शहरी चौपाल ब्यूरो
सहारनपुर। शहर में सोमवार दोपहर हुई करीब आधे घंटे की मूसलाधार बारिश ने नगर निगम की मानसून तैयारियों की वास्तविक तस्वीर सामने ला दी। बरसात शुरू होने से पहले नालों की सफाई, जलनिकासी व्यवस्था दुरुस्त करने और जलभराव से मुक्ति के बड़े-बड़े दावे किए गए थे, लेकिन पहली ही तेज बारिश में ये दावे धराशायी होते नजर आए। सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि नगर निगम कार्यालय परिसर और उसके मुख्य प्रवेश द्वार पर ही पानी भर गया, जिससे निगम की व्यवस्थाओं पर सवाल खड़े हो गए।
बारिश के दौरान शहर के अनेक प्रमुख बाजारों, मोहल्लों और मुख्य सड़कों पर जलभराव की स्थिति बन गई। कई स्थानों पर सड़कें तालाब जैसी दिखाई दीं और लोगों को आवागमन में भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। दोपहिया वाहन चालकों को पानी से भरी सड़कों पर जोखिम उठाकर गुजरना पड़ा, जबकि कई जगह वाहनों की रफ्तार भी धीमी पड़ गई।
नगर निगम हर वर्ष मानसून से पहले करोड़ों रुपये खर्च कर नालों की सफाई और जल निकासी व्यवस्था मजबूत करने का दावा करता है। इसके बावजूद पहली ही तेज बारिश में नगर निगम का अपना परिसर जलमग्न हो जाना तैयारियों की पोल खोलने के लिए काफी माना जा रहा है। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यदि अभी यह स्थिति है तो लगातार बारिश होने पर हालात और भी गंभीर हो सकते हैं। कई क्षेत्रों में घरों, दुकानों और सरकारी कार्यालयों तक पानी पहुंचने की आशंका बनी हुई है।
बारिश के साथ तेज आंधी भी चली, जिसके कारण शहर के कई इलाकों में बिजली आपूर्ति बाधित हो गई। कई घंटों तक बिजली गुल रहने से लोगों को उमस और असुविधा का सामना करना पड़ा। बिजली विभाग की टीमें आपूर्ति बहाल करने में जुटी रहीं, लेकिन कई क्षेत्रों में देर शाम तक समस्या बनी रही।
हालांकि भीषण गर्मी और उमस से परेशान लोगों को बारिश ने राहत जरूर दी। मौसम अचानक सुहावना हो गया और तापमान में गिरावट दर्ज की गई। बच्चों ने भी बारिश का भरपूर आनंद उठाया। कई बच्चे घरों की छतों और सड़कों पर जमा वर्षा जल में नहाते और खेलते नजर आए। पार्कों और गलियों में भी बच्चों की चहल-पहल देखने को मिली।
शहरवासियों का कहना है कि स्मार्ट सिटी की योजनाओं के बावजूद जलभराव की समस्या हर वर्ष दोहराई जाती है। लोगों ने नगर निगम प्रशासन से मांग की है कि केवल कागजी दावों के बजाय स्थायी जलनिकासी व्यवस्था विकसित की जाए, ताकि प्रत्येक मानसून में शहरवासियों को होने वाली परेशानी से निजात मिल सके। विशेषज्ञों का भी मानना है कि नालों की समयबद्ध सफाई, ड्रेनेज सिस्टम के विस्तार और नियमित निगरानी के बिना इस समस्या का स्थायी समाधान संभव नहीं है।
यदि आगामी दिनों में लगातार बारिश होती है तो शहर के कई निचले इलाकों में जलभराव और यातायात बाधित होने की स्थिति और गंभीर हो सकती है। ऐसे में नगर निगम और संबंधित विभागों की तैयारियों की असली परीक्षा अब शुरू हो गई है।








