शहरी चौपाल ब्यूरो
सहारनपुर। लोकतंत्र सेनानी कल्याण परिषद ने आपातकाल की वर्षगांठ पर लोकतंत्र सेनानियों को स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के समान सम्मान और सुविधाएं प्रदान किए जाने की मांग उठाई। परिषद के पदाधिकारियों ने प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री को संबोधित ज्ञापन जिलाधिकारी को सौंपते हुए लोकतंत्र की रक्षा के लिए संघर्ष करने वाले सेनानियों को उचित सम्मान देने की अपील की।
गुरुवार को जिला मुख्यालय पर आयोजित कार्यक्रम में लोकतंत्र सेनानी कल्याण परिषद के जिला संयोजक आचार्य राजेंद्र अटल, जिला अध्यक्ष बलदेव राज जोशी तथा प्रवक्ता निसार सिद्दीकी के नेतृत्व में लोकतंत्र सेनानी एकत्रित हुए। इस दौरान वर्ष 1975 में लगाए गए आपातकाल को लोकतांत्रिक मूल्यों पर आघात बताते हुए उस दौर में लोकतंत्र की रक्षा के लिए संघर्ष करने वाले सेनानियों को याद किया गया और दिवंगत लोकतंत्र सेनानियों को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की गई।
कार्यक्रम में वक्ताओं ने कहा कि आपातकाल भारतीय लोकतंत्र के इतिहास का एक महत्वपूर्ण अध्याय है, जिसने नागरिक अधिकारों और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के महत्व को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र की रक्षा के लिए संघर्ष करने वाले हजारों लोगों ने जेल यात्राएं कीं और अनेक कठिनाइयों का सामना किया। ऐसे लोकतंत्र सेनानियों को स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों की भांति सम्मान मिलना चाहिए।
इसके बाद परिषद का एक प्रतिनिधिमंडल जिलाधिकारी अरविंद कुमार चौहान से मिला और उन्हें प्रधानमंत्री तथा मुख्यमंत्री के नाम संबोधित ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में मांग की गई कि लोकतंत्र सेनानियों को फ्रीडम फाइटर एक्ट के अंतर्गत मान्यता प्रदान करते हुए उन्हें ताम्रपत्र, गोल्डन आयुष्मान कार्ड, रेलवे यात्रा सुविधा तथा अन्य सम्मानजनक सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं।
परिषद के पदाधिकारियों ने यह भी कहा कि पिछले कई वर्षों से लोकतंत्र सेनानियों को दी जाने वाली सम्मान राशि में कोई वृद्धि नहीं हुई है। वर्तमान परिस्थितियों को देखते हुए सम्मान राशि बढ़ाने के साथ-साथ लोकतंत्र सेनानियों की स्मृति में स्मारकों का निर्माण कराया जाना चाहिए। उन्होंने मांग की कि आपातकाल और उसके विरुद्ध हुए संघर्ष को शैक्षणिक पाठ्यक्रम में शामिल किया जाए, ताकि नई पीढ़ी लोकतंत्र की रक्षा के महत्व को समझ सके।
वक्ताओं ने कहा कि आपातकाल के दौरान लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा के लिए अनेक सामाजिक और वैचारिक संगठनों के कार्यकर्ताओं ने भूमिगत रहकर संघर्ष किया। ऐसे सभी दिवंगत और जीवित लोकतंत्र सेनानियों को सरकार द्वारा सम्मानित किया जाना चाहिए। उनका मानना है कि लोकतंत्र की मजबूती के लिए ऐसे संघर्षों का इतिहास आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचना आवश्यक है।
ज्ञापन सौंपने वालों में गीता राम, सुरेश, सुभाष चंद्र, मोहम्मद यूसुफ, राजकुमार, अनवर खान, अहमद जमाल, रशीद अहमद, प्रेम सिंह भंडारी, अशोक मित्तल, जमाल गौरी, तहसीन अहमद, डॉ. फैजान, शौकत सहित बड़ी संख्या में लोकतंत्र सेनानी और समर्थक मौजूद रहे।
लोकतंत्र सेनानी कल्याण परिषद ने उम्मीद जताई कि केंद्र और राज्य सरकार लोकतंत्र की रक्षा के लिए संघर्ष करने वाले सेनानियों की भावनाओं का सम्मान करते हुए उनकी मांगों पर सकारात्मक निर्णय लेगी।








