600 मीटर तक बिखरे मलबे और शवों के अवशेष, डीएम ने जांच के दिए आदेश; फैक्टरी की सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल
सहारनपुर दैनिक शहरी चौपाल। जनपद के गंगोह-बिड़ौली मार्ग स्थित कुंडाबसी गांव में शुक्रवार शाम पटाखा निर्माण फैक्टरी में हुए भीषण विस्फोट ने पूरे इलाके को दहला दिया। हादसे में मध्य प्रदेश के दो ठेकेदारों की मौके पर ही दर्दनाक मौत हो गई, जबकि दो मजदूर लापता बताए जा रहे हैं। विस्फोट इतना शक्तिशाली था कि उसकी आवाज करीब पांच किलोमीटर दूर तक सुनाई दी और फैक्टरी का मलबा तथा शवों के अवशेष लगभग 600 मीटर तक बिखर गए। घटना के बाद जिला प्रशासन और पुलिस ने जांच शुरू कर दी है।

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, शुक्रवार शाम करीब 4:30 बजे फैक्टरी के उस हिस्से में विस्फोट हुआ, जहां आतिशबाजी के लिए बारूद का मिश्रण तैयार किया जा रहा था। उसी समय फैक्टरी के दूसरे हिस्से में करीब 20 मजदूर काम कर रहे थे। धमाका इतना तेज था कि वहां मौजूद श्रमिकों में भगदड़ मच गई और आसपास का इलाका दहल उठा।
हादसे में दीपराज (23) और संदीप (25) निवासी गांव बांझड, थाना ढोढवा, जिला खरगोन (मध्य प्रदेश) की मौके पर ही मौत हो गई। दोनों बारूद का मिश्रण तैयार कर रहे थे। विस्फोट की तीव्रता इतनी अधिक थी कि उनके शरीर के अंग अलग-अलग दिशाओं में बिखर गए। पुलिस और राहत दल को घटनास्थल तथा आसपास के पेड़ों से शवों के अवशेष एकत्र करने पड़े।
मजदूरों के अनुसार, मध्य प्रदेश के ही आकाश (जिला खरगोन) और राहुल (जिला खंडवा) भी हादसे के समय उसी क्षेत्र में मौजूद थे। देर रात तक उनका कोई पता नहीं चल सका था। प्रशासन ने उनकी तलाश शुरू कर दी है और पूरे परिसर की गहन जांच कराई जा रही है।

घटना की सूचना मिलते ही जिलाधिकारी अरविंद कुमार चौहान, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक अभिनंदन सिंह तथा मुख्य अग्निशमन अधिकारी प्रताप सिंह मौके पर पहुंचे। अधिकारियों ने राहत एवं बचाव कार्य का निरीक्षण किया और विस्फोट के कारणों की विस्तृत जांच के आदेश दिए। प्रशासन फैक्टरी में सुरक्षा मानकों के पालन, विस्फोटक सामग्री के भंडारण और संचालन प्रक्रिया की भी जांच कर रहा है।
प्रशासनिक अधिकारियों के अनुसार, फैक्टरी का संचालन गाजियाबाद निवासी हसन द्वारा किया जा रहा था और उसके पास वर्ष 2028 तक पटाखा निर्माण का वैध लाइसेंस है। बताया गया कि फैक्टरी आबादी से लगभग 300 मीटर की दूरी पर स्थित है। हालांकि हादसे के बाद यह सवाल उठने लगे हैं कि क्या लाइसेंस मिलने के बाद भी सुरक्षा मानकों का नियमित निरीक्षण किया जा रहा था। देर रात तक फैक्टरी संचालक के मौके पर न पहुंचने की भी चर्चा रही।

यह हादसा एक बार फिर पटाखा फैक्टरियों की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि मुनाफे की दौड़ में कई बार सुरक्षा नियमों की अनदेखी की जाती है, जिसका खामियाजा मजदूरों को अपनी जान देकर चुकाना पड़ता है।
गौरतलब है कि सहारनपुर जनपद में यह पहला मामला नहीं है। इससे पहले भी गंगोह, सरसावा, देवबंद, बिहारीगढ़, चिलकाना रोड, बेहट रोड और मोहल्ला आतिशबाजान सहित कई क्षेत्रों में पटाखा फैक्टरियों में विस्फोट और अवैध निर्माण के मामले सामने आ चुके हैं। कई घटनाओं में लोगों की जान जा चुकी है, जबकि पुलिस और प्रशासन ने समय-समय पर अवैध पटाखा निर्माण इकाइयों पर कार्रवाई भी की है।
विशेषज्ञों का मानना है कि विस्फोटक पदार्थों से जुड़े उद्योगों में नियमित सुरक्षा ऑडिट, प्रशिक्षित कर्मचारियों की नियुक्ति, पर्याप्त दूरी पर उत्पादन इकाइयों का संचालन तथा अग्निशमन सुरक्षा मानकों का कड़ाई से पालन बेहद आवश्यक है। यदि इन नियमों का पालन नहीं किया जाता, तो भविष्य में भी ऐसे हादसों की पुनरावृत्ति की आशंका बनी रहेगी।

फिलहाल प्रशासन ने पूरे मामले की जांच शुरू कर दी है। जांच रिपोर्ट के आधार पर यह स्पष्ट होगा कि हादसा तकनीकी कारणों से हुआ, मानकों की अनदेखी के कारण हुआ या फिर किसी अन्य वजह से। वहीं मृतकों के परिजनों को सूचना दे दी गई है और लापता मजदूरों की तलाश जारी है।









