शहरी चौपाल ब्यूरो
सहारनपुर। उत्तर प्रदेश सरकार सहारनपुर मंडल को धार्मिक और सांस्कृतिक पर्यटन के प्रमुख केंद्र के रूप में विकसित करने की दिशा में तेजी से कार्य कर रही है। इसी क्रम में शुक्रवार को प्रदेश के पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने सर्किट हाउस सभागार में पर्यटन, संस्कृति एवं धर्मार्थ कार्य विभाग की प्रस्तावित और निर्माणाधीन परियोजनाओं की विस्तृत समीक्षा की। उन्होंने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि सभी निर्माणाधीन कार्य नवंबर 2026 तक गुणवत्ता के साथ हर हाल में पूरे किए जाएं, ताकि श्रद्धालुओं और पर्यटकों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराई जा सकें।
बैठक में सहारनपुर, मुजफ्फरनगर और शामली जनपदों से जुड़े धार्मिक एवं पर्यटन स्थलों के विकास पर विस्तार से चर्चा हुई। वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए पर्यटन विभाग के 14 प्रस्तावों की समीक्षा की गई, जिनमें सहारनपुर के 8, मुजफ्फरनगर के 5 और शामली का एक प्रस्ताव शामिल है। लगभग 22 करोड़ रुपये की इन परियोजनाओं के तहत मंदिर परिसरों में बहुउद्देशीय हॉल, आधुनिक प्रकाश व्यवस्था, पेयजल सुविधा, शौचालय, साइनेज, क्यूआर कोड, पर्यटक विश्राम स्थल, लैंडस्केपिंग और अन्य मूलभूत सुविधाओं का विकास किया जाएगा।
बैठक में शाकुंभरी देवी शक्तिपीठ के विकास कार्यों को विशेष प्राथमिकता दी गई। मंत्री ने श्रद्धालुओं के लिए अधिक आध्यात्मिक वातावरण तैयार करने के उद्देश्य से शक्तिपीठ मार्ग पर भक्ति संगीत एवं आधुनिक साउंड सिस्टम स्थापित करने के प्रस्ताव पर चर्चा की। साथ ही लगभग 21.04 करोड़ रुपये की लागत से बन रहे पर्यटक आवास गृह तथा करीब 9.01 करोड़ रुपये की लागत वाली अन्य पर्यटन सुविधाओं को समयबद्ध ढंग से पूरा करने के निर्देश दिए।

अधिकारियों ने बताया कि सहारनपुर जनपद में वर्तमान में 33 पर्यटन परियोजनाओं पर कार्य चल रहा है, जिनमें से 14 परियोजनाएं पूरी हो चुकी हैं। इन कार्यों में टूरिस्ट फैसिलिटेशन सेंटर, पार्किंग, प्रवेश द्वार, मार्ग प्रकाश व्यवस्था, ओपन एयर थिएटर, टॉयलेट ब्लॉक, पर्यटक आवास गृह और अन्य सुविधाओं का निर्माण शामिल है।
समीक्षा बैठक में सहारनपुर के संत रविदास मंदिर, वाल्मीकि मंदिर, ठाकुरद्वारा मंदिर, देवबंद स्थित प्राचीन सदाशिव महादेव मंदिर सहित कई धार्मिक स्थलों के विकास प्रस्तावों पर भी चर्चा हुई। धर्मार्थ कार्य विभाग की ओर से सात प्राचीन शिव मंदिरों के जीर्णोद्धार और संरक्षण की योजनाएं भी प्रस्तुत की गईं। इसके अलावा नकुड़ के ऐतिहासिक रामलीला मैदान के सौंदर्यीकरण और सांस्कृतिक विकास के प्रस्ताव पर भी विचार-विमर्श किया गया।
पर्यटन मंत्री ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि सभी परियोजनाओं का नियमित स्थलीय निरीक्षण किया जाए और गुणवत्ता से किसी भी प्रकार का समझौता न किया जाए। उन्होंने यह भी कहा कि भूमिपूजन, शिलान्यास और लोकार्पण कार्यक्रमों की सूचना संबंधित जनप्रतिनिधियों को समय से दी जाए तथा उनके सुझावों को भी प्राथमिकता दी जाए।
बैठक में शुकतीर्थ धाम के विकास कार्यों की भी समीक्षा की गई। यहां टूरिस्ट फैसिलिटेशन सेंटर, गंगा घाट सौंदर्यीकरण, श्रीमद्भागवत कथा केंद्र, साउंड-लाइट एवं लेजर शो जैसी महत्वाकांक्षी परियोजनाओं पर तेजी से कार्य किया जा रहा है। मंत्री ने कहा कि प्रदेश सरकार सभी 18 मंडलों में पर्यटन परियोजनाओं की नियमित समीक्षा कर रही है, ताकि धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत का संरक्षण करते हुए पर्यटन को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया जा सके।
बैठक में जनप्रतिनिधियों, वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों तथा कार्यदायी संस्थाओं के प्रतिनिधियों ने भी भाग लिया और विभिन्न परियोजनाओं की प्रगति की जानकारी दी।








