शहरी चौपाल ब्यूरो
सहारनपुर , दैनिक शहरी चौपाल। जिले के चर्चित कलक्ट्रेट मस्जिद प्रकरण में जिला जज की अदालत में गुरुवार को महत्वपूर्ण सुनवाई हुई। मामले में मस्जिद पक्ष और शासकीय पक्ष ने अपने-अपने तर्क एवं दस्तावेज अदालत के समक्ष प्रस्तुत किए। विस्तृत बहस के बाद अदालत ने सुनवाई को आगे बढ़ाते हुए शुक्रवार को भी मामले की सुनवाई जारी रखने का निर्णय लिया है।
गुरुवार को हुई सुनवाई के दौरान मस्जिद पक्ष की ओर से अधिवक्ता मोहम्मद तारीक सिद्दीकी ने सिटी मजिस्ट्रेट की अदालत द्वारा पारित आदेश पर रोक (स्टे) लगाने की मांग करते हुए कई कानूनी और तथ्यात्मक बिंदु न्यायालय के समक्ष रखे। उन्होंने कहा कि नगर मजिस्ट्रेट द्वारा पारित आदेश के विरुद्ध विधि सम्मत अपील जिला जज की अदालत में दायर की गई है, जिसे पूर्व में सुनवाई योग्य मानते हुए स्वीकार कर लिया गया था।
अधिवक्ता ने बताया कि सुनवाई के दौरान मस्जिद से संबंधित विभिन्न अभिलेख, दस्तावेज और स्वामित्व से जुड़े रिकॉर्ड अदालत के समक्ष प्रस्तुत किए गए। उनका कहना था कि इन दस्तावेजों के आधार पर सिटी मजिस्ट्रेट के आदेश की वैधानिकता पर गंभीर प्रश्न उठते हैं, इसलिए अंतिम निर्णय तक आदेश पर रोक लगाया जाना न्यायोचित होगा।
वहीं, शासकीय पक्ष की ओर से सरकारी अधिवक्ता ने भी अदालत में अपना पक्ष रखते हुए संबंधित अभिलेखों और तथ्यों का उल्लेख किया। उन्होंने कुछ अतिरिक्त दस्तावेज दाखिल करने के लिए अदालत से समय की मांग की। अदालत ने इस अनुरोध को स्वीकार करते हुए आवश्यक दस्तावेज प्रस्तुत करने की अनुमति प्रदान कर दी।
गौरतलब है कि 16 जुलाई 2026 को सिटी मजिस्ट्रेट की अदालत ने कलक्ट्रेट मस्जिद को अवैध घोषित करते हुए संबंधित पक्ष पर 6.41 करोड़ रुपये का जुर्माना भी लगाया था। इस आदेश के खिलाफ मस्जिद पक्ष ने जिला जज की अदालत में अपील दायर की है। मामला संवेदनशील होने के कारण इस पर सभी पक्षों की नजर बनी हुई है।

गुरुवार को हुई सुनवाई के दौरान अदालत में दोनों पक्षों ने विस्तार से अपने-अपने तर्क रखे। मस्जिद पक्ष ने आदेश की वैधता पर सवाल उठाते हुए स्टे की मांग दोहराई, जबकि शासकीय अधिवक्ता ने प्रशासनिक कार्रवाई को नियमों के अनुरूप बताते हुए अपने पक्ष का समर्थन किया।
अब इस मामले में शुक्रवार को भी सुनवाई होगी, जिसमें शासकीय पक्ष द्वारा अतिरिक्त दस्तावेज अदालत के समक्ष प्रस्तुत किए जाने की संभावना है। इसके बाद अदालत मामले की अगली प्रक्रिया पर निर्णय ले सकती है। फिलहाल अदालत ने किसी प्रकार का अंतिम आदेश पारित नहीं किया है और मामला विचाराधीन है।
जिले में यह मामला लंबे समय से चर्चा का विषय बना हुआ है। कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि आगामी सुनवाई में दोनों पक्षों के दस्तावेज और दलीलें मामले की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं। फिलहाल सभी की निगाहें जिला जज की अदालत में होने वाली अगली सुनवाई पर टिकी हुई हैं।








