अमित कुमार
छुटमलपुर (सहारनपुर)। राष्ट्रीय बाघ दिवस के अवसर पर विकासखंड मुजफ्फराबाद स्थित प्राथमिक विद्यालय छुटमलपुर नंबर-दो में बुधवार को जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में विद्यार्थियों ने रंग-बिरंगे बाघ के मुखौटे तैयार कर वन्यजीव संरक्षण का संदेश दिया तथा पर्यावरण और जैव विविधता की रक्षा का संकल्प लिया।
विद्यालय की शिक्षिका अंजलि आर्य ने बच्चों को संबोधित करते हुए बताया कि प्रत्येक वर्ष 29 जुलाई को राष्ट्रीय बाघ दिवस मनाया जाता है। इसकी शुरुआत वर्ष 2010 में सेंट पीटर्सबर्ग बाघ सम्मेलन के दौरान हुई थी। उन्होंने बताया कि इस वर्ष की थीम “आदिवासी लोगों और स्थानीय समुदायों को केंद्र में रखकर बाघों के भविष्य को सुरक्षित करना” है, जो बाघ संरक्षण में जनभागीदारी की महत्वपूर्ण भूमिका को दर्शाती है।
उन्होंने कहा कि बाघ केवल एक वन्यजीव नहीं, बल्कि पूरे पारिस्थितिकी तंत्र की मजबूती का प्रतीक हैं। शीर्ष शिकारी होने के कारण वे जंगलों में वन्यजीवों की आबादी को संतुलित रखते हैं, जिससे जैव विविधता और प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण होता है। उन्होंने बच्चों को बताया कि एक समय दुनिया में एक लाख से अधिक जंगली बाघ थे, लेकिन आज उनकी संख्या घटकर लगभग चार हजार रह गई है। इसके पीछे अवैध शिकार, प्राकृतिक आवासों का लगातार नष्ट होना, मानव-वन्यजीव संघर्ष और पर्यावरणीय असंतुलन प्रमुख कारण हैं।
अंजलि आर्य ने कहा कि बाघ दिवस केवल एक औपचारिक आयोजन नहीं, बल्कि प्रकृति और वन्यजीवों के संरक्षण के प्रति समाज को जागरूक करने का वैश्विक अभियान है। यदि आने वाली पीढ़ियों को सुरक्षित पर्यावरण और समृद्ध वन संपदा देनी है तो बच्चों में बचपन से ही प्रकृति प्रेम और वन्यजीव संरक्षण की भावना विकसित करनी होगी।

कार्यक्रम के दौरान अरशद, आयशा, अर्शी, उमर, रिहान, आयन, हुमैरा, अबुजर, मंदाकिनी, ईश और आहद सहित अनेक विद्यार्थियों ने शिक्षिका के मार्गदर्शन में आकर्षक बाघ के मुखौटे तैयार किए। बच्चों ने वन्यजीव संरक्षण के नारे भी लगाए और पर्यावरण बचाने का संदेश दिया।
विद्यालय परिवार ने संकल्प लिया कि भविष्य में भी पर्यावरण संरक्षण, जैव विविधता और वन्यजीवों के संरक्षण को लेकर ऐसे जागरूकता कार्यक्रम नियमित रूप से आयोजित किए जाएंगे, ताकि नई पीढ़ी प्रकृति के प्रति जिम्मेदार और संवेदनशील बन सके।








