शहरी चौपाल ब्यूरो
सहारनपुर। मानकमऊ स्थित गोगा म्हाड़ी परिसर एक बार फिर चर्चा के केंद्र में आ गया है। परिसर में स्थित गोरख गंगा सरोवर की पहचान, उसके नामकरण तथा धार्मिक स्वरूप को लेकर श्री गोगा म्हाड़ी सुधार सभा ने अपनी आपत्तियां दर्ज कराते हुए जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपा। सभा के पदाधिकारियों का कहना है कि यह स्थल लंबे समय से श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र रहा है और इसकी मूल धार्मिक पहचान को संरक्षित रखा जाना आवश्यक है।
शुक्रवार को सभा के पदाधिकारी जिलाधिकारी कार्यालय पहुंचे और अपनी विभिन्न मांगों से संबंधित ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में कहा गया कि गोगा म्हाड़ी परिसर स्थित प्राचीन सरोवर का पिछले वर्ष जीर्णोद्धार कराया गया था। संगठन के अनुसार मुख्यमंत्री द्वारा इसका उद्घाटन गोरख गंगा सरोवर के नाम से किया गया था, लेकिन बाद में इसे पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने के दौरान कपिल फन प्वाइंट नाम दिए जाने पर श्रद्धालुओं में असंतोष पैदा हुआ है।
सभा के अध्यक्ष चौधरी अनिल प्रताप सैनी ने कहा कि सरोवर केवल एक पर्यटन स्थल नहीं बल्कि धार्मिक महत्व से जुड़ा स्थान है। उनका मानना है कि नाम परिवर्तन से इसकी ऐतिहासिक और धार्मिक पहचान प्रभावित हो रही है। उन्होंने प्रशासन से मांग की कि सरोवर की मूल पहचान और उससे जुड़ी धार्मिक परंपराओं को सुरक्षित रखा जाए।
ज्ञापन में यह भी कहा गया कि गोगा म्हाड़ी परिसर क्षेत्र के श्रद्धालुओं के लिए विशेष आस्था का केंद्र है। संगठन के प्रतिनिधियों ने परिसर के वर्तमान प्रबंधन और वहां आने वाले लोगों को लेकर भी अपनी चिंताएं व्यक्त कीं। उनका कहना था कि धार्मिक वातावरण और परंपराओं की मर्यादा बनाए रखने के लिए प्रशासन को स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी करने चाहिए।
सभा से जुड़े विकास सैनी, विनोद कश्यप और चेतन दास ने कहा कि श्रद्धालुओं के बीच परिसर की वर्तमान स्थिति को लेकर लगातार चर्चा हो रही है। उनका मानना है कि धार्मिक स्थलों की मूल पहचान और गरिमा को बनाए रखने के लिए प्रशासन को संवेदनशील दृष्टिकोण अपनाना चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि धार्मिक स्थलों के स्वरूप में बदलाव की आशंका पैदा होती है तो इससे श्रद्धालुओं की भावनाएं प्रभावित होती हैं।
ज्ञापन सौंपने पहुंचे पदाधिकारियों ने प्रशासन से मांग की कि गोगा म्हाड़ी परिसर के संबंध में स्पष्ट नीति बनाई जाए और धार्मिक महत्व से जुड़े पहलुओं को प्राथमिकता दी जाए। साथ ही सरोवर के नामकरण से संबंधित विषय पर भी पुनर्विचार करने की मांग की गई।
संगठन के प्रतिनिधियों ने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर विचार नहीं किया गया तो वे आगे भी लोकतांत्रिक और शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात प्रशासन के समक्ष रखते रहेंगे। हालांकि इस पूरे मामले पर प्रशासन की ओर से तत्काल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
गौरतलब है कि गोगा म्हाड़ी परिसर लंबे समय से क्षेत्र के श्रद्धालुओं के लिए महत्वपूर्ण धार्मिक स्थल माना जाता है। ऐसे में इससे जुड़े किसी भी मुद्दे को स्थानीय लोग गंभीरता से देखते हैं। अब निगाहें प्रशासन के अगले कदम पर टिकी हैं कि ज्ञापन में उठाए गए बिंदुओं पर क्या निर्णय लिया जाता है।
इस दौरान श्री गोगा म्हाड़ी सुधार सभा के अनेक पदाधिकारी और सदस्य भी उपस्थित रहे।








