देहरादून/नई दिल्ली। भारतीय खेल जगत के लिए शुक्रवार का दिन बेहद दुखद रहा। देश के महान निशानेबाज, प्रशिक्षक और पद्मश्री, अर्जुन पुरस्कार तथा द्रोणाचार्य पुरस्कार से सम्मानित जसपाल राणा का शुक्रवार सुबह निधन हो गया। वह 49 वर्ष के थे। पिछले 11 दिनों से नई दिल्ली के मैक्स साकेत अस्पताल में उनका उपचार चल रहा था। बताया जा रहा है कि जर्मनी से भारत लौटते समय फ्लाइट में उनकी तबीयत अचानक बिगड़ गई थी, जिसके बाद उन्हें तत्काल अस्पताल में भर्ती कराया गया था। उपचार के दौरान उन्होंने अंतिम सांस ली।
जसपाल राणा के निधन की खबर सामने आते ही पूरे खेल जगत में शोक की लहर दौड़ गई। भारतीय निशानेबाजी को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने वाले जसपाल राणा ने अपने करियर में अनेक राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय उपलब्धियां हासिल कीं। उनके निधन को भारतीय खेल इतिहास की एक अपूरणीय क्षति माना जा रहा है।
जानकारी के अनुसार उनका पार्थिव शरीर दिल्ली से सड़क मार्ग के जरिए देहरादून स्थित उनके आवास लाया जा रहा है। शनिवार को उनके पैतृक गांव बलचिलम, जिला टिहरी गढ़वाल में पूरे राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया जाएगा। उनके निधन पर देशभर के खिलाड़ियों, खेल संगठनों और राजनीतिक हस्तियों ने गहरा दुख व्यक्त किया है।
कॉमनवेल्थ और एशियाई खेलों में भारत के लिए 23 पदक जीतने वाले जसपाल राणा को भारतीय शूटिंग इतिहास के सबसे सफल खिलाड़ियों में गिना जाता है। उन्होंने अपने शानदार प्रदर्शन के दम पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत का गौरव बढ़ाया। उनकी असाधारण प्रतिभा का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि उन्हें मात्र 18 वर्ष की आयु में अर्जुन पुरस्कार से सम्मानित किया गया था। इसके बाद उन्हें पद्मश्री और द्रोणाचार्य पुरस्कार जैसे देश के प्रतिष्ठित सम्मानों से भी नवाजा गया।
जसपाल राणा केवल एक सफल खिलाड़ी ही नहीं बल्कि एक उत्कृष्ट प्रशिक्षक भी थे। उन्होंने भारतीय निशानेबाजी को नई पीढ़ी के प्रतिभाशाली खिलाड़ियों से जोड़ने का कार्य किया। पेरिस ओलंपिक में पदक जीतने वाली भारतीय निशानेबाज मनु भाकर सहित कई अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ियों को उन्होंने प्रशिक्षण दिया और उन्हें विश्वस्तरीय मंच तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी सहित अनेक नेताओं और खिलाड़ियों ने उनके निधन पर शोक व्यक्त किया है। सभी ने उन्हें भारतीय खेल जगत की अमूल्य धरोहर बताते हुए श्रद्धांजलि अर्पित की।
10 वर्ष की उम्र में शुरू हुआ था निशानेबाजी का सफर
जसपाल राणा का जन्म 28 जून 1976 को उत्तरकाशी में हुआ था। उनका मूल निवास टिहरी गढ़वाल क्षेत्र में था। उनके पिता नारायण सिंह राणा आईटीबीपी में वरिष्ठ अधिकारी रहे और बाद में उत्तराखंड के पहले खेल मंत्री भी बने। खेलों के प्रति परिवार के वातावरण का प्रभाव जसपाल पर बचपन से ही पड़ा। उनके पिता ने ही 10 वर्ष की आयु में पहली बार उन्हें पिस्टल थमाई थी, जिसके बाद उन्होंने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा।
उनकी बहन सुषमा सिंह और भाई सुभाष राणा भी राष्ट्रीय स्तर के निशानेबाज रहे। बचपन से ही शूटिंग के प्रति समर्पित जसपाल ने अपना अधिकांश समय अभ्यास में बिताया और कम उम्र में ही अपनी प्रतिभा का लोहा मनवा दिया।
12 वर्ष की उम्र में जीता पहला राष्ट्रीय पदक
वर्ष 1988 में अहमदाबाद में आयोजित राष्ट्रीय शूटिंग चैंपियनशिप में मात्र 12 वर्ष की आयु में उन्होंने रजत पदक जीतकर राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाई। इसके बाद उन्होंने लगातार सफलता की नई ऊंचाइयों को छुआ और भारतीय शूटिंग के सबसे बड़े नामों में शामिल हो गए।
जसपाल राणा का जीवन संघर्ष, अनुशासन, समर्पण और उत्कृष्टता का प्रतीक रहा। उनकी उपलब्धियां और खेल के प्रति समर्पण आने वाली पीढ़ियों को हमेशा प्रेरित करता रहेगा। भारतीय खेल जगत उन्हें हमेशा सम्मान और गर्व के साथ याद करेगा।








