शहरी चौपाल ब्यूरो
गागलहेगागलहेसहारनपुर) दैनिक शहरी चौपाल। सहारनपुर के गागलहेड़ी क्षेत्र स्थित हरोड़ा गांव की एएलएम मीट फैक्ट्री में अमोनिया गैस रिसाव की घटना के बाद चार महिला मजदूरों की हालत अब भी गंभीर बनी हुई है। उनका उपचार हरी हॉस्पिटल के आईसीयू में जारी है। वहीं उपचार के बाद छुट्टी दी गई एक महिला मजदूर की देर रात तबीयत बिगड़ने पर उसे दोबारा अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा। घटना को गंभीरता से लेते हुए जिलाधिकारी अरविंद कुमार चौहान ने जांच पूरी होने तक फैक्ट्री के स्लॉटर हाउस को सील करने के निर्देश दिए हैं।
मंगलवार दोपहर करीब 1:30 बजे फैक्ट्री के पैकिंग सेक्शन में अचानक अमोनिया गैस का रिसाव हो गया। उस समय वहां कार्यरत 14 महिला मजदूर गैस की चपेट में आ गईं। गैस का प्रभाव इतना तेज था कि कई महिलाओं को सांस लेने में परेशानी, चक्कर और घबराहट होने लगी, जबकि कुछ महिलाएं बेहोश होकर जमीन पर गिर पड़ीं। घटना के बाद फैक्ट्री परिसर में अफरा-तफरी का माहौल बन गया और कामकाज भी प्रभावित हुआ।
सभी प्रभावित महिला मजदूरों को बाद में गागलहेड़ी स्थित हरी हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया। अस्पताल सूत्रों के अनुसार मंगलवार शाम 10 महिलाओं को प्राथमिक उपचार के बाद छुट्टी दे दी गई थी, लेकिन देर रात महिला मजदूर मिस्बाह की तबीयत अचानक बिगड़ने पर उसे दोबारा इमरजेंसी वार्ड में भर्ती करना पड़ा। वहीं निशा, समरीन, अमरीन और नगमा की हालत गंभीर होने के कारण उनका उपचार आईसीयू में जारी है। चिकित्सकों की टीम लगातार उनकी निगरानी कर रही है।
घटना की सूचना मिलते ही जिलाधिकारी अरविंद कुमार चौहान, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक अभिनंदन सिंह, एसपी सिटी व्योम बिंदल, एसडीएम सदर सुबोध कुमार, सीओ सदर विकास प्रताप सिंह चौहान सहित प्रशासनिक एवं पुलिस अधिकारी अस्पताल पहुंचे। अधिकारियों ने घायल महिलाओं का हालचाल जाना और चिकित्सकों से उपचार की जानकारी ली।
जिलाधिकारी ने घटना को गंभीर मानते हुए तत्काल जांच के आदेश दिए और स्पष्ट निर्देश दिए कि जांच पूरी होने तक स्लॉटर हाउस का संचालन बंद रखा जाए। इसके बाद उप जिलाधिकारी सदर सुबोध कुमार ने मंगलवार रात फैक्ट्री के स्लॉटर हाउस को सील कर दिया। प्रशासन ने संबंधित विभागों को गैस रिसाव के कारणों, सुरक्षा व्यवस्था और संचालन संबंधी सभी पहलुओं की विस्तृत जांच करने के निर्देश दिए हैं।
प्रबंधन पर उठे गंभीर सवाल
घटना के बाद फैक्ट्री प्रबंधन की कार्यशैली पर भी सवाल उठने लगे हैं। प्रत्यक्षदर्शियों का आरोप है कि गैस रिसाव के बाद प्रबंधन ने करीब दो घंटे तक मामले को दबाने का प्रयास किया और घायल मजदूरों को समय पर अस्पताल नहीं पहुंचाया। स्थानीय लोगों का कहना है कि जब कुछ महिलाओं की हालत लगातार बिगड़ने लगी, तब उन्हें अस्पताल भेजा गया। हालांकि इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है और प्रशासन ने पूरे मामले की जांच शुरू कर दी है।
प्रशासन का कहना है कि यदि जांच में सुरक्षा मानकों की अनदेखी, लापरवाही या किसी प्रकार की नियमों की अवहेलना सामने आती है तो जिम्मेदार अधिकारियों एवं प्रबंधन के खिलाफ नियमानुसार कड़ी कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल स्लॉटर हाउस को सील कर दिया गया है और जांच रिपोर्ट आने तक वहां किसी भी प्रकार की गतिविधि पर रोक रहेगी।
इस घटना ने औद्योगिक इकाइयों में सुरक्षा मानकों और आपदा प्रबंधन की तैयारियों को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। श्रमिक संगठनों और स्थानीय लोगों का कहना है कि फैक्ट्रियों में नियमित सुरक्षा ऑडिट, गैस रिसाव रोकने की व्यवस्था, आपातकालीन चिकित्सा सुविधा और कर्मचारियों के लिए सुरक्षा प्रशिक्षण को अनिवार्य बनाया जाना चाहिए, ताकि भविष्य में इस प्रकार की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।








