सहारनपुर में किसान यूनियन का प्रदर्शन: गन्ना भुगतान, खाद संकट, स्मार्ट मीटर और निजी स्कूल फीस पर प्रशासन को सौंपा ज्ञापन

सहारनपुर में किसान यूनियन ने गन्ना भुगतान, खाद-बीज की उपलब्धता, स्मार्ट मीटर, नकली कीटनाशकों और निजी स्कूलों की फीस वृद्धि के विरोध में जिला प्रशासन को ज्ञापन सौंपा। किसानों ने सरकार से त्वरित समाधान की मांग की।

शहरी चौपाल ब्यूरो 

सहारनपुर: किसानों की लंबित समस्याओं के समाधान की मांग को लेकर किसान यूनियन ने सोमवार को जिला मुख्यालय पर प्रदर्शन करते हुए जिला प्रशासन को ज्ञापन सौंपा। संगठन के जिला अध्यक्ष अमित राणा के नेतृत्व में पहुंचे किसानों ने गन्ना भुगतान, खाद-बीज की उपलब्धता, स्मार्ट मीटर, नकली कीटनाशक दवाओं, टोल प्लाजा और निजी स्कूलों की मनमानी फीस जैसे अहम मुद्दों पर सरकार से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की।

किसानों ने कहा कि प्रदेश में गन्ना किसानों का भुगतान समय पर नहीं हो रहा है, जिससे खेती-किसानी के साथ-साथ परिवार का भरण-पोषण भी प्रभावित हो रहा है। उन्होंने मांग की कि चीनी मिलों को निर्देश देकर किसानों का बकाया गन्ना भुगतान शीघ्र कराया जाए, ताकि किसान आगामी फसलों की तैयारी समय पर कर सकें।

ज्ञापन में किसानों ने खाद संकट का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया। उनका कहना था कि वर्तमान समय में यूरिया, डीएपी और एनपीके जैसी आवश्यक उर्वरकों की पर्याप्त उपलब्धता नहीं होने से किसानों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। कई स्थानों पर किसानों को खाद के लिए लंबी कतारों में लगना पड़ रहा है, जिससे खेती का कार्य प्रभावित हो रहा है।

किसान यूनियन ने स्मार्ट बिजली मीटरों का भी विरोध करते हुए कहा कि इनके लगने के बाद बिजली बिलों में अप्रत्याशित वृद्धि हुई है। किसानों का आरोप है कि रिचार्ज समाप्त होने पर बिना किसी पूर्व सूचना के बिजली आपूर्ति बंद कर दी जाती है, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में गंभीर समस्याएं उत्पन्न हो रही हैं। संगठन ने सरकार से स्मार्ट मीटर लगाने के निर्णय पर पुनर्विचार करने की मांग की।

ज्ञापन में नकली कीटनाशक दवाओं की बिक्री पर रोक लगाने की भी मांग की गई। किसानों का कहना है कि बाजार में नकली कृषि उत्पादों की बिक्री से फसलें प्रभावित हो रही हैं और किसानों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। उन्होंने ऐसे कारोबारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की।

किसानों ने निजी स्कूलों द्वारा मनमाने ढंग से फीस वसूले जाने का मुद्दा भी उठाया। उनका कहना था कि अवकाश के दौरान भी पूरी फीस वसूली जा रही है, जिससे अभिभावकों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ रहा है। संगठन ने सरकार से निजी स्कूलों की फीस व्यवस्था पर प्रभावी नियंत्रण सुनिश्चित करने की मांग की।

किसान यूनियन ने चेतावनी दी कि यदि किसानों की समस्याओं का शीघ्र समाधान नहीं किया गया तो संगठन व्यापक आंदोलन शुरू करने के लिए बाध्य होगा। किसानों ने कहा कि कृषि और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए सरकार को किसानों की समस्याओं का प्राथमिकता के आधार पर समाधान करना चाहिए।

ज्ञापन सौंपने के दौरान राव अखलाख, शाकिर, रविंद्र राणा, सतीश राणा, रिजवान, बाबू अली सहित किसान यूनियन के अनेक पदाधिकारी और सदस्य मौजूद रहे।

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