शहरी चौपाल ब्यूरो
चिलकाना/सहारनपुर। उत्तर प्रदेश के सहारनपुर जनपद का एक नाम इन दिनों दंगलों की दुनिया में लगातार चर्चा में है। करीब पौने चार फीट कद के पहलवान ‘छोटा सुल्तान’ अपने अदम्य साहस, मेहनत और जुनून के दम पर न केवल क्षेत्र बल्कि देश के विभिन्न हिस्सों में अपनी अलग पहचान बना चुके हैं। शारीरिक रूप से सीमित कद होने के बावजूद उनका आत्मविश्वास और संघर्ष उन्हें दूसरों से अलग बनाता है।
फिरोजाबाद के मेलों में आयोजित दंगलों से लेकर देश के कई राज्यों तक, छोटा सुल्तान ने अपनी पहलवानी का दमखम दिखाया है। देहात कोतवाली क्षेत्र से ताल्लुक रखने वाले इस पहलवान की कहानी साधारण नहीं, बल्कि प्रेरणा से भरपूर है। बचपन से ही अखाड़े की मिट्टी में पले-बढ़े छोटा सुल्तान ने महज आठ वर्ष की उम्र में पहलवानी की शुरुआत कर दी थी। उनके पिता स्वयं एक पहलवान थे और उन्हीं के साथ अखाड़े जाने के दौरान उनके भीतर इस पारंपरिक खेल के प्रति लगाव पैदा हुआ ।

धीरे-धीरे यह लगाव जुनून में बदल गया और छोटा सुल्तान ने इसे अपने जीवन का उद्देश्य बना लिया। उन्होंने मध्य प्रदेश, गुजरात, हरियाणा जैसे राज्यों के अलावा नेपाल तक में दंगल लड़कर अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया है। हर जगह उनके साहस और तकनीक ने दर्शकों को प्रभावित किया और उन्होंने कई अनुभवी पहलवानों को कड़ी चुनौती दी।
छोटा सुल्तान के लिए पहलवानी केवल खेल नहीं, बल्कि आजीविका का साधन भी है। वे इसी के जरिए अपने परिवार का पालन-पोषण करते हैं। उनके परिवार में दो बेटियां हैं, जिनकी जिम्मेदारी वे पूरी निष्ठा और मेहनत से निभा रहे हैं। सीमित संसाधनों के बावजूद उन्होंने कभी अपने हौसले को कमजोर नहीं पड़ने दिया।
उनके जीवन में दुख और कठिनाइयों की भी कमी नहीं रही। बीमारी के चलते उनके तीन बेटों की असमय मृत्यु हो गई, जिसने उन्हें गहरे तक प्रभावित किया। इतना बड़ा व्यक्तिगत नुकसान किसी भी व्यक्ति को तोड़ सकता है, लेकिन छोटा सुल्तान ने इन परिस्थितियों के आगे घुटने टेकने के बजाय अपने संघर्ष को जारी रखा। उन्होंने अपने दर्द को ताकत में बदलते हुए जीवन की राह पर आगे बढ़ना चुना।
आज छोटा सुल्तान की कहानी केवल एक पहलवान की सफलता तक सीमित नहीं है, बल्कि यह उन सभी लोगों के लिए प्रेरणा है जो विपरीत परिस्थितियों में भी अपने सपनों को जीवित रखते हैं। उनका जीवन यह सिखाता है कि कद से नहीं, बल्कि हौसले और मेहनत से पहचान बनती है।
सहारनपुर का यह ‘छोटा सुल्तान’ आज उन युवाओं के लिए मिसाल बन चुका है, जो सीमाओं के बावजूद अपने लक्ष्य को हासिल करने का जज्बा रखते हैं। उनकी कहानी यह संदेश देती है कि अगर इरादे मजबूत हों, तो कोई भी बाधा रास्ता नहीं रोक सकती।








