दैनिक शहरी चौपाल
नई दिल्ली। केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद देशभर में चल रहे छात्र आंदोलन ने नया राजनीतिक और सामाजिक मोड़ ले लिया है। छात्र आंदोलन से जुड़े संगठन कॉकरोच पार्टी ने इसे अपनी प्रमुख मांगों में से एक की पूर्ति बताते हुए कहा कि उनका आंदोलन अभी समाप्त नहीं हुआ है। संगठन का कहना है कि शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता, परीक्षा प्रणाली में सुधार और कथित अनियमितताओं के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई होने तक उनका संघर्ष जारी रहेगा।
संगठन के पदाधिकारियों ने मीडिया से बातचीत में कहा कि केंद्रीय शिक्षा मंत्री का इस्तीफा छात्रों के लंबे संघर्ष का परिणाम है। उनका दावा है कि पिछले कई दिनों से देश के विभिन्न हिस्सों में हजारों छात्र परीक्षा प्रणाली में कथित गड़बड़ियों, पेपर लीक और युवाओं के भविष्य से जुड़े मुद्दों को लेकर लगातार प्रदर्शन कर रहे थे। उनका कहना है कि इस आंदोलन में बड़ी संख्या में छात्र, अभिभावक और विभिन्न सामाजिक संगठनों ने भी समर्थन दिया, जिसके बाद सरकार पर दबाव बढ़ा और अंततः शिक्षा मंत्री ने अपने पद से इस्तीफा दिया।
हालांकि संगठन ने स्पष्ट किया कि उनकी लड़ाई केवल एक मंत्री के इस्तीफे तक सीमित नहीं है। उनका कहना है कि जिन छात्रों ने परीक्षा विवाद और उससे जुड़े मानसिक तनाव के कारण कथित रूप से आत्महत्या की, उनके परिवारों को न्याय मिलना चाहिए। संगठन ने मांग की कि ऐसे सभी मामलों की निष्पक्ष जांच कराई जाए और जिन परिवारों ने अपने बच्चों को खोया है, उन्हें सरकार की ओर से ₹1 करोड़ का मुआवजा दिया जाए। उनका कहना है कि यह केवल आर्थिक सहायता का विषय नहीं, बल्कि उन परिवारों के प्रति सरकार की नैतिक जिम्मेदारी भी है।
कॉकरोच पार्टी के नेताओं ने यह भी आरोप लगाया कि आंदोलन के दौरान कई स्थानों पर छात्रों के साथ कठोर व्यवहार किया गया। संगठन ने कहा कि विशेष रूप से 20 जुलाई के बाद हुए प्रदर्शनों के दौरान छात्रों पर कथित लाठीचार्ज और बल प्रयोग की घटनाओं की स्वतंत्र जांच कराई जानी चाहिए। उनका कहना है कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर यदि कहीं भी आवश्यकता से अधिक बल प्रयोग हुआ है तो उसकी जवाबदेही तय की जानी चाहिए।
संगठन ने मांग की कि जिन पुलिस अधिकारियों या कर्मियों ने कानून और नियमों का उल्लंघन करते हुए छात्रों के साथ कथित रूप से दुर्व्यवहार किया, उनके खिलाफ विभागीय और कानूनी कार्रवाई की जाए। उनका कहना है कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में छात्रों को अपनी बात शांतिपूर्ण ढंग से रखने का अधिकार है और इस अधिकार का सम्मान किया जाना चाहिए।
आंदोलन के दौरान संगठन के नेताओं ने मंच से दिल्ली पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों को संबोधित करते हुए कड़ी चेतावनी भी दी। उन्होंने कहा, “यदि छात्र एक केंद्रीय मंत्री का इस्तीफा दिला सकते हैं, तो जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई भी करवा सकते हैं।” संगठन के इस बयान की राजनीतिक और सामाजिक हलकों में व्यापक चर्चा हो रही है। हालांकि इस बयान पर दिल्ली पुलिस या संबंधित अधिकारियों की ओर से तत्काल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
कॉकरोच पार्टी का कहना है कि परीक्षा प्रणाली से जुड़े विवादों ने लाखों छात्रों के भविष्य को प्रभावित किया है। उनका आरोप है कि यदि समय रहते अनियमितताओं पर प्रभावी कार्रवाई की जाती तो देशभर में छात्रों के बीच इतना आक्रोश पैदा नहीं होता। संगठन ने कहा कि युवाओं का सरकार और परीक्षा व्यवस्था पर विश्वास बनाए रखने के लिए पारदर्शी और जवाबदेह व्यवस्था विकसित करना आवश्यक है।
संगठन ने यह भी स्पष्ट किया कि आने वाले दिनों में वह अपने आंदोलन की अगली रणनीति की घोषणा करेगा। यदि उनकी अन्य मांगों पर भी सरकार की ओर से सकारात्मक कदम नहीं उठाए गए तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा। इसके लिए विभिन्न छात्र संगठनों, सामाजिक संस्थाओं और युवाओं से संपर्क किया जा रहा है ताकि आगे की रूपरेखा तैयार की जा सके।
कॉकरोच पार्टी के नेताओं का कहना है कि उनका उद्देश्य किसी व्यक्ति विशेष को निशाना बनाना नहीं, बल्कि शिक्षा व्यवस्था में सुधार और छात्रों के हितों की रक्षा सुनिश्चित करना है। उनका दावा है कि जब तक परीक्षा प्रणाली को पूरी तरह पारदर्शी नहीं बनाया जाता, कथित दोषियों के खिलाफ कार्रवाई नहीं होती और प्रभावित परिवारों को न्याय नहीं मिलता, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।
उधर, धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद अब राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में इस बात पर चर्चा तेज हो गई है कि शिक्षा मंत्रालय का नेतृत्व किसे सौंपा जाएगा और सरकार छात्रों की शेष मांगों पर क्या रुख अपनाएगी। आने वाले दिनों में सरकार के फैसले और छात्र संगठनों की रणनीति इस पूरे आंदोलन की दिशा तय करेंगे। फिलहाल सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि क्या सरकार आंदोलनकारियों की अन्य मांगों पर भी कोई निर्णय लेती है या छात्र संगठन अपने आंदोलन को और तेज करने की घोषणा करते हैं।









