शहरी चौपाल ब्यूरो
सहारनपुर। जनपद के सरकारी अस्पतालों में कथित अनियमितताओं और अवैध वसूली के आरोपों को लेकर राजनीतिक और जनप्रतिनिधियों की सक्रियता बढ़ती नजर आ रही है। इसी क्रम में समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता एवं पार्षद अभिषेक टिंकू अरोड़ा के नेतृत्व में सर्वदलीय पार्षदों के एक प्रतिनिधिमंडल ने मुख्य चिकित्सा अधिकारी को ज्ञापन सौंपकर एसबीडी हॉस्पिटल में हो रही कथित अनियमितताओं की शिकायत की।
प्रतिनिधिमंडल ने अपने ज्ञापन में आरोप लगाया कि एसबीडी हॉस्पिटल में मरीजों से विभिन्न प्रकार के ऑपरेशन के नाम पर अवैध वसूली की जा रही है। पार्षदों का कहना था कि विशेष रूप से महिला वार्ड में जिन महिलाओं के प्रसव ऑपरेशन (सी-सेक्शन) के माध्यम से किए जाते हैं, उनसे अनावश्यक रूप से धनराशि ली जा रही है, जो कि पूरी तरह से नियमों के विरुद्ध है।
इसके अलावा अपेंडिक्स, हर्निया और पथरी जैसे सामान्य ऑपरेशनों के दौरान भी मरीजों से फीस के नाम पर अतिरिक्त धन वसूले जाने का आरोप लगाया गया। प्रतिनिधिमंडल ने यह भी कहा कि मोतियाबिंद के ऑपरेशन के दौरान भी मरीजों को परेशान किया जाता है और उनसे अनावश्यक खर्च वसूला जाता है, जिससे गरीब और जरूरतमंद मरीजों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
ज्ञापन में इन गतिविधियों को गंभीर अपराध बताते हुए पार्षदों ने कहा कि सरकारी अस्पतालों में इस प्रकार की अनियमितताएं किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं की जाएंगी। उन्होंने मुख्य चिकित्सा अधिकारी से मांग की कि अस्पताल के सभी वार्डों की विस्तृत जांच कराई जाए और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
इस दौरान प्रतिनिधिमंडल ने अस्पताल में हो रही कथित अव्यवस्थाओं और मरीजों को हो रही परेशानियों की भी जानकारी दी। पार्षदों ने कहा कि सरकारी अस्पतालों का उद्देश्य गरीब और जरूरतमंद लोगों को सस्ती और बेहतर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराना है, लेकिन यदि वहां इस प्रकार की अनियमितताएं होती हैं, तो यह व्यवस्था की गंभीर विफलता को दर्शाता है।
मुख्य चिकित्सा अधिकारी ने प्रतिनिधिमंडल को आश्वासन दिया कि मामले को गंभीरता से लेते हुए इसकी जांच के लिए एक कमेटी गठित की जाएगी। उन्होंने कहा कि जांच में जो भी कर्मचारी या व्यक्ति दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी और किसी को भी बख्शा नहीं जाएगा।
इस मौके पर पार्षद फराज अंसारी, नदीम अंसारी, राजीव अन्नू तथा नितिन जाटव सहित अन्य जनप्रतिनिधि उपस्थित रहे। सभी ने एक स्वर में कहा कि यदि समय रहते इस समस्या का समाधान नहीं किया गया, तो भविष्य में बड़े स्तर पर आंदोलन किया जाएगा।
यह मामला सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठने लगे हैं। अब देखने वाली बात यह होगी कि प्रशासन द्वारा गठित जांच समिति कितनी जल्दी अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करती है और दोषियों के खिलाफ क्या कार्रवाई की जाती है।
जनप्रतिनिधियों की इस पहल को आम जनता के हित में उठाया गया महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है, जिससे उम्मीद की जा रही है कि अस्पतालों में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित की जा सकेगी।








