शहरी चौपाल ब्यूरो
सहारनपुर । मंगलवार को उस समय राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में हलचल मच गई, जब कैराना से समाजवादी पार्टी की सांसद Iqra Hasan और पुलिस के बीच डीआईजी कार्यालय परिसर में तीखी नोकझोंक हो गई। सांसद जसाला गांव की एक बुजुर्ग महिला को लेकर डीआईजी कार्यालय पहुंची थीं, जहां उनके और महिला पुलिसकर्मियों के बीच हुई बहस का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया।
पीड़ित परिवार को लेकर पहुंचीं थीं डीआईजी कार्यालय
सांसद इकरा हसन ने पत्रकारों से बातचीत में बताया कि वह जसाला गांव निवासी मोनू कश्यप की मां को लेकर डीआईजी अभिषेक सिंह से मिलने पहुंची थीं। परिवार बेटे की मौत के मामले में निष्पक्ष जांच और न्याय की मांग कर रहा था। सांसद का आरोप है कि पीड़ित महिला की पूरी बात सुने बिना ही उन्हें वहां से जाने के लिए कहा गया।
उन्होंने कहा कि एक बुजुर्ग मां अपने बेटे के लिए इंसाफ मांग रही थी, लेकिन प्रशासनिक अधिकारियों का रवैया संवेदनहीन दिखाई दिया। सांसद ने कहा कि वह एक जनप्रतिनिधि होने के नाते पीड़ित परिवार की आवाज उठाने पहुंची थीं और अन्याय के खिलाफ लगातार आवाज उठाती रहेंगी।
“हम पार्किंग में थे, सड़क जाम नहीं किया”
इकरा हसन ने पुलिस प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि उन्होंने किसी प्रकार का सड़क जाम या हंगामा नहीं किया। उनके अनुसार वह डीआईजी कार्यालय परिसर की पार्किंग में मौजूद थीं और दूसरी एप्लिकेशन तैयार करने को लेकर चर्चा कर रही थीं। इसी दौरान पुलिसकर्मी वहां पहुंचे और उन्हें महिला थाने ले जाया गया।
सांसद ने दावा किया कि उनके पास वीडियो रिकॉर्डिंग मौजूद है, जिसमें ट्रैफिक सामान्य रूप से चलता दिखाई दे रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि उन्हें डराने और दबाव बनाने के उद्देश्य से बड़ी संख्या में महिला पुलिसकर्मियों को बुलाया गया।
“मुझे हाथ मत लगाइए” वीडियो हुआ वायरल
घटना के दौरान सांसद और महिला पुलिसकर्मियों के बीच हुई बातचीत का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। वीडियो में महिला पुलिसकर्मी द्वारा अंदर चलने के लिए कहे जाने पर इकरा हसन सख्त लहजे में कहती सुनाई दे रही हैं— “मुझे हाथ मत लगाइए।” जवाब में पुलिसकर्मी कहती हैं कि उन्होंने केवल रास्ता दिखाया है।
महिला थाने में भी सांसद और पुलिसकर्मियों के बीच तीखा संवाद देखने को मिला। वायरल वीडियो में एक महिला पुलिसकर्मी सांसद को पानी ऑफर करती नजर आती है, जिस पर इकरा हसन कहती हैं— “हमें आपका पानी नहीं पीना है। आप लोग पीड़ित की पीड़ा नहीं समझ रहे।”
समर्थकों की भीड़ से बढ़ी हलचल
सांसद को महिला थाने ले जाने की सूचना मिलते ही समाजवादी पार्टी कार्यकर्ताओं और समर्थकों की भीड़ थाने के बाहर जमा हो गई। कुछ समय के लिए तनाव जैसी स्थिति बन गई। बाद में पुलिस अधिकारियों और स्थानीय नेताओं की बातचीत के बाद मामला शांत हुआ और सांसद को वहां से जाने दिया गया।
भाजपा सरकार पर साधा निशाना
पत्रकारों से बातचीत में इकरा हसन ने भाजपा सरकार पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वर्तमान शासन में प्रशासन केवल सत्ता पक्ष के हित में कार्य कर रहा है। उन्होंने कहा कि पीड़ितों की आवाज दबाई जा रही है और जनप्रतिनिधियों को भी सम्मान नहीं मिल रहा।
जब उनसे पूछा गया कि क्या वह इस मुद्दे को संसद में उठाएंगी, तो उन्होंने कहा, “इस सरकार में बोलने से भी कोई फायदा नहीं, क्योंकि सुनवाई नहीं होती।”
जिले में बना चर्चा का विषय
डीआईजी कार्यालय से लेकर महिला थाने तक चला यह घटनाक्रम पूरे जिले में चर्चा का विषय बना हुआ है। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो को लेकर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। एक पक्ष इसे प्रशासन की सख्ती बता रहा है, जबकि दूसरा पक्ष इसे जनप्रतिनिधि के साथ अनुचित व्यवहार करार दे रहा है।
फिलहाल पुलिस प्रशासन की ओर से पूरे मामले पर विस्तृत आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। राजनीतिक जानकार इसे आगामी चुनावी माहौल से जोड़कर भी देख रहे हैं।








