मनोज मिड्ढा
सहारनपुर (दैनिक शहरी चौपाल) । ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एआईएमआईएम) के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने शनिवार को सहारनपुर के चिलकाना रोड स्थित जनसभा में प्रदेश और देश की राजनीति पर कई बड़े बयान दिए। उन्होंने भाजपा को हराने के लिए विपक्षी दलों के साथ गठबंधन की इच्छा जताते हुए कहा कि यदि उद्देश्य भाजपा को रोकना है तो उनकी पार्टी सहयोग के लिए तैयार है। साथ ही उन्होंने भाजपा, कांग्रेस और समाजवादी पार्टी पर भी तीखे राजनीतिक हमले किए।
ओवैसी ने कहा कि अक्सर उनकी पार्टी को सांप्रदायिक बताने की कोशिश की जाती है, जबकि उनकी राजनीति किसी समुदाय के खिलाफ नहीं बल्कि संविधान और न्याय के पक्ष में है। उन्होंने कहा कि यदि अन्य राजनीतिक दल वास्तव में भाजपा को रोकना चाहते हैं तो एआईएमआईएम गठबंधन पर विचार करने के लिए तैयार है।
‘हम फिरकापरस्त नहीं, इंसाफपरस्त हैं’
अपने संबोधन में ओवैसी ने कहा कि यदि अत्याचार और अन्याय के खिलाफ आवाज उठाना सांप्रदायिकता है तो वह ऐसी आवाज हमेशा उठाते रहेंगे। उन्होंने कहा कि उनकी राजनीति इंसाफ की राजनीति है। उन्होंने कहा कि जो समाज अपना नेतृत्व तैयार करता है और लोकतांत्रिक रूप से अपनी राजनीतिक भागीदारी सुनिश्चित करता है, वही अपने अधिकारों की रक्षा कर पाता है।
उन्होंने कांग्रेस और समाजवादी पार्टी पर भी निशाना साधते हुए कहा कि लंबे समय तक सत्ता में रहने के बावजूद मुस्लिम समाज की शिक्षा, रोजगार और सामाजिक स्थिति में अपेक्षित सुधार नहीं हुआ। उन्होंने दावा किया कि सबसे अधिक बेरोजगारी आज भी अल्पसंख्यक समाज में देखने को मिलती है।
कलेक्ट्रेट मस्जिद विवाद पर उठाए सवाल
ओवैसी ने सहारनपुर के कलेक्ट्रेट परिसर स्थित मस्जिद विवाद का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि मस्जिद वर्ष 1955 से उत्तर प्रदेश सुन्नी वक्फ बोर्ड में पंजीकृत है और कई दशकों से वहां नमाज अदा की जा रही है।
उन्होंने कहा कि सरकार किस कानूनी आधार पर मस्जिद हटाने का आदेश दे रही है, यह स्पष्ट होना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि इस विषय में उनकी पार्टी संवैधानिक और कानूनी प्रक्रिया के दायरे में रहकर अपनी बात रखेगी। ओवैसी ने सर्वोच्च न्यायालय के “वक्फ बाय यूजर” सिद्धांत का भी उल्लेख करते हुए कहा कि पुराने मामलों में इस सिद्धांत का महत्व रहा है।
जौहर यूनिवर्सिटी पर भी सरकार को घेरा
जनसभा से पहले मीडिया से बातचीत में ओवैसी ने रामपुर स्थित जौहर यूनिवर्सिटी के मुद्दे पर भी सरकार को घेरा। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश में उच्च शिक्षा प्राप्त करने वाले मुस्लिम युवाओं का प्रतिशत बेहद कम है और जौहर यूनिवर्सिटी जैसे संस्थानों को बंद करने या कमजोर करने के बजाय नियमित करने पर विचार होना चाहिए।
उन्होंने कहा कि हजारों छात्रों का भविष्य इस संस्थान से जुड़ा है। यदि निर्माण या प्रशासनिक स्तर पर कोई कमी है तो उसका समाधान कानूनी प्रक्रिया से किया जाना चाहिए। उन्होंने सहारनपुर की ग्लोकल यूनिवर्सिटी का भी जिक्र करते हुए क्षेत्र में उच्च शिक्षा की स्थिति पर चिंता जताई।
राम मंदिर चढ़ावा प्रकरण पर भी उठाए सवाल
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर निशाना साधते हुए ओवैसी ने राम मंदिर में कथित चढ़ावा व्यवस्था और स्कैनिंग सिस्टम से जुड़े मुद्दे का उल्लेख किया। उन्होंने आरोप लगाया कि व्यवस्था में पारदर्शिता बनाए रखने की आवश्यकता है और इस मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।
लकड़ी उद्योग और रोजगार का मुद्दा भी उठाया
ओवैसी ने कहा कि सहारनपुर कभी अपनी विश्व प्रसिद्ध लकड़ी की नक्काशी के लिए जाना जाता था, लेकिन आज यह उद्योग कमजोर पड़ता जा रहा है। उन्होंने दावा किया कि बड़ी संख्या में कारीगर दूसरे राज्यों की ओर पलायन कर चुके हैं। उन्होंने सरकार से स्थानीय उद्योगों और रोजगार को बढ़ावा देने की मांग की।
जनसभा में उमड़ी भारी भीड़
ओवैसी की जनसभा में बड़ी संख्या में समर्थक पहुंचे। शाम से ही लोग सभा स्थल पर जुटने लगे थे। उनके मंच पर पहुंचते ही कार्यकर्ताओं ने जोरदार नारेबाजी की और मोबाइल की टॉर्च जलाकर उनका स्वागत किया। कई समर्थक उत्साह में मंच पर चढ़ गए, जिससे मंच पर लगा एक माइक क्षतिग्रस्त हो गया। बाद में दूसरा माइक लगाया गया और संबोधन शुरू हुआ।
सभा के दौरान कुछ समय के लिए भीड़ नियंत्रण में कठिनाई हुई। पुलिस ने स्थिति संभालते हुए व्यवस्था सामान्य कराई।
जनसभा के बाद लगा जाम
कार्यक्रम समाप्त होने के बाद चिलकाना रोड पर वाहनों का भारी दबाव देखने को मिला। बड़ी संख्या में लोग एक साथ बाहर निकलने से सड़क पर लंबा जाम लग गया। पुलिस ने यातायात को नियंत्रित कर देर रात तक स्थिति सामान्य कराई।
ओवैसी की यह जनसभा आगामी राजनीतिक समीकरणों के लिहाज से महत्वपूर्ण मानी जा रही है। भाजपा के खिलाफ विपक्षी एकजुटता, कलेक्ट्रेट मस्जिद विवाद और जौहर यूनिवर्सिटी जैसे मुद्दों पर दिए गए उनके बयान आने वाले दिनों में प्रदेश की राजनीति में चर्चा का विषय बने रह सकते हैं।








