सहारनपुर/देववृंद। बजरंग दल के पूर्व प्रांत संयोजक विकास त्यागी ने जमीयत उलेमा-ए-हिंद के अध्यक्ष मौलाना अरशद मदनी द्वारा दिए गए हालिया बयान पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए इसे गैर-जिम्मेदाराना, भड़काऊ और समाज को बांटने वाला बताया है। उन्होंने कहा कि देश किसी भी प्रकार की उकसावे वाली राजनीति या मजहबी बयानबाजी से नहीं, बल्कि संविधान और कानून के शासन से चलता है।
प्रेस को जारी बयान में विकास त्यागी ने कहा कि “मुसलमान न कभी झुका है और न झुकेगा” जैसे बयान समाज में अनावश्यक तनाव पैदा करने वाले हैं। उनका कहना था कि इस प्रकार की भाषा का प्रयोग कर मौलाना मदनी देश के आम मुसलमानों को भड़काने और उन्हें मुख्यधारा से अलग करने का प्रयास कर रहे हैं। त्यागी ने आरोप लगाया कि इस तरह के बयान सामाजिक सौहार्द को नुकसान पहुंचाते हैं और देश में बेवजह टकराव का माहौल बनाने का काम करते हैं।
उन्होंने कहा कि मौलाना अरशद मदनी पहले भी कई बार विवादित बयान दे चुके हैं और मंचों से ऐसी बातें कहकर सुर्खियां बटोरने की कोशिश करते रहे हैं। विकास त्यागी ने कहा कि इस प्रकार की बयानबाजी से उनकी मानसिकता और मंशा स्पष्ट दिखाई देती है। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ लोग समाज में धार्मिक आधार पर विभाजन पैदा कर अपनी राजनीति को मजबूत करने का प्रयास करते हैं।
पूर्व प्रांत संयोजक ने कहा कि जो लोग हर समय संविधान की बात करते हैं, वही कई बार कानून और संवैधानिक संस्थाओं पर सवाल उठाने से भी पीछे नहीं हटते। उन्होंने कहा कि भारत का संविधान सभी नागरिकों को समान अधिकार देता है और देश की न्याय व्यवस्था हर व्यक्ति के लिए समान रूप से काम करती है। लेकिन संविधान की आड़ में किसी प्रकार की कट्टरता या समाज को भड़काने वाली राजनीति को स्वीकार नहीं किया जा सकता।
विकास त्यागी ने कहा कि देश बाबा साहब डॉ. भीमराव अंबेडकर द्वारा निर्मित संविधान से संचालित होता है और हर नागरिक का कर्तव्य है कि वह संविधान और कानून का सम्मान करे। उन्होंने कहा कि किसी भी संगठन या व्यक्ति को ऐसी बयानबाजी नहीं करनी चाहिए जिससे देश की एकता और अखंडता प्रभावित हो।
उन्होंने कहा कि आज देश बदल चुका है और अब तुष्टिकरण की राजनीति अधिक समय तक नहीं चल सकती। राष्ट्रहित और कानून व्यवस्था सर्वोपरि है तथा देश की सुरक्षा और संप्रभुता से बड़ा कुछ भी नहीं हो सकता। त्यागी ने कहा कि यदि कोई यह सोचता है कि भीड़ को उकसाकर या भड़काऊ बयान देकर कानून व्यवस्था को प्रभावित किया जा सकता है तो यह उसकी गलतफहमी है।
विकास त्यागी ने कहा कि भारत एक लोकतांत्रिक देश है जहां सभी धर्मों और समुदायों को बराबरी का अधिकार प्राप्त है। लेकिन लोकतंत्र का अर्थ यह नहीं कि कोई भी व्यक्ति समाज में वैमनस्य फैलाने वाली भाषा का प्रयोग करे। उन्होंने कहा कि नेताओं और धार्मिक संगठनों को अपने बयानों में संयम बरतना चाहिए ताकि समाज में शांति और भाईचारा बना रहे।
उन्होंने यह भी कहा कि देश की जनता अब विकास, रोजगार, शिक्षा और सुरक्षा जैसे मुद्दों पर काम चाहती है। ऐसे समय में धार्मिक और भड़काऊ बयान समाज को पीछे ले जाने का काम करते हैं। उन्होंने सभी वर्गों से अपील की कि वे देश की एकता, संविधान और कानून व्यवस्था पर विश्वास बनाए रखें तथा किसी भी प्रकार की उकसावे वाली राजनीति से दूर रहें।
बजरंग दल के पूर्व प्रांत संयोजक ने कहा कि देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था मजबूत है और यहां कानून से ऊपर कोई नहीं है। उन्होंने दोहराया कि भारत संविधान से चलेगा और किसी भी प्रकार की कट्टरता, उन्माद या भड़काऊ बयानबाजी को स्वीकार नहीं किया जाएगा।








