शहरी चौपाल ब्यूरो
सहारनपुर। बाल श्रम जैसी सामाजिक कुरीति को समाप्त करने के लिए समाज के प्रत्येक वर्ग को अपनी जिम्मेदारी समझते हुए संवेदनशीलता और जागरूकता का परिचय देना होगा। यह बात उत्तर प्रदेश उद्योग व्यापार मंडल के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष एवं जिलाध्यक्ष शीतल टंडन ने बालश्रम निषेध दिवस की पूर्व संध्या पर आयोजित एक विशेष बैठक में कही।
रेलवे रोड स्थित जिला मुख्यालय कार्यालय पर आयोजित बैठक में व्यापार मंडल के पदाधिकारियों एवं व्यापारियों ने बाल श्रम उन्मूलन, बच्चों के अधिकारों और समाज की जिम्मेदारियों पर विस्तार से चर्चा की। बैठक का उद्देश्य बाल श्रम के खिलाफ जनजागरण अभियान को मजबूत करना तथा समाज को इस गंभीर समस्या के प्रति जागरूक करना था।
बैठक को संबोधित करते हुए शीतल टंडन ने कहा कि बाल श्रम केवल कानूनी या प्रशासनिक विषय नहीं है, बल्कि यह एक गंभीर सामाजिक चुनौती है। उन्होंने कहा कि आज भी अनेक बच्चे शिक्षा प्राप्त करने और खेलकूद में समय बिताने की उम्र में मजदूरी करने को मजबूर हैं। यह स्थिति किसी भी सभ्य समाज के लिए चिंताजनक है। उन्होंने कहा कि बाल श्रम बच्चों के बचपन, शिक्षा और उज्ज्वल भविष्य को प्रभावित करता है तथा समाज के विकास में भी बाधा उत्पन्न करता है।
उन्होंने कहा कि बालश्रम की समस्या को समाप्त करने का दायित्व केवल सरकार का नहीं है, बल्कि समाज के प्रत्येक व्यक्ति को इसके प्रति जागरूक होना होगा। घरों, ढाबों, होटलों और विभिन्न प्रतिष्ठानों पर कार्य कर रहे बच्चों की स्थिति को देखते हुए सभी को आत्ममंथन करने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि आर्थिक रूप से सक्षम लोगों को बाल श्रमिकों के स्थान पर वयस्क श्रमिकों को रोजगार देना चाहिए तथा बच्चों को शिक्षा के लिए प्रेरित करना चाहिए।
शीतल टंडन ने कहा कि छोटे-छोटे बच्चों के कंधों पर परिवार की जिम्मेदारियों का बोझ होना बेहद दुखद है। यदि समाज इस दिशा में सकारात्मक पहल करे तो हजारों बच्चों को श्रम के दुष्चक्र से निकालकर शिक्षा और बेहतर जीवन की ओर अग्रसर किया जा सकता है। उन्होंने सभी व्यापारियों एवं नागरिकों से बाल श्रम के विरुद्ध जागरूकता फैलाने और इसके उन्मूलन में सहयोग करने का आह्वान किया।
उन्होंने बताया कि इस संबंध में उनकी उप श्रमायुक्त सुविज्ञ सिंह से भी वार्ता हुई। उप श्रमायुक्त ने व्यापार मंडल द्वारा व्यापारियों की समस्याओं के साथ-साथ सामाजिक विषयों पर भी जागरूकता अभियान चलाने की सराहना की। उन्होंने कहा कि केंद्र और प्रदेश सरकार श्रमिकों के कल्याण के लिए अनेक योजनाएं संचालित कर रही हैं तथा विभिन्न संगठनों से प्राप्त सुझावों के आधार पर उन्हें और प्रभावी बनाया जा रहा है।
सुविज्ञ सिंह ने कहा कि बाल श्रम उन्मूलन केवल सरकारी प्रयासों से संभव नहीं है, बल्कि इसके लिए जनभागीदारी आवश्यक है। उन्होंने सभी नागरिकों से बालश्रम निषेध दिवस के अवसर पर बाल श्रम के खिलाफ जागरूकता फैलाने और बच्चों को शिक्षा से जोड़ने का संकल्प लेने का आह्वान किया।
बैठक में जिला महामंत्री रमेश अरोड़ा, जिला कोषाध्यक्ष कर्नल संजय मिड्ढा, मेजर एस.के. सूरी, पवन कुमार गोयल, रमेश डावर, राजीव अग्रवाल, मुरली खन्ना, संजीव सचदेवा, संजय महेश्वरी, संदीप सिंघल, अभिषेक भाटिया सहित बड़ी संख्या में व्यापारी एवं पदाधिकारी उपस्थित रहे।
बैठक के अंत में उपस्थित सभी लोगों ने बाल श्रम मुक्त समाज के निर्माण में सहयोग देने तथा बच्चों के अधिकारों की रक्षा के लिए जागरूकता अभियान चलाने का संकल्प लिया।








