शहरी चौपाल ब्यूरो
सहारनपुर। दिल्ली के एक होटल में हाल ही में हुई भीषण आग की घटना, जिसमें 20 से अधिक लोगों की जान चली गई, ने देशभर में अग्नि सुरक्षा व्यवस्था को लेकर नई बहस छेड़ दी है। इस हादसे ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या हमारे शहरों में सुरक्षा मानकों का पालन केवल कागजों तक सीमित रह गया है? दिल्ली की घटना के बाद सहारनपुर में भी होटलों, बैंक्विट हॉलों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों की सुरक्षा व्यवस्था चर्चा का विषय बनी हुई है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि पिछले तीन महीनों के दौरान सहारनपुर में एक होटल और दो बैंक्विट हॉलों में आग लगने की घटनाएं सामने आ चुकी हैं। हालांकि इन घटनाओं में बड़ी जनहानि नहीं हुई, लेकिन उन्होंने सुरक्षा व्यवस्थाओं की पोल अवश्य खोल दी। शहर में चर्चा है कि आग की घटनाओं के बावजूद व्यापक स्तर पर सुरक्षा ऑडिट और जांच अभियान नहीं चलाया गया।
जानकारों का कहना है कि किसी भी होटल, बैंक्विट हॉल या व्यावसायिक भवन में फायर सेफ्टी सिस्टम, आपातकालीन निकास मार्ग, अग्निशमन यंत्र, अलार्म सिस्टम और नियमित निरीक्षण बेहद आवश्यक हैं। लेकिन सवाल यह है कि क्या इन व्यवस्थाओं का वास्तविक रूप से पालन हो रहा है?
स्थानीय व्यापारिक और सामाजिक संगठनों का कहना है कि शहर में कई भवन ऐसे हैं जिनके निर्माण और संचालन को लेकर समय-समय पर सवाल उठते रहे हैं। कुछ स्थानों पर होटल और बैंक्विट हॉल के संचालन की प्रकृति को लेकर भी चर्चाएं होती रही हैं। सूत्रों के अनुसार कुछ प्रतिष्ठान होटल की अनुमति लेकर बैंक्विट हॉल जैसी गतिविधियां संचालित कर रहे हैं, जबकि कुछ स्थानों पर बैंक्विट हॉल की अनुमति के तहत होटलनुमा संचालन होने की चर्चाएं भी सुनने को मिलती हैं। हालांकि इन दावों की पुष्टि संबंधित विभागों द्वारा की जानी आवश्यक है।
पिछले दिनों आग की एक घटना के बाद प्रशासनिक कार्रवाई भी चर्चा में रही। बताया जाता है कि जिन प्रतिष्ठानों में आग की घटनाएं हुईं, उनमें से केवल एक बैंक्विट हॉल के खिलाफ ही प्रमुख कार्रवाई सामने आई। ऐसे में लोगों के बीच यह सवाल उठ रहा है कि यदि सुरक्षा मानकों में कहीं कमी थी तो अन्य प्रतिष्ठानों की भी समान रूप से जांच क्यों नहीं की गई।
विशेषज्ञों का मानना है कि अग्निकांड जैसी घटनाओं को केवल दुर्घटना मानकर भूल जाना उचित नहीं होगा। हर घटना भविष्य के लिए चेतावनी होती है। यदि समय रहते सुरक्षा मानकों की समीक्षा नहीं की गई तो किसी बड़े हादसे की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।
सहारनपुर विकास प्राधिकरण, अग्निशमन विभाग और स्थानीय प्रशासन की जिम्मेदारी है कि वे संयुक्त रूप से शहर के सभी होटलों, गेस्ट हाउसों, बैंक्विट हॉलों, शॉपिंग कॉम्प्लेक्सों और बहुमंजिला भवनों का विशेष अभियान चलाकर निरीक्षण करें। जिन प्रतिष्ठानों के पास आवश्यक स्वीकृतियां नहीं हैं या जहां सुरक्षा मानकों का पालन नहीं हो रहा है, उनके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए।
नागरिकों का भी मानना है कि सुरक्षा किसी एक विभाग की जिम्मेदारी नहीं है। आयोजकों, भवन मालिकों और आम लोगों को भी सुरक्षा नियमों के प्रति जागरूक होना होगा। किसी भी कार्यक्रम स्थल पर जाने से पहले सुरक्षा व्यवस्थाओं पर ध्यान देना आज की आवश्यकता बन गई है।
दिल्ली अग्निकांड ने देश को एक बार फिर चेताया है कि लापरवाही की कीमत जान देकर चुकानी पड़ सकती है। सहारनपुर में भी समय रहते व्यापक जांच, सुरक्षा ऑडिट और नियमों का सख्ती से पालन सुनिश्चित किया जाना चाहिए। सवाल केवल भवनों का नहीं, बल्कि हजारों लोगों की सुरक्षा का है।
अब देखने वाली बात यह होगी कि जिम्मेदार विभाग चेतावनी को गंभीरता से लेते हैं या फिर किसी बड़े हादसे के बाद कार्रवाई का सिलसिला शुरू होगा।








