सहारनपुर में ट्रैफिक पुलिस सख्त: ओवरलोड ऑटो-ई रिक्शा और बिना लाइसेंस वाहन चलाने पर 38 चालान

सहारनपुर में ट्रैफिक पुलिस ने स्कूली बच्चों की सुरक्षा को लेकर विशेष अभियान चलाकर 38 चालान किए। ओवरलोड ऑटो-ई रिक्शा और बिना लाइसेंस वाहन चलाने वालों पर ₹2.30 लाख से अधिक का जुर्माना लगाया गया।

शहरी चौपाल ब्यूरो 

सहारनपुर। जनपद में स्कूली बच्चों की सुरक्षा को लेकर यातायात पुलिस ने सख्त रुख अपनाते हुए विशेष चेकिंग अभियान चलाया। इस दौरान ऑटो और ई-रिक्शा में क्षमता से अधिक स्कूली बच्चों को बैठाकर वाहन चलाने तथा नाबालिग छात्र-छात्राओं द्वारा बिना ड्राइविंग लाइसेंस वाहन चलाने के मामलों में व्यापक कार्रवाई की गई। अभियान के दौरान कुल 38 चालान किए गए और दो लाख 30 हजार रुपये से अधिक का जुर्माना लगाया गया।

वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक सहारनपुर के निर्देश पर पुलिस अधीक्षक यातायात के निर्देशन तथा प्रभारी यातायात पुलिस के नेतृत्व में यह विशेष अभियान चलाया गया। अभियान का मुख्य उद्देश्य स्कूल जाने वाले बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करना और सड़क दुर्घटनाओं की संभावनाओं को कम करना था।

चेकिंग के दौरान यातायात पुलिस ने शहर के विभिन्न स्कूलों के आसपास और प्रमुख मार्गों पर ऑटो तथा ई-रिक्शा वाहनों की जांच की। इस दौरान कई वाहन चालक निर्धारित क्षमता से अधिक बच्चों को बैठाकर वाहन चलाते हुए पाए गए। पुलिस अधिकारियों ने ऐसे वाहन चालकों के खिलाफ तत्काल चालान की कार्रवाई की और उन्हें भविष्य में नियमों का पालन करने की सख्त चेतावनी दी।

अधिकारियों ने बताया कि ओवरलोडिंग के कारण सड़क दुर्घटनाओं का खतरा कई गुना बढ़ जाता है। छोटे वाहनों में अधिक बच्चों को बैठाने से संतुलन बिगड़ने की संभावना रहती है, जिससे बच्चों की जान जोखिम में पड़ सकती है। पुलिस ने कहा कि बच्चों की सुरक्षा से किसी भी प्रकार का समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा।

अभियान के दौरान कई छात्र-छात्राएं बिना ड्राइविंग लाइसेंस दोपहिया वाहन चलाते हुए भी मिले। ऐसे मामलों में यातायात पुलिस ने संबंधित छात्र-छात्राओं के अभिभावकों को मौके पर बुलाकर समझाइश दी और कड़ी चेतावनी जारी की। पुलिस अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि भविष्य में यदि कोई नाबालिग बिना लाइसेंस वाहन चलाते हुए पाया गया तो उसके खिलाफ वैधानिक कार्रवाई करते हुए मुकदमा दर्ज किया जाएगा।

यातायात पुलिस ने अभिभावकों को जागरूक करते हुए कहा कि कम उम्र में बच्चों को बाइक या स्कूटी चलाने देना न केवल कानून का उल्लंघन है, बल्कि यह उनके जीवन के लिए भी बड़ा खतरा है। कई बार देखा जाता है कि अभिभावक सुविधा के लिए बच्चों को वाहन दे देते हैं, जबकि उनके पास ड्राइविंग लाइसेंस नहीं होता और उन्हें सड़क सुरक्षा नियमों की पर्याप्त जानकारी भी नहीं होती।

पुलिस अधिकारियों ने कहा कि सड़क हादसों में बढ़ती मौतों और गंभीर चोटों के पीछे नाबालिगों द्वारा वाहन चलाना भी एक प्रमुख कारण बनता जा रहा है। ऐसे में अभिभावकों की जिम्मेदारी और भी बढ़ जाती है कि वे अपने बच्चों को यातायात नियमों के प्रति जागरूक करें और बिना लाइसेंस वाहन न चलाने दें।

अभियान के दौरान यातायात पुलिस ने स्कूल वाहन चालकों को भी दिशा-निर्देश जारी किए। उन्हें कहा गया कि निर्धारित क्षमता से अधिक बच्चों को वाहन में न बैठाया जाए और सभी सुरक्षा मानकों का पालन किया जाए। पुलिस ने यह भी कहा कि यदि भविष्य में किसी वाहन में ओवरलोडिंग पाई गई तो उसके खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी।

यातायात विभाग ने आमजन से अपील की कि वे बच्चों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दें और सड़क सुरक्षा नियमों का पालन करें। अधिकारियों ने कहा कि सुरक्षित यातायात व्यवस्था के लिए पुलिस और जनता दोनों की भागीदारी जरूरी है।

पुलिस ने स्पष्ट किया कि इस प्रकार के विशेष अभियान आगे भी लगातार चलाए जाएंगे ताकि सड़क दुर्घटनाओं को रोका जा सके और स्कूली बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके। यातायात पुलिस ने अपने संदेश में कहा— “आपकी सुरक्षा हमारा दायित्व” और सभी नागरिकों से जिम्मेदार नागरिक बनकर यातायात नियमों का पालन करने की अपील की।

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