शहरी चौपाल ब्यूरो
देवबंद। संवाददाता। टूटी सड़कें, बरसात में जलभराव और जगह-जगह फैली गंदगी से परेशान देवबंद तहसील के घ्याना गांव के ग्रामीणों का गुस्सा अब खुलकर सामने आ गया है। बुनियादी सुविधाओं की मांग पूरी नहीं होने से नाराज ग्रामीणों ने चुनाव बहिष्कार का ऐलान करते हुए जनप्रतिनिधियों के गांव में प्रवेश पर रोक लगाने की घोषणा की है।

रविवार को निष्पक्ष खबर की टीम गांव पहुंची तो कई स्थानों पर सड़कें बदहाल मिलीं और गंदगी के ढेर दिखाई दिए। ग्रामीणों के मुताबिक, बरसात के दिनों में रास्तों पर पानी भर जाता है, जिससे आवागमन में भारी परेशानी होती है। उनका कहना है कि गांव की खराब सड़कों के कारण युवाओं के रिश्ते तय करने में भी दिक्कतें आ रही हैं।
सुमित त्यागी, रजत त्यागी, अंकित त्यागी, रामकिशोरी और रामेश्वर सहित अलग-अलग समाज के ग्रामीणों ने बताया कि गांव की समस्याओं से अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों को कई बार अवगत कराया गया, लेकिन स्थिति में सुधार नहीं हुआ। ग्रामीणों ने ग्राम पंचायत को मिलने वाली विकास निधि के खर्च पर भी सवाल उठाते हुए इसकी जांच कराने की मांग की। उनका आरोप है कि विकास योजनाओं के नाम पर धनराशि आने के बावजूद गांव में जरूरी कार्य दिखाई नहीं देते।

करीब 80 वर्षीय रामकटोरी ने कहा कि उन्होंने अपने जीवन में कई नेताओं को गांव आते-जाते देखा है, लेकिन गांव की हालत में कोई खास बदलाव नहीं आया। ग्रामीणों का कहना है कि घ्याना ही नहीं, आसपास के गांवों में भी सड़क और सफाई की समस्याएं बनी हुई हैं।
नाराज ग्रामीणों ने स्पष्ट कहा कि जब तक सड़क, जलनिकासी और सफाई की समस्याओं का समाधान नहीं होगा, वे चुनाव में सहयोग नहीं करेंगे। कुछ ग्रामीणों ने सत्ता परिवर्तन की बात भी कही। उनका आरोप है कि चुनाव के समय विकास के वादे किए जाते हैं, लेकिन बाद में गांव की समस्याओं की अनदेखी होती है।
ग्रामीणों ने प्रशासन से गांव का निरीक्षण कर समस्याओं का समयबद्ध समाधान कराने तथा विकास कार्यों पर खर्च हुई धनराशि की जांच कराने की मांग की है।








