हेमकुंड साहिब यात्रा विवाद पर सहारनपुर में सिख समाज का प्रदर्शन, निष्पक्ष जांच और दोषियों पर कार्रवाई की मांग

हेमकुंड साहिब यात्रा पर जा रहे निहंग सिखों के साथ कथित मारपीट और धार्मिक प्रतीकों के अपमान के विरोध में सहारनपुर के सिख समाज ने जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपकर निष्पक्ष जांच और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग की।

 

शहरी चौपाल ब्यूरो 

सहारनपुर। उत्तराखंड में हेमकुंड साहिब यात्रा पर जा रहे निहंग सिखों के साथ कथित मारपीट और धार्मिक प्रतीकों के अपमान की घटना को लेकर सहारनपुर में सिख समाज ने गहरा आक्रोश व्यक्त किया है। श्री गुरु सिंह सभा के नेतृत्व में विभिन्न गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटियों और सिख संगठनों के प्रतिनिधियों ने एकजुट होकर घटना की निष्पक्ष जांच तथा दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की मांग की।

सोमवार को आयोजित बैठक में सिख समाज के प्रमुख पदाधिकारियों और सामाजिक संगठनों ने घटना पर गंभीर चिंता व्यक्त की। वक्ताओं ने कहा कि हेमकुंड साहिब जैसे पवित्र तीर्थस्थल की यात्रा पर जा रहे श्रद्धालुओं के साथ किसी भी प्रकार की अभद्रता या हिंसक व्यवहार न केवल दुर्भाग्यपूर्ण है, बल्कि धार्मिक सद्भाव और सामाजिक सौहार्द के लिए भी चिंताजनक है।

बैठक के बाद सिख समुदाय का एक प्रतिनिधिमंडल जिलाधिकारी कार्यालय पहुंचा और राष्ट्रपति के नाम संबोधित ज्ञापन जिलाधिकारी को सौंपा। ज्ञापन में मांग की गई कि पूरे मामले की निष्पक्ष एवं पारदर्शी जांच कराई जाए तथा दोषियों के खिलाफ कानून के अनुसार सख्त कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।

सिख समाज के प्रतिनिधियों ने कहा कि 11 जून को पार्किंग विवाद के दौरान कुछ स्थानीय लोगों द्वारा हेमकुंड साहिब यात्रा पर जा रहे निहंग सिखों के साथ कथित रूप से मारपीट की गई। साथ ही उनकी पगड़ी, कृपाण और केशों का भी अपमान किया गया, जिससे सिख समुदाय की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंची है। उन्होंने कहा कि इस तरह की घटनाएं किसी भी सभ्य समाज में स्वीकार्य नहीं हो सकतीं।

प्रतिनिधिमंडल ने यह भी चिंता जताई कि मामले में अब तक हुई कार्रवाई को लेकर समाज के लोगों में असंतोष है। उनका कहना था कि जांच निष्पक्ष और तथ्यों के आधार पर होनी चाहिए ताकि किसी भी पक्ष के साथ अन्याय न हो और वास्तविक दोषियों की पहचान कर उचित कार्रवाई की जा सके।

सिख समाज के नेताओं ने हेमकुंड साहिब यात्रा पर जाने वाले श्रद्धालुओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग करते हुए कहा कि यात्रा मार्गों पर पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि धार्मिक यात्राओं के दौरान श्रद्धालुओं को सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराना प्रशासन की जिम्मेदारी है।

ज्ञापन की प्रतियां राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के मुख्यमंत्री सहित संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों को भी भेजी गई हैं। इसमें मांग की गई है कि घटना की उच्चस्तरीय जांच कर दोषियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की जाए तथा भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए प्रभावी कदम उठाए जाएं।

सिख समाज के प्रतिनिधियों ने कहा कि उनका उद्देश्य किसी प्रकार का टकराव नहीं बल्कि न्याय और धार्मिक सम्मान की रक्षा है। उन्होंने उम्मीद जताई कि प्रशासन मामले को गंभीरता से लेते हुए निष्पक्ष कार्रवाई करेगा। साथ ही चेतावनी दी कि यदि समयबद्ध और न्यायपूर्ण कार्रवाई नहीं हुई तो समाज को व्यापक स्तर पर लोकतांत्रिक तरीके से आंदोलन करने के लिए विवश होना पड़ सकता है।

बैठक और ज्ञापन कार्यक्रम में सिख समाज के अनेक वरिष्ठ पदाधिकारी, गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटियों के सदस्य तथा बड़ी संख्या में समुदाय के लोग उपस्थित रहे। सभी ने एक स्वर में धार्मिक सौहार्द बनाए रखने और दोषियों के खिलाफ निष्पक्ष कार्रवाई की मांग दोहराई।

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