शहरी चौपाल ब्यूरो
सहारनपुर। हसनपुर चौराहे से सर्किट हाउस रोड तक चल रहे सड़क चौड़ीकरण कार्य के दौरान मकानों को ध्वस्त किए जाने के विरोध में सोमवार को बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने जिलाधिकारी कार्यालय पहुंचकर प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने प्रशासन पर बिना उचित नोटिस और मुआवजा दिए बुलडोजर कार्रवाई करने का आरोप लगाया तथा प्रभावित परिवारों के पुनर्वास और उचित मुआवजे की मांग की।
ग्रामीणों का कहना था कि सड़क चौड़ीकरण के नाम पर प्रशासन ने गरीब परिवारों के मकानों को तोड़ दिया, जिससे अनेक परिवार बेघर होने की स्थिति में पहुंच गए हैं। प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि प्रशासन ने पहले बुलडोजर चलवाया और बाद में नोटिस जारी किए, जो पूरी तरह अनुचित और नियमों के खिलाफ है।
प्रदर्शन के दौरान ग्रामीणों ने बताया कि जिलाधिकारी की ओर से वार्ता के लिए पांच अधिकारियों को नामित किया गया था और सुबह 10 बजे का समय निर्धारित किया गया था। हालांकि दोपहर 2 बजे तक कोई अधिकारी मौके पर नहीं पहुंचा, जिससे ग्रामीणों में नाराजगी और बढ़ गई। लंबे इंतजार के बाद नगर मजिस्ट्रेट मौके पर पहुंचे और ग्रामीणों को एक सप्ताह के भीतर न्याय दिलाने का आश्वासन दिया।
प्रदर्शनकारियों की ओर से एडवोकेट राजकुमार ने प्रशासनिक कार्रवाई पर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रशासन ने उच्च न्यायालय के निर्देशों की भी अनदेखी की है। उनका कहना था कि बिना उचित प्रक्रिया अपनाए और बिना वैकल्पिक व्यवस्था किए गरीब परिवारों के मकान तोड़ना अमानवीय और अव्यावहारिक कदम है।
उन्होंने कहा कि कई परिवारों ने अपने मकानों की मरम्मत और निर्माण के लिए महिलाओं के जेवर तक गिरवी रख दिए थे, लेकिन बुलडोजर कार्रवाई में उनके आशियाने ध्वस्त कर दिए गए। इससे प्रभावित परिवार आर्थिक और मानसिक संकट से गुजर रहे हैं।
ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की कि सिंचाई विभाग की राजबाहे की मध्य रेखा से केवल 20 फीट तक ही भूमि अधिग्रहित की जाए और उससे अधिक कब्जाई गई जमीन वापस की जाए। प्रदर्शनकारियों का आरोप था कि एक निजी औद्योगिक इकाई की दीवार को बचाने के लिए गलत पैमाइश कर लगभग 26 फीट तक भूमि अधिग्रहित की गई, जिससे गरीब परिवारों को भारी नुकसान उठाना पड़ा।
प्रदर्शन में शामिल लोगों ने चेतावनी दी कि यदि उनकी पुश्तैनी जमीन वापस नहीं की गई और मकानों का पुनर्स्थापन नहीं किया गया तो दलित समाज के साथ मिलकर बड़ा आंदोलन शुरू किया जाएगा। ग्रामीणों ने कहा कि वे अपने अधिकारों और जमीन की रक्षा के लिए लोकतांत्रिक तरीके से संघर्ष जारी रखेंगे।
प्रदर्शन के दौरान महिलाओं की भी बड़ी भागीदारी देखने को मिली। प्रभावित परिवारों की महिलाओं ने कहा कि वर्षों की मेहनत से बनाए गए मकानों को अचानक तोड़ दिए जाने से उनका जीवन संकट में पड़ गया है। उन्होंने प्रशासन से मानवीय दृष्टिकोण अपनाने और प्रभावित परिवारों की समस्याओं का समाधान करने की मांग की।
जिलाधिकारी कार्यालय पहुंचे प्रदर्शनकारियों में देशराज, जसपाल, करण सिंह गौतम, मदन सिंह, नरेंद्र, कंवरपाल, दिनेश, दिलीप सिंह, शमशेर सिंह, संजय कुमार, नरेश, रामकुमार, नाथीराम, चंद्रशेखर, जगन्नाथ, गुलाब सिंह, अरविंद, चतरपाल, यशपाल, अशोक मलिक, करण सिंह, माया देवी, विनीता देवी, अनारकली और कलावती सहित सैकड़ों महिला-पुरुष शामिल रहे।
ग्रामीणों ने प्रशासन से जल्द समाधान निकालने और प्रभावित परिवारों को उचित मुआवजा तथा पुनर्वास उपलब्ध कराने की मांग दोहराई। अब लोगों की नजर प्रशासन की अगली कार्रवाई और दिए गए आश्वासन पर टिकी हुई है।








