शहरी चौपाल ब्यूरो
बेहट (सहारनपुर)( दैनिक शहरी चौपाल ) । तहसील बेहट क्षेत्र में बंदरों का बढ़ता आतंक अब लोगों की जान पर भारी पड़ने लगा है। शनिवार को सलेमपुर गदा गांव में बंदरों के झुंड ने एक बुजुर्ग महिला पर अचानक हमला कर दिया, जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गईं। घटना के बाद पूरे गांव में दहशत का माहौल है। ग्रामीणों ने वन विभाग और प्रशासन से तत्काल प्रभावी कार्रवाई करते हुए बंदरों के आतंक से स्थायी राहत दिलाने की मांग की है।
जानकारी के अनुसार, कोतवाली बेहट क्षेत्र के गांव सलेमपुर गदा निवासी करीब 70 वर्षीय संतोष देवी, पत्नी फौजी चमनलाल सैनी, शनिवार को घर के बाहर अकेली थीं। इसी दौरान बंदरों का एक झुंड अचानक उन पर टूट पड़ा। बंदरों ने महिला को बुरी तरह नोच लिया, जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गईं। उनकी चीख-पुकार सुनकर आसपास के ग्रामीण मौके पर पहुंचे और किसी तरह बंदरों को भगाकर महिला को उनके चंगुल से छुड़ाया।
घटना के तुरंत बाद परिजन घायल महिला को एक निजी चिकित्सक के पास ले गए, जहां उनका प्राथमिक उपचार किया गया। चिकित्सकों के अनुसार महिला के शरीर पर कई जगह गहरे घाव हैं और उनकी हालत गंभीर बनी हुई है।
ग्रामीणों का कहना है कि गांव और आसपास के इलाकों में बंदरों का आतंक कोई नई बात नहीं है। पिछले काफी समय से बंदरों के झुंड लगातार लोगों पर हमला कर रहे हैं। विशेष रूप से महिलाएं, बच्चे और बुजुर्ग इनके आसान निशाने बन रहे हैं। कई लोग पहले भी बंदरों के हमलों में घायल हो चुके हैं, लेकिन अब तक समस्या का कोई स्थायी समाधान नहीं निकाला गया है।
ग्रामीणों ने बताया कि बंदर केवल लोगों पर हमला ही नहीं कर रहे, बल्कि किसानों की मेहनत पर भी पानी फेर रहे हैं। आम, लीची, सब्जियों और अन्य फसलों को भारी नुकसान पहुंचाया जा रहा है, जिससे किसानों को आर्थिक क्षति उठानी पड़ रही है। खेतों और बागों में बंदरों की बढ़ती संख्या के कारण खेती करना भी मुश्किल होता जा रहा है।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि वन विभाग समय-समय पर कार्रवाई और बंदरों को पकड़ने के दावे करता है, लेकिन जमीनी स्तर पर कोई ठोस परिणाम दिखाई नहीं देता। लगातार बढ़ती बंदरों की संख्या और उनका आक्रामक व्यवहार ग्रामीणों के लिए गंभीर समस्या बन चुका है।
ग्रामीणों ने प्रशासन और वन विभाग से मांग की है कि क्षेत्र में विशेष अभियान चलाकर खूंखार बंदरों को पकड़कर सुरक्षित स्थानों पर स्थानांतरित किया जाए, ताकि लोगों को राहत मिल सके। उनका कहना है कि यदि शीघ्र प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई तो क्षेत्र के लोग आंदोलन करने के लिए मजबूर होंगे।
ग्रामीणों का कहना है कि मानव और वन्यजीवों के बीच बढ़ते संघर्ष को रोकने के लिए दीर्घकालिक योजना बनाना समय की आवश्यकता है। साथ ही संवेदनशील गांवों में नियमित निगरानी और त्वरित राहत व्यवस्था भी सुनिश्चित की जानी चाहिए, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।








