शहरी चौपाल ब्यूरो
सहारनपुर। नगर क्षेत्र की सब्जी मंडी से 62 फुटा रोड स्थित सिराज कॉलोनी और आसपास के इलाकों में उस समय अफरा-तफरी का माहौल बन गया, जब दतौली नहर से राजबाहे में बिना किसी पूर्व सूचना या चेतावनी के पानी छोड़ दिया गया। अचानक बढ़े जलस्तर के कारण सिराज कॉलोनी, सरकारी स्कूल के आसपास तथा परवेज की आरा मशीन के निकट स्थित रिहायशी और औद्योगिक क्षेत्रों में पानी भर गया, जिससे लोगों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ा।
स्थानीय निवासियों के अनुसार नहर में पानी छोड़े जाने की कोई पूर्व सूचना नहीं दी गई थी। परिणामस्वरूप लोग आवश्यक तैयारियां भी नहीं कर सके और देखते ही देखते पानी आबादी वाले क्षेत्रों में पहुंच गया। जलभराव के कारण कई गलियां और कच्चे मार्ग कीचड़ से भर गए, जिससे दैनिक जीवन प्रभावित हो गया है। क्षेत्र के लोगों को घरों से निकलने और आवश्यक कार्यों के लिए आने-जाने में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
क्षेत्रवासियों का कहना है कि सिराज कॉलोनी और आसपास के क्षेत्रों में पानी निकासी की कोई समुचित व्यवस्था नहीं है। इसी कारण राजबाहे में पानी बढ़ते ही उसका दबाव सीधे आबादी वाले इलाकों पर पड़ता है। लोगों का आरोप है कि संबंधित विभागों और प्रशासन को इस समस्या की जानकारी लंबे समय से है, लेकिन अब तक कोई स्थायी समाधान नहीं किया गया है।
स्थानीय नागरिकों ने बताया कि जलभराव के कारण कई लोग फिसलकर चोटिल भी हो चुके हैं। बच्चों, बुजुर्गों और महिलाओं को सबसे अधिक परेशानी उठानी पड़ रही है। कई स्थानों पर पानी जमा होने से संक्रामक बीमारियों के फैलने की आशंका भी बढ़ गई है। लोगों का कहना है कि अभी मानसून पूरी तरह शुरू भी नहीं हुआ है और बिना बारिश के ही ऐसी स्थिति उत्पन्न हो गई है। यदि आगामी दिनों में भारी वर्षा होती है तो हालात और अधिक गंभीर हो सकते हैं।
क्षेत्रवासियों ने आशंका व्यक्त की है कि यदि समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए तो बरसात के दौरान क्षेत्र में बाढ़ जैसी स्थिति उत्पन्न हो सकती है। उनका कहना है कि प्रशासन को इस समस्या को गंभीरता से लेते हुए तत्काल राहत और दीर्घकालिक समाधान की दिशा में कार्य करना चाहिए।
स्थानीय नागरिकों ने बाढ़ नियंत्रण विभाग और प्रशासनिक अधिकारियों पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए कहा कि दादा सैय्यद क्षेत्र के निकट पक्का बांध निर्माण तथा राजबाहे के दोनों ओर मजबूत सड़कों का निर्माण कराया जाना अत्यंत आवश्यक है। इससे जलभराव की समस्या को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है और भविष्य में संभावित बाढ़ के खतरे को भी कम किया जा सकेगा।
लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि सबसे पहले प्रभावित क्षेत्रों से जलनिकासी की समुचित व्यवस्था कराई जाए और मानसून से पहले स्थायी समाधान की दिशा में ठोस कदम उठाए जाएं। उनका कहना है कि यदि प्रशासन ने समय रहते ध्यान नहीं दिया तो किसी बड़ी दुर्घटना या जनहानि से भी इनकार नहीं किया जा सकता।
क्षेत्रवासियों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी समस्याओं का समाधान नहीं किया गया तो वे संबंधित विभागों और प्रशासन के खिलाफ आंदोलन करने को मजबूर होंगे। फिलहाल स्थानीय लोग प्रशासन की ओर उम्मीद भरी नजरों से देख रहे हैं और जल्द कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।








