शहरी चौपाल ब्यूरो
सहारनपुर। जनगणना-2027 को लेकर सहारनपुर नगर निगम द्वारा जनमंच सभागार में एक महत्वपूर्ण कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जिसमें पार्षदों एवं नगर निगम कर्मचारियों को डिजिटल स्व-गणना की प्रक्रिया से अवगत कराया गया। कार्यक्रम में जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों ने जनगणना को देश के विकास की आधारशिला बताते हुए नागरिकों से इसमें बढ़-चढ़कर भाग लेने का आह्वान किया।

कार्यक्रम का शुभारंभ महापौर डॉ. अजय कुमार, अपर जिलाधिकारी वित्त एवं जिला जनगणना अधिकारी सलिल कुमार पटेल तथा उपसभापति मयंक गर्ग ने मां सरस्वती के चित्र के समक्ष दीप प्रज्वलित कर किया। इसके बाद उपस्थित लोगों को जनगणना-2027 के महत्व, उद्देश्य और डिजिटल प्रक्रिया के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई।
महापौर डॉ. अजय कुमार ने अपने संबोधन में कहा कि जनगणना केवल आंकड़ों का संग्रह नहीं, बल्कि देश के भविष्य की योजनाओं की आधारशिला है। उन्होंने कहा कि सरकार की अधिकांश जनकल्याणकारी योजनाएं जनगणना के आंकड़ों पर आधारित होती हैं। इसलिए प्रत्येक नागरिक का सही और समय पर अपनी जानकारी दर्ज कराना अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने कहा कि जनगणना के माध्यम से सरकार को यह पता चलता है कि किस क्षेत्र में कितनी आबादी है, वहां किस प्रकार की सुविधाओं की आवश्यकता है और किन क्षेत्रों में विकास कार्यों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।
महापौर ने लोगों के बीच फैली भ्रांतियों को दूर करते हुए कहा कि डिजिटल स्व-गणना पूरी तरह सुरक्षित है और इसमें किसी भी व्यक्ति के निजी डेटा के दुरुपयोग की कोई संभावना नहीं है। उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार द्वारा इसके लिए वैधानिक सुरक्षा व्यवस्था की गई है और नागरिकों की जानकारी पूरी तरह गोपनीय रखी जाएगी। उन्होंने सभी पार्षदों और कर्मचारियों से अपील की कि वे स्वयं भी स्व-गणना करें और आम जनता को भी इसके प्रति जागरूक बनाएं।
नगरायुक्त शिपू गिरि ने कहा कि डिजिटल इंडिया के इस दौर में जनगणना की प्रक्रिया को भी तकनीक से जोड़ा गया है, जिससे यह कार्य पहले की अपेक्षा अधिक पारदर्शी और सरल हो गया है। उन्होंने कहा कि प्रत्येक नागरिक अपने मोबाइल फोन के माध्यम से कहीं से भी अपनी स्व-गणना कर सकता है। उन्होंने नागरिकों से इस अभियान में सक्रिय भागीदारी निभाने की अपील की।
अपर जिलाधिकारी वित्त एवं जिला जनगणना अधिकारी सलिल कुमार पटेल ने जनगणना-2027 को जनकल्याण की दिशा तय करने वाला एक महत्वपूर्ण दस्तावेज बताया। उन्होंने कहा कि आने वाले वर्षों में शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, सड़क, पेयजल और अन्य विकास योजनाओं का निर्धारण जनगणना के आंकड़ों के आधार पर किया जाएगा। उन्होंने कहा कि यदि आंकड़े सही होंगे तो योजनाएं भी अधिक प्रभावी और जनहितकारी बन सकेंगी।
उन्होंने डिजिटल स्व-गणना की प्रक्रिया को विस्तार से समझाते हुए बताया कि इसमें किसी प्रकार का पेपर वर्क नहीं होगा। व्यक्ति अपने मोबाइल फोन से ऑनलाइन पोर्टल पर जाकर आसानी से अपनी जानकारी दर्ज कर सकता है। उन्होंने कहा कि यह प्रक्रिया समय की बचत के साथ-साथ पारदर्शिता भी सुनिश्चित करेगी।
कार्यक्रम में एडी जनगणना आशुतोष ने पार्षदों और कर्मचारियों को स्क्रीन के माध्यम से प्रशिक्षण दिया। उन्होंने बताया कि डिजिटल स्व-गणना के दौरान पूछे जाने वाले सभी 33 सवालों का उत्तर किस प्रकार देना है। उन्होंने चरणबद्ध तरीके से पूरी प्रक्रिया समझाते हुए उपस्थित लोगों से मोबाइल के माध्यम से लाइव स्व-गणना भी कराई।
उन्होंने बताया कि व्यक्ति द्वारा दी गई जानकारी को सबमिट करने से पहले दोबारा जांचने की सुविधा भी उपलब्ध रहेगी, जिससे गलतियों की संभावना कम हो जाएगी। प्रशिक्षण के दौरान उपस्थित लोगों ने डिजिटल प्रणाली को सरल और उपयोगी बताया।
कार्यक्रम में जनगणना से जुड़ी तकनीकी और प्रशासनिक तैयारियों की भी जानकारी दी गई। अधिकारियों ने बताया कि इस बार जनगणना पूरी तरह डिजिटल माध्यम से संपन्न कराई जाएगी और इसके लिए व्यापक स्तर पर जागरूकता अभियान भी चलाया जाएगा। नगर निगम के अधिकारी और कर्मचारी विभिन्न वार्डों में जाकर लोगों को स्व-गणना के प्रति जागरूक करेंगे।
इस अवसर पर अपर नगरायुक्त प्रदीप यादव, मुख्य अभियंता निर्माण सुरेश चंद, सहायक नगरायुक्त जेपी यादव, मुख्य कर निर्धारण अधिकारी संगीता गुप्ता एवं कर निर्धारण अधिकारी श्रुति महेश्वरी ने अतिथियों का स्वागत एवं अभिनंदन किया। नगर जनगणना अधिकारी एवं अपर नगरायुक्त मृत्युंजय ने कार्यक्रम में उपस्थित सभी अतिथियों और प्रतिभागियों का आभार व्यक्त किया।
कार्यक्रम का संचालन डॉ. वीरेन्द्र आज़म ने किया। इस दौरान महाप्रबंधक जल पुरुषोत्तम, नगर निगम के विभिन्न विभागों के अधिकारी, कर्मचारी तथा बड़ी संख्या में पार्षद उपस्थित रहे।
जनगणना-2027 को लेकर आयोजित यह कार्यक्रम न केवल डिजिटल स्व-गणना की प्रक्रिया को समझाने का माध्यम बना, बल्कि लोगों में इसके महत्व के प्रति जागरूकता बढ़ाने का भी सफल प्रयास साबित हुआ। अधिकारियों का मानना है कि यदि प्रत्येक नागरिक जिम्मेदारी के साथ अपनी सही जानकारी दर्ज कराएगा तो भविष्य की योजनाएं अधिक प्रभावी और जनहितकारी बन सकेंगी।








