शहरी चौपाल ब्यूरो
सहारनपुर , दैनिक शहरी चौपाल। नगर निगम ने शहर की सफाई व्यवस्था को लेकर बड़ा कदम उठाते हुए 58 वार्डों की सफाई निजी एजेंसी के माध्यम से कराने की प्रक्रिया दोबारा शुरू कर दी है। पहली टेंडर प्रक्रिया में कोई भी कंपनी तकनीकी मानकों पर खरी नहीं उतर सकी थी, जिसके बाद नगर निगम ने टेंडर की शर्तों में संशोधन करते हुए सफाईकर्मियों के वेतन में बढ़ोतरी कर दी है। अब संशोधित शर्तों के साथ टेंडर आमंत्रित किए गए हैं और इसकी तकनीकी बोली 10 अगस्त को खोली जाएगी।
नगर निगम बोर्ड पहले ही 70 में से 58 वार्डों की सफाई व्यवस्था निजी एजेंसियों को सौंपने के प्रस्ताव को मंजूरी दे चुका है। हालांकि इस फैसले का सफाईकर्मियों ने विरोध किया था और हड़ताल भी की थी। इसके बाद उनकी मांगों पर विचार करते हुए नगर निगम ने प्रस्ताव में संशोधन किया और कार्यकारिणी समिति के साथ बोर्ड से दोबारा स्वीकृति प्राप्त की।
पहली टेंडर प्रक्रिया में पांच कंपनियों ने आवेदन किया था, लेकिन तकनीकी जांच के दौरान कोई भी कंपनी निर्धारित मानकों को पूरा नहीं कर सकी। इसके बाद निगम प्रशासन ने टेंडर की शर्तों में बदलाव करते हुए सफाईकर्मियों के दैनिक वेतन को 422.85 रुपये से बढ़ाकर 500.33 रुपये कर दिया।
इस संशोधन के बाद ठेके पर कार्य करने वाले सफाईकर्मियों का मासिक वेतन लगभग 12,685 रुपये से बढ़कर 15,009 रुपये हो जाएगा। हालांकि नगर निगम की कार्यकारिणी पहले ही 17,446 रुपये मासिक वेतन देने की घोषणा कर चुकी है, जिस पर अंतिम निर्णय आगे लिया जाएगा।
नगर निगम की योजना के अनुसार 58 वार्डों की सफाई व्यवस्था के लिए लगभग 3,000 सफाईकर्मियों की नियुक्ति की जाएगी। वर्तमान में नगर निगम के पास लगभग 1,700 सफाईकर्मी कार्यरत हैं, जिनमें करीब 300 स्थायी और शेष संविदा कर्मचारी हैं। नई व्यवस्था लागू होने के बाद मौजूदा कर्मचारी शेष 12 वार्डों में कार्य करेंगे, जबकि 58 वार्डों की जिम्मेदारी निजी एजेंसी के कर्मचारियों के पास होगी।
नगर स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. प्रवीण शाह ने बताया कि वेतन वृद्धि के कारण टेंडर की शर्तों में बदलाव किया गया है। संशोधित प्रक्रिया के तहत 10 अगस्त को तकनीकी बोली खोली जाएगी। इसके बाद पात्र एजेंसी का चयन कर आगे की कार्रवाई शुरू होगी।
नगर निगम का मानना है कि नई शर्तों से अधिक योग्य कंपनियां टेंडर प्रक्रिया में भाग लेंगी और शहर की सफाई व्यवस्था पहले से अधिक प्रभावी और व्यवस्थित हो सकेगी। वहीं सफाईकर्मी संगठनों की नजर भी इस पूरी प्रक्रिया पर बनी हुई है, क्योंकि निजीकरण का मुद्दा पहले से ही चर्चा और विरोध का विषय रहा है।








