शहरी चौपाल ब्यूरो
सहारनपुर। लखनऊ के एक कोचिंग सेंटर में हुए भीषण अग्निकांड में छात्रों की दुखद मृत्यु के बाद नेशनल यूनियन ऑफ जर्नलिस्ट्स (एनयूजे) उत्तर प्रदेश, सहारनपुर इकाई के जिलाध्यक्ष मनोज मिड्ढा ने गहरा शोक व्यक्त करते हुए कहा है कि ऐसी घटनाएं केवल संवेदना व्यक्त करने का विषय नहीं हैं, बल्कि उनसे सबक लेकर भविष्य के लिए सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत बनाने की आवश्यकता है।
जारी बयान में मनोज मिड्ढा ने कहा कि लखनऊ की घटना ने पूरे प्रदेश को झकझोर कर रख दिया है। इस प्रकार की दुर्घटनाएं हमें यह सोचने पर मजबूर करती हैं कि सार्वजनिक स्थलों, शैक्षणिक संस्थानों और भीड़भाड़ वाले व्यावसायिक परिसरों में सुरक्षा मानकों की नियमित समीक्षा कितनी आवश्यक है। उन्होंने कहा कि सहारनपुर में भी बड़ी संख्या में कोचिंग सेंटर, जिम, बैंक्वेट हॉल, होटल, मार्केट कॉम्प्लेक्स और व्यावसायिक प्रतिष्ठान संचालित हो रहे हैं, जहां प्रतिदिन हजारों लोग आते-जाते हैं।
उन्होंने सुझाव दिया कि प्रशासन, अग्निशमन विभाग और संबंधित विभागों द्वारा समय-समय पर ऐसे संस्थानों का निरीक्षण किया जाना चाहिए, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि वहां आपातकालीन निकास, अग्निशमन यंत्र, विद्युत सुरक्षा व्यवस्था और अन्य आवश्यक सुरक्षा मानक पूरी तरह उपलब्ध हों। इससे न केवल लोगों में सुरक्षा के प्रति जागरूकता बढ़ेगी बल्कि किसी भी संभावित दुर्घटना की स्थिति में जनहानि को भी रोका जा सकेगा।
मनोज मिड्ढा ने कहा कि कई शिक्षण संस्थान, जिम और कार्यालय बहुमंजिला भवनों में संचालित हो रहे हैं। ऐसे स्थानों पर आने-जाने के मार्ग, सीढ़ियों की चौड़ाई, अग्निशमन उपकरणों की उपलब्धता और आपदा प्रबंधन की तैयारियों की समीक्षा समय-समय पर होना जनहित में आवश्यक है। उन्होंने कहा कि यह किसी एक विभाग की नहीं बल्कि सामूहिक जिम्मेदारी है, जिसमें भवन स्वामी, संस्थान संचालक, प्रशासन और आम नागरिक सभी की भूमिका महत्वपूर्ण है।
उन्होंने हाल के वर्षों में विभिन्न स्थानों पर हुई आग की घटनाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि समय रहते सतर्कता बरतना ही सबसे बड़ी सुरक्षा है। यदि सुरक्षा मानकों का नियमित परीक्षण और जनजागरूकता अभियान चलाए जाएं तो संभावित हादसों को काफी हद तक रोका जा सकता है।
मनोज मिड्ढा ने कहा कि सहारनपुर प्रशासन और अग्निशमन विभाग लगातार जनहित में कार्य कर रहे हैं तथा इस दिशा में और व्यापक स्तर पर जागरूकता अभियान चलाने की आवश्यकता है। उन्होंने सुझाव दिया कि कोचिंग सेंटरों, जिम, होटल, बैंक्वेट हॉल, कपड़ा बाजारों, होजरी मार्केट, इलेक्ट्रॉनिक बाजारों तथा अन्य भीड़भाड़ वाले क्षेत्रों में समय-समय पर सुरक्षा ऑडिट कराया जाए और आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए जाएं।
उन्होंने कहा कि लखनऊ जैसी दुखद घटना दोबारा कहीं भी न हो, इसके लिए सभी को मिलकर प्रयास करना होगा। सुरक्षा केवल सरकारी जिम्मेदारी नहीं बल्कि सामाजिक दायित्व भी है। यदि समय रहते आवश्यक सावधानियां अपनाई जाएं तो अनेक अनहोनी घटनाओं को टाला जा सकता है।
अंत में उन्होंने लखनऊ अग्निकांड में दिवंगत छात्र-छात्राओं को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए शोक संतप्त परिवारों के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त की तथा ईश्वर से दिवंगत आत्माओं की शांति की प्रार्थना की।








