शहरी चौपाल ब्यूरो
सहारनपुर। कलेक्ट्रेट परिसर स्थित मस्जिद को लेकर नगर मजिस्ट्रेट की अदालत के आदेश के बाद सहारनपुर में राजनीतिक सरगर्मियां लगातार तेज होती जा रही हैं। एक ओर मस्जिद प्रबंधन और कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने फैसले को उच्च न्यायालय में चुनौती देने की बात कही है, वहीं दूसरी ओर मामले के शिकायतकर्ता एवं बजरंग दल के पूर्व प्रांत संयोजक विकास त्यागी ने प्रशासन से न्यायालय के आदेश का समयबद्ध पालन सुनिश्चित कराने की मांग की है।
शुक्रवार को कलेक्ट्रेट परिसर पहुंचे विकास त्यागी ने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि यह मामला लंबे समय तक न्यायालय में विचाराधीन रहा और सभी पक्षों को अपना पक्ष रखने का पूरा अवसर दिया गया। अदालत ने उपलब्ध अभिलेखों और प्रस्तुत साक्ष्यों के आधार पर निर्णय दिया है, इसलिए अब उस आदेश का सम्मान करते हुए उसका पालन कराया जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि न्यायालय ने संबंधित पक्ष को 30 दिन का समय दिया है। यदि निर्धारित अवधि के भीतर अवैध निर्माण नहीं हटाया जाता है तो प्रशासन को न्यायालय के आदेश के अनुरूप कार्रवाई करते हुए बुलडोजर चलाकर सरकारी भूमि को कब्जामुक्त कराना चाहिए। उनका कहना था कि सरकारी भूमि पर किसी भी प्रकार का अवैध कब्जा कानून की दृष्टि में स्वीकार्य नहीं होना चाहिए।
विकास त्यागी ने कहा कि कानून सभी नागरिकों के लिए समान है और न्यायालय के आदेशों का पालन कराना प्रशासन का दायित्व है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यदि किसी पक्ष को आदेश पर आपत्ति है तो उसे उच्च न्यायालय में जाने का संवैधानिक अधिकार है, लेकिन जब तक किसी सक्षम न्यायालय से स्थगन आदेश प्राप्त नहीं होता, तब तक निचली अदालत के आदेश का अनुपालन होना चाहिए।
उन्होंने लोगों से अपील करते हुए कहा कि इस पूरे मामले को धार्मिक नजरिये से देखने के बजाय कानून और सरकारी संपत्ति की सुरक्षा के दृष्टिकोण से देखा जाना चाहिए। प्रशासन को निष्पक्ष, पारदर्शी और बिना किसी दबाव के कार्रवाई करनी चाहिए, ताकि न्याय व्यवस्था और कानून के शासन पर आमजन का विश्वास बना रहे।
गौरतलब है कि नगर मजिस्ट्रेट की अदालत ने कलेक्ट्रेट परिसर स्थित मस्जिद को सरकारी भूमि पर अवैध निर्माण मानते हुए 30 दिन के भीतर हटाने के आदेश दिए हैं। साथ ही सरकारी भूमि के उपयोग के संबंध में क्षतिपूर्ति वसूली के भी निर्देश दिए गए हैं। आदेश के बाद प्रशासन ने मस्जिद पर नोटिस चस्पा कर दिया है। दूसरी ओर मस्जिद प्रबंधन और कांग्रेस सांसद इमरान मसूद इस फैसले को उच्च न्यायालय में चुनौती देने की घोषणा कर चुके हैं।
ऐसे में कलेक्ट्रेट मस्जिद प्रकरण अब केवल कानूनी विवाद नहीं रह गया है, बल्कि सहारनपुर की राजनीति का भी प्रमुख मुद्दा बनता जा रहा है। अब सबकी नजरें इस बात पर टिकी हैं कि निर्धारित समय सीमा के भीतर प्रशासन क्या कदम उठाता है और उच्च न्यायालय में इस मामले की सुनवाई किस दिशा में आगे बढ़ती है।








