शहरी चौपाल ब्यूरो
सहारनपुर। नगर निगम की सफाई व्यवस्था के निजीकरण को लेकर शहर में विरोध लगातार तेज होता जा रहा है। सफाई व्यवस्था को निजी कंपनियों को सौंपने के प्रस्ताव के खिलाफ चल रहे वाल्मीकि समाज के धरने को अब राजनीतिक समर्थन भी मिलने लगा है। वरिष्ठ समाजवादी पार्टी नेता एवं पार्षद अभिषेक टिंकू अरोड़ा ने अस्वस्थ होने के बावजूद धरना स्थल पहुंचकर प्रदर्शन कर रहे लोगों का समर्थन किया और नगर निगम प्रशासन के फैसले पर गंभीर सवाल उठाए।
धरना स्थल पर पहुंचे अभिषेक टिंकू अरोड़ा ने कहा कि नगर निगम की सफाई व्यवस्था को निजी हाथों में सौंपना गरीब, मजदूर और वाल्मीकि समाज के हितों के खिलाफ लिया गया फैसला है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि समाजवादी पार्टी इस मुद्दे पर वाल्मीकि समाज के साथ मजबूती से खड़ी है और किसी भी कीमत पर स्थानीय युवाओं के रोजगार के साथ खिलवाड़ नहीं होने दिया जाएगा।
दरअसल नगर निगम द्वारा शहर के लगभग 52 से 55 वार्डों की सफाई व्यवस्था निजी कंपनियों के माध्यम से संचालित करने के लिए टेंडर प्रक्रिया शुरू की गई है। इसी निर्णय के विरोध में पिछले कई दिनों से वाल्मीकि समाज के लोग नगर निगम परिसर में धरना-प्रदर्शन कर रहे हैं। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि यदि निजीकरण लागू हुआ तो वर्षों से सफाई व्यवस्था से जुड़े हजारों परिवारों के सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो जाएगा।
“स्थानीय युवाओं का हक छीना जा रहा”
धरने को संबोधित करते हुए अभिषेक टिंकू अरोड़ा ने कहा कि भाजपा सरकार में गरीब और मजदूर वर्ग लगातार परेशान हो रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि नगर निगम की सफाई व्यवस्था का निजीकरण कर स्थानीय युवाओं के रोजगार पर सीधा हमला किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि जिस कार्य को स्थानीय युवाओं की भर्ती कर कम खर्च में बेहतर तरीके से कराया जा सकता है, उसी कार्य के लिए करोड़ों रुपये का भारी भरकम ठेका निजी कंपनियों को देने की तैयारी की जा रही है।
अभिषेक टिंकू अरोड़ा ने दावा किया कि नगर निगम लगभग 38 करोड़ रुपये का ठेका निजी कंपनियों को देने की योजना बना रहा है, जबकि यही कार्य 15 से 18 करोड़ रुपये के खर्च में स्थानीय युवाओं को रोजगार देकर कराया जा सकता है। उनका कहना था कि इससे न केवल नगर निगम के राजस्व पर अतिरिक्त बोझ पड़ेगा बल्कि स्थानीय बेरोजगार युवाओं का भविष्य भी अंधकार में चला जाएगा।
उन्होंने कहा कि नगर निगम को चाहिए कि वह शहर के युवाओं को स्थायी रोजगार देकर सफाई व्यवस्था को मजबूत बनाए, लेकिन इसके विपरीत बाहरी कंपनियों को लाभ पहुंचाने की कोशिश की जा रही है।
“वाल्मीकि समाज शहर की सफाई व्यवस्था की रीढ़”
सपा नेता ने कहा कि वाल्मीकि समाज वर्षों से शहर की सफाई व्यवस्था की रीढ़ रहा है। सुबह से लेकर देर रात तक सफाई कर्मचारी शहर को स्वच्छ रखने के लिए मेहनत करते हैं, लेकिन अब उन्हीं लोगों के रोजगार को खतरे में डाला जा रहा है।
उन्होंने कहा कि जनप्रतिनिधियों की जिम्मेदारी है कि वे मजदूर और वंचित वर्ग के अधिकारों की रक्षा करें। समाजवादी पार्टी हमेशा गरीब, मजदूर और पिछड़े वर्ग के साथ खड़ी रही है और आगे भी उनके संघर्ष में पूरा सहयोग देगी।
उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि नगर निगम ने निजीकरण का फैसला वापस नहीं लिया तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा। जरूरत पड़ी तो शहर स्तर पर बड़ा जनआंदोलन भी किया जाएगा।
प्रदर्शनकारियों ने जताई नाराजगी
धरना स्थल पर मौजूद प्रदर्शनकारियों ने भी नगर निगम प्रशासन के खिलाफ जमकर नाराजगी जताई। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि नगर निगम को पहले स्थानीय जरूरतों और युवाओं के रोजगार पर ध्यान देना चाहिए।
उनका आरोप था कि निजीकरण लागू होने के बाद बड़ी संख्या में स्थानीय सफाई कर्मियों और युवाओं के सामने बेरोजगारी की समस्या खड़ी हो जाएगी। इससे गरीब परिवारों की आर्थिक स्थिति पर सीधा असर पड़ेगा।
वाल्मीकि समाज के लोगों ने कहा कि सफाई व्यवस्था से जुड़े परिवार पीढ़ियों से इस कार्य में लगे हुए हैं और अब निजी कंपनियों को काम सौंपकर उन्हें दरकिनार करने का प्रयास किया जा रहा है।
टेंडर प्रक्रिया पर पुनर्विचार की मांग
धरने में शामिल लोगों ने नगर निगम प्रशासन से मांग की कि टेंडर प्रक्रिया पर तत्काल पुनर्विचार किया जाए और सफाई व्यवस्था का निजीकरण रोका जाए। प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों को नजरअंदाज किया गया तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।
धरना स्थल पर शुभम वर्मा, जोगिंदर सिंह, लक्की जाटव, रवि यादव सहित बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे। आंदोलनकारियों ने एक स्वर में कहा कि यह केवल रोजगार का मुद्दा नहीं बल्कि वाल्मीकि समाज के सम्मान और भविष्य का भी सवाल है।








