श्रीकांत शर्मा
गागलहेड़ी (सहारनपुर)। श्रावण मास की कांवड़ यात्रा अपने चरम पर है और हरिद्वार से गंगाजल लेकर लौट रहे शिवभक्त अपनी कठिन साधना और अटूट आस्था से लोगों का ध्यान आकर्षित कर रहे हैं। गागलहेड़ी स्थित कांवड़ यात्रा मार्ग पर हरियाणा के पंचकूला से आए श्रद्धालुओं की टोली विशेष आकर्षण का केंद्र बनी रही। दण्डवत करते हुए यात्रा पूरी कर रहे पिता-पुत्र और उनकी सेवा में जुटी माता को देखकर राहगीरों ने उनकी श्रद्धा और समर्पण की सराहना की।

पंचकूला के पिंजौर क्षेत्र निवासी 53 वर्षीय जीत सिंह अपने परिवार के साथ हरिद्वार से गंगाजल लेकर लौट रहे हैं। मजदूरी कर परिवार का पालन-पोषण करने वाले जीत सिंह के साथ उनकी पत्नी सरोज, 13 वर्षीय पुत्र राजीव और 11 वर्षीय पुत्र ओमकुमार भी यात्रा में शामिल हैं। राजीव और ओमकुमार क्रमशः कक्षा नौ और सात के छात्र हैं, लेकिन कम उम्र के बावजूद दोनों दण्डवत करते हुए यात्रा पूरी कर रहे हैं। उनकी माता सरोज पूरे मार्ग में उनका सहयोग कर रही हैं। श्रद्धालुओं का यह समर्पण देखकर मार्ग से गुजरने वाले लोग उनकी हौसला अफजाई करते नजर आए।
वहीं पंचकूला के सूरजपुर गांव से आए श्रद्धालु रोहित और ललित 121 लीटर गंगाजल की विशाल कलश कांवड़ लेकर अपने गांव की ओर लौट रहे हैं। उनके साथ अजय 81 लीटर, दिलखुश 51 लीटर तथा कल्लू 41 लीटर गंगाजल की कलश कांवड़ लेकर यात्रा कर रहे हैं। भारी भरकम गंगाजल के साथ पैदल यात्रा करते इन शिवभक्तों की आस्था ने हर किसी को प्रभावित किया।
रोहित और ललित ने बताया कि यह उनकी तीसरी कांवड़ यात्रा है। उन्होंने कहा कि भगवान शिव की कृपा और आशीर्वाद से हर वर्ष हरिद्वार से गंगाजल लाने का सौभाग्य मिलता है। इस बार भी वे शिव चतुर्दशी के अवसर पर अपने गांव के शिव मंदिर में विधि-विधान के साथ भगवान भोलेनाथ का जलाभिषेक करेंगे।
श्रावण मास में कांवड़ यात्रा मार्ग पूरी तरह शिवमय दिखाई दे रहा है। “बम-बम भोले” और “हर-हर महादेव” के जयघोष से वातावरण भक्तिमय बना हुआ है। प्रशासन द्वारा सुरक्षा और सुविधाओं के व्यापक इंतजाम किए गए हैं, वहीं विभिन्न सामाजिक संस्थाओं द्वारा जगह-जगह शिविर लगाकर कांवड़ियों की सेवा की जा रही है।
कांवड़ यात्रा केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक नहीं, बल्कि अनुशासन, सेवा, समर्पण और आत्मविश्वास का भी संदेश देती है। दण्डवत यात्रा कर रहे बच्चों और 121 लीटर गंगाजल लेकर लौट रहे श्रद्धालुओं ने यह साबित कर दिया कि सच्ची श्रद्धा के आगे कठिन से कठिन मार्ग भी आसान हो जाता है।








