाख्वानी राहत अली ने की, जबकि निजामत के फरायज अज़ादार हुसैन ने निभाए।
मौलाना तनवीर आलम ने बताया कि इस्लामी तारीख के अनुसार हज़रत मोहम्मद मुस्तफा (स.) की वफात के 75 दिन बाद तथा कुछ इतिहासकारों के अनुसार 90 दिन बाद जनाबे फातिमा ज़हरा (स.अ.) की शहादत हुई थी। इसी के चलते 75 दिन वाली तारीख के अनुसार नानौता में मजालिस आयोजित की जा रही हैं। वहीं 90 दिन वाली तारीख के अनुसार शहर के इमाम बारगाह असद अली छत्ता में भी मजालिस का आयोजन किया जाएगा।








