पंजाबी संगठन का प्रदर्शन: खत्री-पंजाबी समाज को ‘रिफ्यूजी’ या ‘पाकिस्तानी’ कहने पर कानून बनाने की मांग

सहारनपुर में पंजाबी संगठन उत्तर प्रदेश ने प्रदर्शन कर प्रधानमंत्री को संबोधित ज्ञापन सौंपा। संगठन ने खत्री-पंजाबी समाज को रिफ्यूजी, शरणार्थी या पाकिस्तानी कहकर संबोधित करने पर रोक लगाने और इसके खिलाफ कानून बनाने की मांग की।

शहरी चौपाल ब्यूरो 

सहारनपुर। पंजाबी संगठन उत्तर प्रदेश के नेतृत्व में मंगलवार को अरोड़ा-खत्री पंजाबी समाज के लोगों ने जिला मुख्यालय पर प्रदर्शन कर समाज के सम्मान और पहचान से जुड़े मुद्दों को उठाया। संगठन के प्रांतीय उपाध्यक्ष एवं जिला अध्यक्ष राधेश्याम नारंग के नेतृत्व में बड़ी संख्या में समाज के लोग जिला मुख्यालय पहुंचे और प्रधानमंत्री को संबोधित ज्ञापन नगर मजिस्ट्रेट को सौंपा।

ज्ञापन के माध्यम से मांग की गई कि अरोड़ा-खत्री पंजाबी समाज के लोगों को ‘रिफ्यूजी’, ‘शरणार्थी’ अथवा ‘पाकिस्तानी’ कहकर संबोधित किए जाने पर तत्काल प्रभाव से रोक लगाई जाए तथा इस संबंध में कठोर कानून बनाया जाए। संगठन का कहना है कि इस प्रकार की टिप्पणियां समाज की भावनाओं को आहत करती हैं और देश के लिए उनके पूर्वजों द्वारा दिए गए योगदान का अपमान हैं।

प्रदर्शन को संबोधित करते हुए राधेश्याम नारंग ने कहा कि वर्ष 1947 के विभाजन के दौरान पश्चिमी पंजाब से आए लाखों परिवारों ने अपना घर, जमीन-जायदाद, कारोबार और सामाजिक पहचान छोड़कर भारत को चुना था। उन्होंने देश के विकास और राष्ट्र निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। ऐसे में उन्हें रिफ्यूजी या पाकिस्तानी कहना न केवल वर्तमान पीढ़ी का बल्कि उन पूर्वजों के त्याग और बलिदान का भी अपमान है, जिन्होंने कठिन परिस्थितियों में भारत को अपना सर्वस्व समर्पित किया।

उन्होंने कहा कि पंजाबी समाज हमेशा राष्ट्रहित, सामाजिक सेवा और आर्थिक विकास में अग्रणी भूमिका निभाता रहा है। देश के विभिन्न क्षेत्रों में समाज के लोगों ने उद्योग, व्यापार, शिक्षा, चिकित्सा और समाज सेवा के माध्यम से अपनी विशिष्ट पहचान बनाई है। इसके बावजूद कुछ लोग समाज के प्रति अपमानजनक शब्दों का प्रयोग कर सामाजिक सौहार्द को प्रभावित करने का प्रयास करते हैं, जिसे किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं किया जाएगा।

संगठन के पदाधिकारियों ने कहा कि सरकार को ऐसे मामलों को गंभीरता से लेते हुए स्पष्ट कानूनी प्रावधान करना चाहिए ताकि किसी भी नागरिक या समुदाय की गरिमा को ठेस न पहुंचे। उन्होंने मांग की कि यदि कोई व्यक्ति पंजाबी समाज के लिए रिफ्यूजी, शरणार्थी या पाकिस्तानी जैसे शब्दों का प्रयोग करता है तो उसके खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई का प्रावधान किया जाए।

इस अवसर पर राजकुमार नरूला, कपिल मल्होत्रा, खैराती लाल अरोड़ा, कृष्ण लाल मिड्ढा, मुकेश मनचंदा, मदन लाल नारंग, नवीन मक्कड़, कृष्ण लाल गुंबर, राजकिरण कत्याल, रमेश सुखीजा, अमित राज सेठी, सुभाष सचदेवा, तरुण बत्रा, रमेश गुंबर, अशोक अरोड़ा, अविनाश जैन, पंकुल जैन, कृष्ण लाल गुप्ता, सतीश पसरीचा, दीपक खन्ना, संगम अरोड़ा, मोहित पसरीचा, सागर सोनी, परमजीत वालिया, प्रमोद आहूजा, पूरण फुटेला, गौरव भसीन, आशीष सचदेवा, आशु मलिक, अशोका सहगल, शुभम अरोड़ा, जगदीश पपनेजा, संजय तिवारी, सुभाष धमीजा, राजीव फुटेला, त्रिलोक चावला, हरीश अरोड़ा, मतिश्वर चांदना, विनोद अनेजा तथा कपिल बजाज सहित बड़ी संख्या में समाज के गणमान्य लोग उपस्थित रहे।

प्रदर्शन के दौरान समाज के लोगों ने एक स्वर में कहा कि पंजाबी समाज की अस्मिता और सम्मान से कोई समझौता नहीं किया जाएगा तथा आवश्यकता पड़ने पर इस मुद्दे को व्यापक स्तर पर भी उठाया जाएगा।

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