शहरी चौपाल ब्यूरो
सहारनपुर , दैनिक शहरी चौपाल। सहारनपुर के स्वादिष्ट चौसा, लंगड़ा और गुलाब जामुन आम अब अंतरराष्ट्रीय बाजार में अपनी नई पहचान बनाने की ओर अग्रसर हैं। कृषि विपणन विभाग, विदेश व्यापार विभाग और एपीडा (APEDA) की संयुक्त पहल पर नवीन मंडी स्थल (ई-नाम मंडी) में आयोजित एमओयू कार्यक्रम में आम उत्पादकों और निर्यातकों के बीच 60 मीट्रिक टन आम के क्रय-विक्रय के लिए महत्वपूर्ण समझौते किए गए। इस पहल से किसानों को बेहतर बाजार, उचित मूल्य और निर्यात के नए अवसर मिलने की उम्मीद है।
कार्यक्रम का उद्देश्य सहारनपुर के आम उत्पादकों, किसान उत्पादक संगठनों (एफपीओ) और निर्यातकों के बीच सीधा संपर्क स्थापित करना था, ताकि बिचौलियों की भूमिका कम हो और किसानों को उनकी उपज का बेहतर लाभ मिल सके। अधिकारियों ने बताया कि सरकार कृषि उत्पादों के निर्यात को बढ़ावा देने के लिए लगातार प्रयास कर रही है और सहारनपुर के आम की गुणवत्ता अंतरराष्ट्रीय बाजार में प्रतिस्पर्धा करने में सक्षम है।
कार्यक्रम के दौरान Ladwa Farmers Producer Company Limited और BMS Organic FPO, लखनऊ के बीच 30 मीट्रिक टन चौसा एवं लंगड़ा आम की खरीद के लिए एमओयू हुआ। इसके अलावा Ladwa Farmers Producer Company Limited और Utkrisht Producer Company, लखनऊ के बीच 10 मीट्रिक टन चौसा आम तथा Deoband Producer Company Limited एवं BMS Organic FPO के बीच 10 मीट्रिक टन चौसा आम के लिए समझौता किया गया। वहीं SNDS Export Company और प्रगतिशील किसान बसंत राणा के बीच 10 मीट्रिक टन गुलाब जामुन आम के निर्यात हेतु एमओयू संपन्न हुआ।
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में उप निदेशक (प्रशासन), मंडी परिषद सहारनपुर देवेन्द्र कुमार वर्मा उपस्थित रहे। उनके साथ एपीडा लखनऊ से एसोसिएट आलोक मिश्रा, मुकेश कुमार, मार्केटिंग ऑफिसर राहुल यादव, मंडी सचिव देवेन्द्र प्रताप, मार्केटिंग इंस्पेक्टर मुकुल कुमार, एफपीओ प्रतिनिधि, प्रगतिशील किसान, निर्यातक और बड़ी संख्या में कृषक मौजूद रहे।
विशेषज्ञों ने किसानों को आम की गुणवत्ता, ग्रेडिंग, पैकेजिंग, एपीडा पंजीकरण और निर्यात प्रक्रिया की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने कहा कि यदि किसान वैज्ञानिक तरीके से उत्पादन और पैकेजिंग करेंगे तो सहारनपुर का आम यूरोप, खाड़ी देशों और अन्य अंतरराष्ट्रीय बाजारों में मजबूत पहचान बना सकता है।
अधिकारियों ने बताया कि ऐसे समझौते किसानों को उनकी उपज का बेहतर मूल्य दिलाने के साथ-साथ एफपीओ को आर्थिक रूप से मजबूत बनाएंगे। इससे सहारनपुर में बागवानी आधारित कृषि को नई दिशा मिलेगी और स्थानीय किसानों की आय बढ़ाने में भी मदद मिलेगी। कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि यदि निर्यात श्रृंखला को लगातार मजबूत किया गया तो आने वाले वर्षों में सहारनपुर उत्तर प्रदेश के प्रमुख आम निर्यातक जिलों में शामिल हो सकता है।








