मुख्यमंत्री योगी ने शाकंभरी बाढ़ त्रासदी की समीक्षा, कार्रवाई के संकेत

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शाकंभरी बाढ़ प्रभावित क्षेत्र का दौरा कर राहत कार्यों की समीक्षा की और लापरवाही पर सख्त कार्रवाई के संकेत दिए।

शहरी चौपाल ब्यूरो 

सहारनपुर। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सोमवार को सहारनपुर दौरे पर पहुंचे और सिद्धपीठ मां शाकंभरी देवी क्षेत्र में हाल ही में आई बाढ़ एवं सैलाब से प्रभावित इलाकों का स्थलीय निरीक्षण किया। मुख्यमंत्री ने आपदा प्रभावित क्षेत्रों का दौरा कर हालात का जायजा लिया, राहत एवं बचाव कार्यों की समीक्षा की और अधिकारियों को भविष्य में ऐसी घटनाओं से प्रभावी ढंग से निपटने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री का यह दौरा प्रशासनिक ही नहीं बल्कि जवाबदेही तय करने की दृष्टि से भी बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

मुख्यमंत्री के आगमन से पहले प्रशासनिक स्तर पर बड़ी कार्रवाई देखने को मिली। शाकंभरी मंदिर चौकी प्रभारी संजय कुमार को निलंबित कर दिया गया। आरोप है कि क्षेत्र में मौसम की गंभीर स्थिति और संभावित सैलाब की आशंका के बावजूद श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों को समय रहते पर्याप्त रूप से सतर्क नहीं किया गया। सुरक्षा एवं आपदा प्रबंधन में कथित लापरवाही को देखते हुए यह कार्रवाई की गई है। इस कदम को प्रशासनिक सख्ती के रूप में देखा जा रहा है।

गौरतलब है कि कुछ दिन पूर्व शाकंभरी क्षेत्र में हुई मूसलाधार बारिश और पहाड़ी क्षेत्रों से आए तेज जलप्रवाह ने भारी तबाही मचा दी थी। अचानक आए सैलाब की चपेट में कई वाहन बह गए थे, जबकि दो महिला श्रद्धालुओं की दर्दनाक मौत हो गई थी। इसके अलावा लाखों नहीं बल्कि करोड़ों रुपये की संपत्ति को नुकसान पहुंचा था। स्थानीय लोगों का आरोप है कि यदि समय रहते अलर्ट जारी किया जाता और सुरक्षा व्यवस्था मजबूत होती तो जान-माल के नुकसान को काफी हद तक रोका जा सकता था।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने दौरे के दौरान मंदिर परिसर, नदी तट, श्रद्धालु मार्ग, पार्किंग क्षेत्र और अन्य प्रभावित स्थलों का निरीक्षण किया। उन्होंने मौके पर मौजूद अधिकारियों से राहत कार्यों की प्रगति की जानकारी ली और प्रभावित परिवारों को हरसंभव सहायता उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने कहा कि आपदा प्रभावित लोगों को राहत पहुंचाने में किसी प्रकार की लापरवाही नहीं होनी चाहिए।

निरीक्षण के बाद मुख्यमंत्री ने अधिकारियों एवं जनप्रतिनिधियों के साथ समीक्षा बैठक की। बैठक में बाढ़ त्रासदी, राहत एवं पुनर्वास कार्य, कानून-व्यवस्था, विकास परियोजनाओं और जनसुविधाओं से जुड़े मुद्दों पर विस्तार से चर्चा हुई। मुख्यमंत्री ने संबंधित विभागों से पूरे घटनाक्रम की रिपोर्ट मांगी और भविष्य में ऐसी परिस्थितियों से निपटने के लिए ठोस कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए।

सूत्रों के अनुसार चौकी प्रभारी के निलंबन के बाद अन्य विभागों के कुछ अधिकारियों की भूमिका भी जांच के दायरे में आ गई है। माना जा रहा है कि जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे और प्रशासनिक कार्रवाई हो सकती है। प्रशासनिक सूत्रों का कहना है कि पूरे घटनाक्रम की गहन समीक्षा की जा रही है और जिम्मेदारी तय होने पर संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई से इंकार नहीं किया जा सकता।

मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि धार्मिक और पर्वतीय क्षेत्रों में मौसम संबंधी चेतावनी प्रणाली को और अधिक प्रभावी बनाया जाए। उन्होंने कहा कि श्रद्धालुओं की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है और किसी भी स्तर पर लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी। उन्होंने आपदा प्रबंधन से जुड़े विभागों को समन्वित रूप से कार्य करने और संवेदनशील क्षेत्रों में अतिरिक्त सतर्कता बरतने के निर्देश दिए।

मुख्यमंत्री के दौरे के दौरान प्रशासनिक अमले में विशेष सक्रियता दिखाई दी। मंडल और जिला स्तर के अधिकारी पूरे समय मौजूद रहे और राहत कार्यों की प्रगति से मुख्यमंत्री को अवगत कराते रहे। अधिकारियों ने बताया कि प्रभावित क्षेत्रों में सफाई, मार्ग बहाली, बिजली व्यवस्था और अन्य मूलभूत सुविधाओं को सामान्य करने का कार्य तेजी से चल रहा है।

स्थानीय लोगों और श्रद्धालुओं को मुख्यमंत्री के दौरे से राहत की उम्मीद जगी है। लोगों का मानना है कि मुख्यमंत्री के हस्तक्षेप के बाद राहत एवं पुनर्वास कार्यों में और तेजी आएगी तथा भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए प्रभावी कदम उठाए जाएंगे।

राजनीतिक और प्रशासनिक दोनों दृष्टियों से मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का यह दौरा महत्वपूर्ण माना जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस आपदा के बाद सरकार केवल राहत कार्यों तक सीमित नहीं रहना चाहती, बल्कि जवाबदेही तय कर भविष्य के लिए मजबूत आपदा प्रबंधन तंत्र विकसित करने की दिशा में भी गंभीरता से कार्य कर रही है। शाकंभरी क्षेत्र में हुई इस त्रासदी ने जहां प्रशासनिक तैयारियों पर सवाल खड़े किए हैं, वहीं मुख्यमंत्री के सख्त रुख ने यह संकेत भी दिया है कि लापरवाही बरतने वालों को बख्शा नहीं जाएगा।

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