सहारनपुर में बिजली संकट के बीच बाजारों के समय निर्धारण की मांग तेज

सहारनपुर में बढ़ती गर्मी और बिजली संकट के बीच बाजारों को रात 8 बजे बंद और सुबह 10 बजे खोलने की मांग तेज हुई। नागरिकों ने बिजली बचत के लिए प्रशासन से समय निर्धारण लागू करने की अपील की।

शहरी चौपाल ब्यूरो 

सहारनपुर। भीषण गर्मी और लगातार गहराते बिजली संकट के बीच अब शहर में बाजारों के समय निर्धारण की मांग तेज हो गई है। सामाजिक संगठनों, व्यापार मंडलों और आम नागरिकों का कहना है कि यदि प्रशासन और नगर निगम बाजारों के खुलने और बंद होने का निश्चित समय तय कर दें तो बिजली की काफी बचत संभव हो सकती है। लोगों ने सुझाव दिया है कि बाजारों को सुबह 10 बजे खोला जाए और रात 8 बजे तक अनिवार्य रूप से बंद करा दिया जाए।

इन दिनों सहारनपुर सहित पूरे उत्तर प्रदेश में बिजली की भारी किल्लत देखने को मिल रही है। बढ़ती गर्मी के कारण बिजली की मांग लगातार बढ़ रही है, जिससे शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में बार-बार कटौती की समस्या सामने आ रही है। दिन और रात में हो रही अनियमित बिजली आपूर्ति से आम जनता, व्यापारी और उद्योग सभी प्रभावित हो रहे हैं। ऐसे में अब ऊर्जा संरक्षण को लेकर भी आवाज उठने लगी है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि देर रात तक खुले रहने वाले बाजारों, शोरूम, दुकानों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों में बड़ी मात्रा में बिजली की खपत होती है। बाजारों में देर रात तक जलने वाली हाईपावर लाइटें, एसी, कूलर, विज्ञापन बोर्ड और अन्य विद्युत उपकरण बिजली व्यवस्था पर अतिरिक्त दबाव बनाते हैं। यदि पूरे शहर में एक समान समय सीमा लागू की जाए तो अनावश्यक बिजली खपत को काफी हद तक रोका जा सकता है।

नागरिकों का मानना है कि सुबह के समय अपेक्षाकृत कम बिजली खपत होती है, जबकि दोपहर और शाम के समय घरेलू उपयोग बढ़ जाता है। ऐसे में बाजारों का समय निर्धारित करने से बिजली विभाग को भी लोड प्रबंधन में आसानी होगी और घरेलू उपभोक्ताओं को राहत मिल सकेगी। लोगों ने कहा कि आवश्यक सेवाओं को छोड़कर अन्य बाजारों के लिए समय सीमा तय करना वर्तमान परिस्थितियों में जरूरी कदम साबित हो सकता है।

व्यापारियों ने भी इस सुझाव का समर्थन करते हुए कहा कि यदि प्रशासन पूरे शहर में समान नियम लागू करता है तो किसी व्यापारी को नुकसान नहीं होगा। उनका कहना है कि एक समान समय निर्धारण से बाजार व्यवस्था बेहतर होगी और बिजली बचत अभियान को भी मजबूती मिलेगी। साथ ही रात में अनावश्यक भीड़भाड़ और फिजूल बिजली खर्च पर भी नियंत्रण पाया जा सकेगा।

शहर के जागरूक नागरिकों ने कहा कि बिजली बचत केवल सरकार या बिजली विभाग की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि इसमें आम जनता और व्यापारिक प्रतिष्ठानों की भागीदारी भी आवश्यक है। यदि समय रहते बिजली संरक्षण की दिशा में प्रभावी कदम नहीं उठाए गए तो आने वाले दिनों में बिजली संकट और गहरा सकता है।

लोगों ने जिला प्रशासन और नगर निगम से मांग की है कि बढ़ती गर्मी और बिजली संकट को देखते हुए बाजारों के संचालन के लिए समय निर्धारण की व्यवस्था लागू की जाए, ताकि बिजली बचत के साथ-साथ आम लोगों को राहत मिल सके।

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