शहरी चौपाल ब्यूरो
सहारनपुर। नगर निगम क्षेत्र में संपत्ति कर प्रणाली को लेकर एक बड़ा मामला सामने आया है। स्वकर प्रपत्र भरकर टैक्स जमा करने वाली करीब 7,000 व्यावसायिक संपत्तियों की जांच के आदेश नगर आयुक्त द्वारा जारी किए गए हैं। आशंका जताई जा रही है कि इन मामलों में गलत जानकारी देकर कम टैक्स जमा किया गया है।
नगर निगम प्रशासन के अनुसार, कई व्यापारियों ने अपने प्रतिष्ठानों का क्षेत्रफल वास्तविक से कम दर्शाते हुए स्वकर प्रणाली के तहत कम टैक्स जमा किया है। अब इन सभी मामलों की गहन जांच की जाएगी, ताकि किसी भी प्रकार की अनियमितता या मिलीभगत का पता लगाया जा सके।

पहले जीआईएस सर्वे से भेजे गए थे बिल
करीब डेढ़ वर्ष पहले नगर निगम ने 37,500 व्यावसायिक भवनों का जीआईएस (Geographical Information System) आधारित सर्वे कराकर टैक्स बिल जारी किए थे। इस सर्वे के आधार पर कई भवन स्वामियों को अपेक्षाकृत अधिक टैक्स लगने की शिकायत हुई थी।
इसके बाद व्यापारियों और उद्यमियों ने इस पर आपत्ति जताई और नगर निगम कार्यालय के बाहर विरोध-प्रदर्शन भी किए थे।
स्वकर प्रणाली लागू की गई
विवादों को देखते हुए नगर निगम ने बाद में स्वकर निर्धारण प्रणाली (Self Assessment System) लागू कर दी थी। इसके तहत असंतुष्ट व्यापारियों को स्वयं अपने प्रतिष्ठान का क्षेत्रफल बताकर टैक्स जमा करने की सुविधा दी गई थी।
लेकिन अब संदेह यह है कि कई मामलों में वास्तविक क्षेत्रफल से कम जानकारी देकर टैक्स चोरी की गई है।
जांच के घेरे में 7,000 संपत्तियां
नगर निगम के अधिकारियों के अनुसार, शुरुआती जांच में ऐसे लगभग 7,000 मामले चिन्हित किए गए हैं, जिनमें स्वकर प्रपत्र में दी गई जानकारी संदिग्ध पाई गई है। इन सभी संपत्तियों का अब भौतिक सत्यापन किया जाएगा।
जांच टीम यह भी देखेगी कि क्या किसी स्तर पर कर्मचारियों और संपत्ति धारकों के बीच मिलीभगत हुई है या नहीं।

नगर आयुक्त ने दिए सख्त निर्देश
नगर आयुक्त ने संबंधित विभागों को निर्देश दिए हैं कि सभी संदिग्ध मामलों की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच की जाए। साथ ही यह भी सुनिश्चित किया जाए कि यदि किसी प्रकार की कर चोरी या गलत जानकारी सामने आती है तो संबंधित लोगों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाए।
राजस्व पर असर और पारदर्शिता की चुनौती
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि बड़े पैमाने पर कर चोरी की पुष्टि होती है तो नगर निगम के राजस्व पर इसका सीधा असर पड़ेगा। साथ ही यह मामला शहरी स्थानीय निकायों में पारदर्शिता और जवाबदेही पर भी सवाल खड़े करता है।
सहारनपुर नगर निगम का यह जांच अभियान आने वाले दिनों में महत्वपूर्ण साबित हो सकता है। यदि जांच में गड़बड़ी साबित होती है तो यह न केवल राजस्व सुधार की दिशा में कदम होगा, बल्कि नगर निगम की कर प्रणाली को भी अधिक पारदर्शी बनाने में मदद करेगा।









