जामिया शेख अब्दुल सत्तार में रूहानी मजलिस का आयोजन, उलेमा ने दी दीन और भाईचारे की सीख

छुटमलपुर के जामिया शेख अब्दुल सत्तार में रूहानी और इस्लाही मजलिस का आयोजन हुआ। उलेमा ने दीन, अखलाक और भाईचारे पर बयान दिए, जबकि मेधावी छात्रों को सम्मानित किया गया।

अमित कुमार 

छुटमलपुर। नानका गंदेवड़ा स्थित मदरसा जामिया शेख अब्दुल सत्तार में रूहानी, इस्लाही और तालीमी मजलिस का आयोजन बड़े ही अकीदत और एहतराम के साथ किया गया। कार्यक्रम में विभिन्न क्षेत्रों से आए उलेमा-ए-किराम, मशाइख, हाफिज, कारी और बड़ी संख्या में आम लोगों ने शिरकत की। मजलिस का मुख्य उद्देश्य लोगों में दीन की सही समझ पैदा करना, रूहानी सुधार लाना और इस्लामी शिक्षाओं को आम करना रहा।

कार्यक्रम की अध्यक्षता जामिया के सदर हजरत हाफिज जमील अहमद नानकवी ने की, जबकि संचालन मौलाना मुफ्ती अताऊर्रहमान जमील कासमी ने किया। कार्यक्रम के कन्वीनर हाजी फजलुर्रहमान रहीमी ने मेहमानों का स्वागत करते हुए कहा कि इस तरह की मजलिसें समाज में मोहब्बत, भाईचारे और दीनदारी को मजबूत करती हैं।

मजलिस की शुरुआत कारी मोहम्मद आजम कमाल रहमानी द्वारा तिलावत-ए-कुरआन से हुई। इसके बाद मदरसे के छात्रों ने नात-ए-पाक, नज्म और तकरीरों के माध्यम से उपस्थित लोगों का दिल जीत लिया। कार्यक्रम के दौरान हजरत हाफिज जमील अहमद नानकवी ने देहरादून के मौलाना मुफ्ती रईस कासमी और कारी सईद अहमद तिडफवी को इजाजत-ए-बैत से नवाजा।

मुख्य अतिथि मौलाना मुफ्ती रईस अहमद कासमी ने अपने बयान में हजरत शेख हाफिज अब्दुल सत्तार नानकवी रहमतुल्लाह अलैह की सादगी, तकवा, अखलाक और दीनदारी पर विस्तार से रोशनी डाली। उन्होंने कहा कि हजरत की जिंदगी लोगों के लिए एक मिसाल थी। उन्होंने बताया कि हजरत को शेख अब्दुल कादिर रायपुरी रहमतुल्लाह अलैह से बेहद मोहब्बत थी और उनकी रूहानी जिंदगी का असर आज भी लोगों के दिलों में मौजूद है।

मौलाना हबीबुल्लाह कासमी ने अल्लाह के जिक्र की अहमियत पर बयान देते हुए कहा कि जिक्र-ए-इलाही इंसान के दिलों को सुकून देता है और जिंदगी में बरकत लाता है। वहीं मुंबई मलाड से आए मौलाना मुफ्ती शाहिद कासमी ने कहा कि “अल्लाह से मजबूत रिश्ता ही इंसान की असली कामयाबी की कुंजी है।” उन्होंने युवाओं से दीन और इल्म के रास्ते पर चलने की अपील की।

मौलाना अतहर हक्कानी नदवी ने जिक्र की महफिलों के फायदे बताते हुए कहा कि इस तरह की रूहानी महफिलें समाज में सकारात्मक माहौल पैदा करती हैं और लोगों को बुराइयों से दूर रहने की प्रेरणा देती हैं।

कार्यक्रम के अंतिम चरण में सालाना परीक्षा और विभिन्न मुकाबला कार्यक्रमों में बेहतर प्रदर्शन करने वाले छात्र-छात्राओं को पुरस्कार देकर सम्मानित किया गया। बच्चों की हौसलाअफजाई के लिए उपस्थित लोगों ने तालियों के साथ उनका उत्साहवर्धन किया।

इस अवसर पर कारी मोहम्मद अशरफ, मौलाना सरवर आलम कासमी, मौलाना खालिद नदवी, मुफ्ती जियाुर्रहमान, उस्मान मलिक, हाजी गुल रहमान, कारी मतीउर्रहमान, मौलाना नवेद मजाहिरी, मास्टर तौसीफ, कारी फुरकान, कारी अशरफ, शफीकुर्रहमान, कारी अब्दुर्रहमान, कारी महमूद जुनैद मालिक, कारी आबिद, कारी सुलेमान, अजीम कामिल सहित बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे।

कार्यक्रम के समापन पर हाजी कारी सईद अहमद ने मुल्क में अमन, भाईचारा, तरक्की और उम्मत की भलाई के लिए विशेष दुआ कराई।

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