सहारनपुर में आंधी से स्वर्ण पैलेस बैंक्विट हॉल की छत गिरी, लाखों का नुकसान

सहारनपुर के नवादा रोड स्थित स्वर्ण पैलेस बैंक्विट हॉल की टिन शेड छत तेज आंधी में धराशायी हो गई। हादसे में लाखों का नुकसान हुआ, जबकि हॉल में कार्यक्रम न होने से बड़ा हादसा टल गया। घटना के बाद शहर के बैंक्विट हॉलों की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं।

 

शहरी चौपाल ब्यूरो 

सहारनपुर। बुधवार देर रात आए तेज आंधी-तूफान ने शहर में भारी तबाही मचाई। नवादा रोड स्थित स्वर्ण पैलेस बैंक्विट हॉल की टिन शेड वाली छत तेज हवाओं का दबाव नहीं झेल सकी और दीवार सहित भरभराकर नीचे गिर गई। हादसे में बैंक्विट हॉल को लाखों रुपये का नुकसान हुआ है। राहत की बात यह रही कि घटना के समय हॉल में कोई शादी समारोह या अन्य कार्यक्रम आयोजित नहीं था, अन्यथा बड़ा हादसा हो सकता था और सैकड़ों लोगों की जान खतरे में पड़ सकती थी।

जानकारी के अनुसार होटल स्वर्ण पैलेस की गली की ओर बनी दीवार के ऊपर लगे तीन भारी-भरकम टिन शेड देर रात आए तूफान के दौरान अचानक धराशायी हो गए। तेज आवाज के साथ शेड और दीवार गिरने से आसपास के क्षेत्र में अफरा-तफरी मच गई। घटना के बाद स्थानीय लोग मौके पर एकत्र हो गए। हादसे में बैंक्विट हॉल के अंदर रखा फर्नीचर, एयर कंडीशनर, सजावटी सामान, इलेक्ट्रॉनिक उपकरण और अन्य सामग्री बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई। प्रारंभिक अनुमान के अनुसार बैंक्विट हॉल प्रबंधन को लाखों रुपये का नुकसान हुआ है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि हादसे के समय हॉल में कोई कार्यक्रम चल रहा होता तो स्थिति बेहद भयावह हो सकती थी। जिस स्थान पर टिन शेड गिरी, वहां सामान्यतः कार्यक्रमों के दौरान बड़ी संख्या में मेहमान बैठते हैं। ऐसे में यह घटना एक बड़े खतरे की चेतावनी मानी जा रही है।घटना के बाद शहर में संचालित बैंक्विट हॉलों की निर्माण गुणवत्ता और सुरक्षा मानकों को लेकर भी सवाल खड़े हो गए हैं। लोगों का कहना है कि सहारनपुर में अधिकांश बैंक्विट हॉलों की छतें टिन शेड से निर्मित हैं। इन टिन शेडों को अंदर से टेंट के कपड़ों, झूमरों, सजावटी पर्दों और आकर्षक लाइटिंग से इस प्रकार ढक दिया जाता है कि वास्तविक ढांचा दिखाई ही नहीं देता। चमकदार सजावट के पीछे सुरक्षा मानकों की अनदेखी आम लोगों की नजरों से ओझल रहती है।

स्थानीय नागरिकों का कहना है कि बुधवार की आंधी में जिस प्रकार स्वर्ण पैलेस की टिन शेड वाली छत धराशायी हुई, उसी प्रकार शहर के अन्य बैंक्विट हॉल भी भविष्य में बड़े हादसे का कारण बन सकते हैं। लोगों ने आशंका जताई कि यदि समय रहते इन भवनों की तकनीकी जांच नहीं कराई गई तो किसी बड़े समारोह के दौरान भारी जनहानि हो सकती है।

सूत्रों के अनुसार होटल स्वामी नवीन मक्कड़ से संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन उनसे बातचीत नहीं हो सकी। वहीं घटना के बाद क्षेत्र के लोगों ने विकास प्राधिकरण और जिला प्रशासन से शहर में संचालित सभी बैंक्विट हॉलों और होटलों की तकनीकी जांच कराने की मांग उठाई है।लोगों ने आरोप लगाया कि चिलकाना रोड, मंडी समिति रोड, अंबाला रोड और थाना कुतुबशेर क्षेत्र के आसपास कई बैंक्विट हॉल सुरक्षा मानकों को ताक पर रखकर संचालित किए जा रहे हैं। इससे पहले भी शहर के कई होटलों और बैंक्विट हॉलों में आगजनी और अन्य हादसे हो चुके हैं, लेकिन संबंधित विभागों की ओर से प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई।

पस्थानीय नागरिकों ने प्रशासन से मांग की है कि शहर के सभी बैंक्विट हॉलों की संरचनात्मक मजबूती, अग्निशमन व्यवस्था, आपातकालीन निकास और निर्माण मानकों की गहन जांच कराई जाए। साथ ही नियमों की अनदेखी कर संचालित होने वाले प्रतिष्ठानों के खिलाफ सख्त कार्रवाई सुनिश्चित की जाए, ताकि भविष्य में किसी बड़े हादसे को रोका जा सके।

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