पोस्टमार्टम रिपोर्ट ने खोले हादसे के राज, लापता मजदूरों की तलाश जारी; सुरक्षा मानकों की अनदेखी पर प्रशासन सख्त
मनोज मिड्ढा
सहारनपुर (दैनिक शहरी चौपाल)। गंगोह क्षेत्र के कुंडाबसी गांव स्थित राणा फायर वर्क्स पटाखा फैक्टरी में हुए भीषण विस्फोट की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, वैसे-वैसे हादसे से जुड़े नए और चौंकाने वाले तथ्य सामने आ रहे हैं। शनिवार को मृत ठेकेदारों के पोस्टमार्टम के बाद यह स्पष्ट हुआ कि उनकी मौत केवल विस्फोट से नहीं, बल्कि आग की चपेट में आने और शरीर पर आई गंभीर चोटों के कारण हुई। वहीं, फैक्टरी मालिक के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर पुलिस ने उसकी तलाश तेज कर दी है। घटनास्थल से मिले मानव अवशेषों की डीएनए जांच भी कराई जाएगी, ताकि लापता मजदूरों की स्थिति स्पष्ट हो सके।
शुक्रवार शाम बारूद का मिश्रण तैयार करते समय हुए धमाके ने पूरे इलाके को दहला दिया था। विस्फोट इतना भीषण था कि फैक्टरी के कमरे और टिनशेड पूरी तरह उड़ गए तथा मृतकों के शरीर के अवशेष करीब 600 मीटर तक बिखर गए। इस भयावह दृश्य ने पुलिस और चिकित्सकों को भी स्तब्ध कर दिया।
पोस्टमार्टम रिपोर्ट के अनुसार विस्फोट के तुरंत बाद उठी तेज चिंगारियों और आग की लपटों में दोनों ठेकेदार बुरी तरह झुलस गए थे। इसके साथ ही शरीर के कई हिस्सों पर गंभीर चोटें भी पाई गईं। डॉक्टरों की टीम को शवों के बिखरे हुए अंगों का अलग-अलग परीक्षण करना पड़ा, जिसके कारण पोस्टमार्टम में सामान्य से अधिक समय लगा।
मालिक के खिलाफ दर्ज हुई एफआईआर
घटना के बाद पुलिस ने फैक्टरी मालिक हसन, निवासी असालतपुर फर्रुखनगर, गाजियाबाद के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 105, 288 तथा विस्फोटक अधिनियम की धारा 5/9-बी के तहत मुकदमा दर्ज कर लिया है। पुलिस का कहना है कि प्रथम दृष्टया लाइसेंस की शर्तों और सुरक्षा मानकों का गंभीर उल्लंघन सामने आया है। हादसे के बाद से मालिक फरार है और उसकी तलाश की जा रही है।
DNA जांच से खुलेगा लापता मजदूरों का रहस्य
विस्फोट के बाद मध्य प्रदेश के खरगोन निवासी आकाश रावत और खंडवा निवासी राहुल उर्फ लालू लापता हैं। घटनास्थल और आसपास से मिले मानव अवशेषों को सुरक्षित कर लिया गया है। अब इनकी डीएनए जांच कराई जाएगी, जिससे यह पता चल सके कि ये अवशेष मृत ठेकेदारों के हैं या लापता मजदूरों के।
फैक्टरी सील, बारूद को किया जा रहा निष्क्रिय
संभावित खतरे को देखते हुए पुलिस और फायर ब्रिगेड की टीमें लगातार फैक्टरी परिसर में तैनात हैं। परिसर में मौजूद बारूद और तैयार पटाखों पर पानी डालकर उन्हें निष्क्रिय किया जा रहा है, ताकि दोबारा विस्फोट की आशंका न रहे। पूरे क्षेत्र को सुरक्षा घेरे में लेकर आम लोगों की आवाजाही पर रोक लगा दी गई है।
श्रम विभाग भी जांच में जुटा
शनिवार को श्रम प्रवर्तन अधिकारी मनोज कुमार ने फैक्टरी पहुंचकर मजदूरों के बयान दर्ज किए। जांच के दौरान उनकी आयु, कार्य की प्रकृति, सुरक्षा उपकरणों की उपलब्धता और रोजगार संबंधी जानकारी एकत्र की गई। विभाग यह भी जांच कर रहा है कि श्रमिकों के लिए निर्धारित सुरक्षा मानकों और श्रम कानूनों का पालन किया जा रहा था या नहीं।
मानकों की अनदेखी बनी हादसे की वजह?
प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि फैक्टरी में सुरक्षा मानकों का पर्याप्त पालन नहीं किया गया था। लाइसेंस की शर्तों के विपरीत विस्फोटक सामग्री के भंडारण, सुरक्षा उपकरणों की कमी और कार्यस्थल पर आवश्यक सावधानियों की अनदेखी जैसे कई गंभीर सवाल जांच के दायरे में हैं। प्रशासन ने पूरे मामले की विस्तृत जांच शुरू कर दी है और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई के संकेत दिए हैं।
सीओ शशिप्रकाश शर्मा ने बताया कि लापता मजदूरों की तलाश जारी है। घटनास्थल से मिले मानव अवशेषों की डीएनए जांच कराई जाएगी और फैक्टरी मालिक की गिरफ्तारी के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। जांच पूरी होने के बाद हादसे के वास्तविक कारणों का विस्तृत खुलासा किया जाएगा।








