शहरी चौपाल ब्यूरो
सहारनपुर , दैनिक शहरी चौपाल। गागलहेड़ी क्षेत्र में संचालित ए.एल.एम. मीट फैक्ट्री को लेकर एक बार फिर विवाद गहरा गया है। बजरंग दल के पश्चिम उत्तर प्रदेश के पूर्व प्रांत संयोजक विकास त्यागी ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पत्र भेजकर फैक्ट्री में कथित गैस रिसाव, भूजल प्रदूषण और पर्यावरणीय नियमों के उल्लंघन के आरोपों की उच्चस्तरीय जांच कराने तथा दोषियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की मांग की है। पत्र की प्रतिलिपि मंडलायुक्त सहारनपुर को भी भेजी गई है।
विकास त्यागी ने अपने पत्र में कहा है कि हाल ही में फैक्ट्री में गैस रिसाव की घटना हुई, जिसकी चपेट में आने से कई श्रमिक प्रभावित हुए और उन्हें उपचार के लिए अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा। उन्होंने आरोप लगाया कि यह घटना सुरक्षा मानकों की अनदेखी और फैक्ट्री प्रबंधन की लापरवाही का परिणाम है।
पत्र में यह भी आरोप लगाया गया है कि फैक्ट्री से निकलने वाला केमिकल युक्त अपशिष्ट बिना उचित शोधन के काली नदी में छोड़ा जा रहा है। साथ ही अवैध बोरिंग के माध्यम से जहरीले अपशिष्ट को भूगर्भ में प्रवाहित किए जाने का भी आरोप लगाया गया है, जिससे आसपास के क्षेत्रों के भूजल स्रोत प्रभावित हो रहे हैं।
विकास त्यागी का कहना है कि गागलहेड़ी एवं आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में दूषित जल के कारण लोगों को पेयजल संकट का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि क्षेत्र में गंभीर बीमारियों का खतरा भी बढ़ रहा है। हालांकि इन स्वास्थ्य संबंधी दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
उन्होंने यह भी कहा कि फैक्ट्री के खिलाफ पूर्व में भी कई शिकायतें संबंधित विभागों को दी जा चुकी हैं, लेकिन अब तक प्रभावी कार्रवाई नहीं होने से लोगों में नाराजगी है। उनका आरोप है कि कार्रवाई के अभाव में फैक्ट्री संचालकों के हौसले बढ़े हुए हैं।
मुख्यमंत्री को भेजे गए पत्र में मांग की गई है कि पूरे प्रकरण की किसी सक्षम एजेंसी से निष्पक्ष एवं उच्चस्तरीय जांच कराई जाए। यदि जांच में पर्यावरणीय नियमों का उल्लंघन, अवैध बोरिंग, प्रदूषण फैलाने या सुरक्षा मानकों की अनदेखी के आरोप सही पाए जाते हैं तो फैक्ट्री का लाइसेंस निरस्त कर संबंधित प्रबंधकों और संचालकों के विरुद्ध सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए।

साथ ही गैस रिसाव से प्रभावित श्रमिकों को समुचित उपचार एवं आवश्यक सहायता उपलब्ध कराने तथा क्षेत्र के भूजल और पर्यावरण की सुरक्षा के लिए प्रभावी कदम उठाने की भी मांग की गई है।
इस संबंध में फैक्ट्री प्रबंधन या संबंधित सरकारी विभाग की ओर से समाचार लिखे जाने तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई थी।








