शहरी चौपाल ब्यूरो
सहारनपुर। नगर निगम कार्यकारिणी समिति की बैठक में वित्तीय वर्ष 2026-27 का पुनरीक्षित बजट 99,695.81 लाख रुपये यानी करीब 996.95 करोड़ रुपये व्यय के साथ पारित कर दिया गया। बैठक में पार्षद एवं कार्यकारिणी सदस्य मंसूर बदर ने निगम की गिरती आय और बढ़ते खर्चों को लेकर कई सवाल उठाए। उन्होंने स्ट्रीट लाइट, सफाई व्यवस्था, आवारा कुत्तों के बढ़ते आतंक, अतिक्रमण दस्ते में कर्मचारियों की नियुक्ति और तालाबों के निर्माण पर प्रस्तावित खर्च को लेकर अधिकारियों से जवाब मांगा।
बैठक में मंसूर बदर ने पिछले मेले के खर्चों का ब्योरा मांगा। उन्होंने कहा कि नगर निगम के 58 वार्डों में आउटसोर्स कंपनी के माध्यम से सफाई व्यवस्था संचालित होने के बावजूद गैराज और स्वास्थ्य विभाग के बजट में करोड़ों रुपये का प्रावधान किस आधार पर किया गया है। उन्होंने आउटसोर्स व्यवस्था के तहत होने वाले कार्यों और निगम के बजट में उनके लिए रखे गए खर्च का विवरण मांगा।
गृहकर की आय में गिरावट पर सवाल उठाते हुए उन्होंने जीआईएस सर्वे से पहले निर्धारित आय लक्ष्य और चार साल बाद हुई वृद्धि का हिसाब मांगा। जलकर के 12 प्रतिशत शुल्क की वसूली नहीं होने पर भी सवाल उठाए। उनका कहना था कि जब नगर और 32 गांवों में पानी की लाइन उपलब्ध है तो जलकर की वसूली क्यों नहीं की जा रही। उन्होंने लाइसेंस शुल्क, बीयर, नर्सिंग, पार्किंग, दुकानों के किराये, रेस्टोरेंट, ढाबों और बारातघरों से होने वाली आय में गिरावट पर भी चर्चा की।
स्ट्रीट लाइट व्यवस्था पर उन्होंने कहा कि कई वार्डों में 200 से अधिक लाइटें बंद हैं। उनके वार्ड 43 में ही 176 लाइटें खराब होने का दावा करते हुए प्रत्येक वार्ड में लगाई गई और बंद पड़ी लाइटों की सूची मांगी। साथ ही दीपावली से पहले नगर और 32 गांवों में प्रकाश व्यवस्था दुरुस्त कराने की मांग की।
अतिक्रमण दस्ते पर सवाल उठाते हुए मंसूर बदर ने पूछा कि शासन से 11 पद स्वीकृत होने के बावजूद 30 कर्मचारी किस नियम के तहत रखे गए हैं और उनका वेतन किस आधार पर निकाला जा रहा है। उन्होंने दस्ते पर प्रतिमाह होने वाले खर्च का ब्योरा भी मांगा।
पशु कल्याण विभाग के लिए कुत्तों के नियंत्रण पर प्रस्तावित 200 लाख रुपये के बजट पर सवाल उठाते हुए उन्होंने वार्ड 43, 31, 49, 28, 32, 5, 62, 63, 69, 70 और 11 में कुत्तों के आतंक की शिकायतों का उल्लेख किया तथा तत्काल कार्रवाई की मांग की। डीजल खर्च को अलग-अलग विभागों में बांटने के आधार पर भी बहस हुई।
जलकल विभाग द्वारा नौ तालाबों पर प्रस्तावित 12 करोड़ रुपये के खर्च पर मंसूर बदर ने पहले आईआईटी रुड़की से डीपीआर तैयार कराने की मांग की। इस पर संबंधित प्रस्ताव स्थगित कर दिया गया। उन्होंने अपने वार्ड में गणपत सराय, सराय शाहजी, सराय हिसामुद्दीन और पुरानी मंडी की सड़कों के निर्माण की मांग भी उठाई।
बैठक में पार्षद मंसूर बदर और मयंक गर्ग के पत्रों पर दिसंबर माह तक ऑनलाइन गृहकर जमा करने पर 15 प्रतिशत छूट देने का प्रस्ताव भी पारित किया गया। निगम के कंप्यूटर ऑपरेटरों के वेतन में वृद्धि को लेकर भी चर्चा हुई। इसके अतिरिक्त पार्षद सुधीर पंवार, ज्योति अग्रवाल, वीरसेन और महमूद हसन ने डिग्री के आधार पर नामांतरण के मुद्दे पर अपनी बात रखी।
बैठक में महापौर डॉ. अजय कुमार सिंह, नगर आयुक्त शिपू गिरि सहित कार्यकारिणी के सदस्य और नगर निगम के अधिकारी मौजूद रहे।








