शहरी चौपाल ब्यूरो
सहारनपुर । सहारनपुर शहर में घरों, होटलों, रेस्टोरेंट और दुकानों तक कैंपरों के माध्यम से सप्लाई किए जा रहे मिनरल वाटर की गुणवत्ता को लेकर गंभीर सवाल खड़े होने लगे हैं। शहर के कई क्षेत्रों में संचालित वाटर प्लांटों पर बिना आवश्यक अनुमति, बिना गुणवत्ता परीक्षण और निर्धारित मानकों का पालन किए बिना पेयजल बेचने के आरोप सामने आ रहे हैं। ऐसे में लोगों की सेहत पर संभावित खतरे को लेकर चिंता बढ़ गई है।
गर्मी के मौसम में हजारों लोग दुकानों, होटलों और सार्वजनिक स्थानों पर रखे कैंपर का पानी पीते हैं, लेकिन अधिकांश उपभोक्ताओं को यह जानकारी नहीं होती कि यह पानी किस गुणवत्ता का है, इसकी नियमित लैब जांच होती है या नहीं और संबंधित प्लांटों के पास आवश्यक सरकारी स्वीकृतियां मौजूद हैं या नहीं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि शहर में कई वाटर प्लांट आवासीय मकानों से ही संचालित किए जा रहे हैं। ऐसे प्लांटों के पास नगर निगम का व्यापार लाइसेंस, खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआई) का लाइसेंस, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की अनुमति तथा अन्य आवश्यक विभागीय स्वीकृतियों की स्थिति स्पष्ट नहीं है। साथ ही यह भी सवाल उठ रहा है कि क्या इन इकाइयों में पानी की गुणवत्ता की समय-समय पर अधिकृत प्रयोगशालाओं से जांच कराई जाती है।
सूत्रों के अनुसार कुछ स्थानों पर घरेलू बिजली कनेक्शन और घरेलू परिसर से ही व्यावसायिक स्तर पर पानी का कारोबार संचालित किया जा रहा है। यदि ऐसा है तो यह संबंधित नियमों का उल्लंघन हो सकता है। इसके अलावा भूजल दोहन, स्वच्छता व्यवस्था और पानी के शुद्धिकरण की प्रक्रिया भी जांच का विषय है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि यदि पेयजल निर्धारित मानकों के अनुरूप शुद्ध न हो तो उससे पेट संबंधी संक्रमण, टाइफाइड, डायरिया और अन्य जलजनित बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है। इसलिए पेयजल की गुणवत्ता सुनिश्चित करना प्रशासन और संबंधित विभागों की प्राथमिक जिम्मेदारी है।
शहरवासियों ने जिलाधिकारी, नगर निगम, उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, विद्युत विभाग, खाद्य सुरक्षा विभाग तथा अन्य संबंधित एजेंसियों से मांग की है कि जिले में संचालित सभी मिनरल वाटर प्लांटों का संयुक्त निरीक्षण कराया जाए। निरीक्षण के दौरान लाइसेंस, पानी की गुणवत्ता, प्रयोगशाला परीक्षण, स्वच्छता व्यवस्था, बिजली कनेक्शन और अन्य वैधानिक दस्तावेजों की जांच की जाए। जिन इकाइयों के पास आवश्यक अनुमति या गुणवत्ता प्रमाणन नहीं है, उनके विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
लोगों का कहना है कि पेयजल सीधे जनस्वास्थ्य से जुड़ा विषय है। ऐसे में प्रशासन को समय-समय पर निरीक्षण अभियान चलाकर यह सुनिश्चित करना चाहिए कि शहर में बिक रहा पानी वास्तव में सुरक्षित और मानकों के अनुरूप है।








